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मतदान में धांधली के दावों के बीच अमेरिका में बुजुर्ग देखभाल केंद्रों की निगरानी में जुटे दक्षिणपंथी समूहराजनीति
12 अक्तू॰ 2026, 4:09 pm (15 दिन पहले)· 0

मतदान में धांधली के दावों के बीच अमेरिका में बुजुर्ग देखभाल केंद्रों की निगरानी में जुटे दक्षिणपंथी समूह

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले कंजर्वेटिव कार्यकर्ता नर्सिंग होम और केयर सेंटरों पर फर्जी मतदान कराने का आरोप लगाकर निगरानी अभियान चला रहे हैं, जिससे वृद्ध मतदाताओं के अधिकारों पर बहस छिड़ गई है।

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों की सरगर्मी के बीच रूढ़िवादी संगठनों ने अपना ध्यान अब बुजुर्गों के देखभाल केंद्रों, नर्सिंग होम और असिस्टेड-लिविंग परिसरों की ओर मोड़ दिया है। दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं का दावा है कि वामपंथी संगठन इन संस्थानों में रहने वाले असहाय नागरिकों के मतपत्रों का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस आधारहीन दावे को हवा देते हुए ऐसे समूहों ने अपने समर्थकों को स्थानीय देखभाल केंद्रों से संपर्क साधने, उनसे सवाल-जवाब करने और उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

देखभाल केंद्रों को निशाना बनाने की रणनीति

इस पूरे अभियान के केंद्र में इलेक्शन इंटीग्रिटी नेटवर्क नामक संगठन है, जिसकी कमान क्लीटा मिशेल के हाथों में है। स्टीव बैनन के कार्यक्रम 'वॉर रूम' में बात करते हुए मिशेल ने आरोप लगाया कि विरोधी संगठन इन परिसरों में घुसकर सर्वाधिक लाचार लोगों के वोट चुरा रहे हैं। इस कथित हेराफेरी के प्रमाण के रूप में उन्होंने विस्कॉन्सिन के साल 2020 के एक पुराने मामले का हवाला दिया, जिसमें एक काउंटी शेरिफ ने दावा किया था कि एक केयर होम में आठ बुजुर्गों के मतपत्र दूसरों द्वारा भरे गए थे। हालांकि, विस्कॉन्सिन इलेक्शन कमीशन ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था। मिशेल का यह भी कहना था कि इसी मामले की वजह से डोनाल्ड ट्रंप विस्कॉन्सिन में 2020 का चुनाव हार गए थे, जबकि चुनावी आंकड़े बताते हैं कि ट्रंप वहां 20,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से पराजित हुए थे।

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संगठन ने अपनी वेबसाइट पर एक विशेष टूलकिट उपलब्ध कराई है, जिसे डाउनलोड करके कार्यकर्ताओं को अपने इलाके के नर्सिंग होम में फोन करने और ईमेल भेजने के लिए कहा जा रहा है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर ऐसे ग्राफ़िक्स और तस्वीरें प्रसारित की जा रही हैं, जो नर्सिंग होम में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की धारणा को बढ़ावा देती हैं। एक प्रचार अभियान के तहत इस नेटवर्क ने उन राज्यों के देखभाल केंद्रों का ब्योरा जारी किया है जहां कड़े चुनावी मुकाबले होने हैं। इनमें एरिज़ोना, कैलिफ़ोर्निया, न्यू हैम्पशायर, पेंसिल्वेनिया और वर्जीनिया शामिल हैं। इन पोस्टों में रहने वाले बुजुर्गों को राजनीतिक शिकारियों के संभावित निशाने के रूप में चित्रित किया गया है।

प्रशासनिक नियमों में बदलाव और कानूनी चेतावनियां

मतदान में गड़बड़ी के इन दावों को हाल के सरकारी कदमों से भी बल मिला है। जुलाई के महीने में सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज (सीएमएस) ने एक नया दिशा-निर्देश जारी किया, जिसमें नर्सिंग होम कर्मियों को मिलने वाली पिछली चुनावी सहायता की छूट को वापस ले लिया गया। पहले के नियमों में कर्मी बुजुर्गों को डाक मतपत्र भरने या मतदान केंद्रों तक ले जाने में मदद कर सकते थे, लेकिन नए ज्ञापन में कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि उन पर किसी अनुचित दबाव या अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सीएमएस के इस दस्तावेज में दावा किया गया था कि एजेंसी के संज्ञान में बुजुर्गों के अधिकारों के उल्लंघन की कुछ शिकायतें आई हैं, यद्यपि इस ज्ञापन में उल्लिखित किसी भी उदाहरण में फर्जी मतदान की पुष्टि नहीं हो सकी थी। इस नीतिगत बदलाव की राजनीतिक हलकों में कड़ी आलोचना हुई है। अगस्त में सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और सीनेटर एलेक्स पाडिला के नेतृत्व में कई सांसदों ने सीएमएस को कड़ा पत्र भेजा। सांसदों ने आगाह किया कि देश भर के लगभग 20 लाख नर्सिंग होम निवासियों के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय, यह नया नियम उन्हें मताधिकार से वंचित कर देगा। सीएमएस प्रशासक मेहमत ओज़ को लिखे इस पत्र में सांसदों ने कहा कि यह कदम मतदान में सहायता करने वाले कर्मचारियों को भयभीत करने का स्पष्ट प्रयास प्रतीत होता है।

निजी संगठनों की सक्रियता और नए अभियान

चुनाव में एक महीने से भी कम समय बाकी रहने पर कई अन्य समूह भी इसी तरह की मुहिम चला रहे हैं। न्यूयॉर्क स्थित प्रोजेक्ट सिविका ने 'अडॉप्ट अ केयर फैसिलिटी' नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत स्वयंसेवकों को वृद्ध आश्रमों पर नजर रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रोजेक्ट सिविका की सह-संस्थापक और अध्यक्ष किम हर्मैंस ने बताया कि उनका संगठन न्यू यॉर्क के चुनावी रिकॉर्ड की समीक्षा कर रहा है, जहां चुनाव से ठीक पहले 85 वर्ष से अधिक उम्र के कई लोगों ने पहली बार पंजीकरण कराया था। हर्मैंस के अनुसार यह कोई गैरकानूनी बात नहीं है, लेकिन इससे यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि केंद्र इस पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन कैसे करते हैं।

नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि डाक मतपत्रों और गैर-नागरिकों द्वारा मतदान के मनगढ़ंत आरोपों की तरह यह अभियान भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कमजोर करने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। शारीरिक रूप से अक्षम और उम्रदराज मतदाताओं को निशाना बनाए जाने से इस बात का अंदेशा बढ़ गया है कि मतदान केंद्रों तक पहुंचने में असमर्थ लाखों लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार से महरूम रह सकते हैं।

सवाल-जवाब

इलेक्शन इंटीग्रिटी नेटवर्क नर्सिंग होम को निशाना क्यों बना रहा है?
इस समूह का बिना किसी ठोस सबूत के आरोप है कि वामपंथी संगठन नर्सिंग होम में रहने वाले कमजोर बुजुर्गों के मतपत्रों का दुरुपयोग कर चुनाव में धांधली कर रहे हैं।
विस्कॉन्सिन के जिस मामले का हवाला दिया गया, उसकी हकीकत क्या है?
विस्कॉन्सिन में एक काउंटी शेरिफ ने 8 बुजुर्गों के वोट भरे जाने का आरोप लगाया था, जिसे विस्कॉन्सिन इलेक्शन कमीशन ने पूरी तरह खारिज कर दिया था।
सीएमएस के नए ज्ञापन में क्या बदलाव किया गया है?
सीएमएस ने नर्सिंग होम कर्मियों द्वारा बुजुर्गों को डाक मतपत्र भरने या मतदान केंद्र ले जाने में मिलने वाली सहायता के नियमों को हटाकर अनुचित दबाव डालने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अमेरिकी सांसदों ने इस नीतिगत बदलाव पर क्या आपत्ति जताई है?
सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और एलेक्स पाडिला ने कहा है कि यह नया नियम देश भर के 20 लाख नर्सिंग होम निवासियों को मतदान के अधिकार से वंचित करने और कर्मचारियों को डराने का प्रयास है।
प्रोजेक्ट सिविका का 'अडॉप्ट अ केयर फैसिलिटी' अभियान क्या है?
यह न्यूयॉर्क स्थित एक समूह का अभियान है जिसके तहत कार्यकर्ता केयर सेंटरों के मतदाता पंजीकरण और उनके चुनावी प्रबंधन पर नजर रख रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·14 दिन पहले

बुजुर्गों के वोटों को लेकर अमेरिका में जो राजनीति गरमाई है, उस पर पूरा यकीन करना मुश्किल है। क्या वाकई लोग इतने शातिर हो गए हैं कि इन सेंटर्स तक पहुंच जाएंगे?

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

दादी के आखिरी दिनों में जब वे व्हीलचेयर पर थीं, तब वोट डालने के लिए परिवार को कितनी मशक्कत करनी पड़ी थी, वो मैं जानता हूँ। ऐसे में अमेरिका में बुजुर्गों के नाम पर इस तरह राजनीति होना और उन पर शक करना बहुत गलत लग रहा है।

Michael Anderson@michael-anderson·14 दिन पहले

रोहन, आपकी बात बिल्कुल सही है। चुनाव नजदीक आते ही इन कमजोर जगहों को निशाना बनाना और इस तरह का शक पैदा करना बहुत परेशान करने वाला है।

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

चुनाव जीतने के चक्कर में अब बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। केयर होम में रहने वाले लाचार लोगों के वोटों पर राजनीति करना बेहद शर्मनाक है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

रविकेश जी, सही कह रहे हैं आप। राजनीति के चक्कर में अब बुजुर्गों और लाचार लोगों को मोहरा बनाना वाकई शर्मनाक है।

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