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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले पर जताई कड़ी आपत्ति, टीएमसी नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर दिए नए विकल्पराजनीति
18 सित॰ 2026, 10:06 am (39 दिन पहले)· 1

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले पर जताई कड़ी आपत्ति, टीएमसी नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर दिए नए विकल्प

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक लगने के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को अपना जवाब भेज दिया है। पार्टी प्रमुख ने अंतरिम आदेश पर कड़ा एतराज जताते हुए तीन नए नामों और प्रतीकों के विकल्प सुझाए हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे घमासान के बीच ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखी। पार्टी की सर्वोच्च नेता ने तय समय सीमा के भीतर आयोग को अपना आधिकारिक जवाब भेजकर इस पूरी कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जाहिर की है।

चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश और रोक

यह पूरा विवाद तब गहराया जब चुनाव आयोग ने 17 सितंबर 2026 को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के दौरान दोनों प्रतिद्वंद्वी धड़ों को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक घासफूल चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी। चुनाव चिन्ह आरक्षण और आवंटन आदेश 1968 के पैरा 15 के तहत यह कदम उठाया गया है। आयोग ने दोनों पक्षों से कहा था कि वे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अपने लिए तीन वैकल्पिक नाम और प्रतीक सुझाएं।

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ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया और नए विकल्प

पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी ने इस अंतरिम आदेश के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुवार रात 11 बजकर 36 मिनट पर आयोग को अपना लिखित जवाब भेजा। उनके इस जवाब में आयोग के फैसले के प्रति मजबूत विरोध दर्ज कराया गया है। इसके साथ ही आगामी चुनावी मैदान में उतरने के लिए तीन नए वैकल्पिक नामों और चुनाव चिह्नों के प्रस्ताव भी सौंपे गए हैं, जिन पर अब आयोग को अंतिम निर्णय लेना है।

विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं

चुनाव आयोग के इस कदम पर केवल तृणमूल कांग्रेस ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अन्य विपक्षी दलों ने भी सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी दल के चुनाव चिह्न को इस तरह फ्रीज करना सही न्याय नहीं है और यह आयोग के संवैधानिक दायित्वों से जुड़ा एक गंभीर विषय है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अलग हुआ धड़ा एआईटीसी के चुनाव चिह्न पर कोई वैध दावा नहीं रखता है।

इंडिया गठबंधन के नेताओं के तीखे सुर

कांग्रेस पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी चुनाव आयोग की इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर आरोप लगाया कि आयोग का यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक चिंताजनक स्थिति पैदा करता है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े पुराने राजनीतिक विवादों के साथ की। इसके अलावा समाजवादी पार्टी समेत इंडिया गठबंधन के कई अन्य घटकों ने भी आयोग के इस फैसले पर अपनी सवालिया प्रतिक्रियाएं दर्ज कराई हैं।

उपचुनाव से पहले पहचान का संकट

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनावों से ठीक पहले दोनों धड़ों के सामने अपनी पहचान बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। आयोग के अगले कदमों से ही यह तय हो पाएगा कि दोनों पक्षों को चुनावी रण में उतरने के लिए कौन सा नया नाम और कौन सा चुनाव चिह्न आवंटित किया जाता है। फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के खेमे से इस अंतरिम आदेश को वापस लेने या इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध भी किया गया है, और सबकी निगाहें आयोग के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।

सवाल-जवाब

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को अपना जवाब कब भेजा?
ममता बनर्जी ने गुरुवार रात 11 बजकर 36 मिनट पर चुनाव आयोग को अपना जवाब भेजा।
चुनाव आयोग ने किस आदेश के तहत टीएमसी के नाम और चिह्न पर रोक लगाई?
आयोग ने चुनाव चिन्ह आरक्षण और आवंटन आदेश 1968 के पैरा 15 के तहत यह अंतरिम आदेश जारी किया।
किन विधानसभा उपचुनावों के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है?
यह फैसला पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर लिया गया है।
कांग्रेस की तरफ से इस फैसले पर किसने प्रतिक्रिया दी?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर आपत्ति जताई।
ममता खेमे की ओर से आयोग को क्या विकल्प दिए गए हैं?
ममता बनर्जी की तरफ से आयोग को तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प सुझाए गए हैं।
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