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संसद में एंटी पेपर लीक बिल पर हंगामा, अभिषेक बनर्जी और अखिलेश यादव ने सरकार को घेराराजनीति
28 जुल॰ 2026, 3:58 pm (13 दिन पहले)· 0

संसद में एंटी पेपर लीक बिल पर हंगामा, अभिषेक बनर्जी और अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा

लोकसभा में मानसून सत्र के दौरान एंटी पेपर लीक बिल पर तीखी बहस चल रही है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है, जबकि सत्ता पक्ष ने बिल को कड़ा कदम बताया है।

नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में माहौल उस समय गरमा गया जब एंटी पेपर लीक बिल यानी पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026 पर चर्चा शुरू हुई। मंगलवार को दोपहर दो बजे के बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब इस महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष ने सरकार को घेरने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। शुरुआत में इस विधायी चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों की मांग और गंभीरता को देखते हुए इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत से अधिक यानी कुल 10 घंटे कर दिया गया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी सदन के सभी सदस्यों को इस गंभीर मुद्दे पर अपने विचार खुलकर रखने की पूरी अनुमति दी ताकि इस विषय पर व्यापक मंथन हो सके।

अभिषेक बनर्जी का तीखा हमला और सदन में नोकझोक

सदन की कार्यवाही के दौरान उस वक्त भारी हलचल मच गई जब स्पीकर ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को अपनी सीट पर बैठने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने निर्देश का पालन करने से इनकार कर दिया। इस बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने देश की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि अपनी जायज मांगें रख रहे छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हमारे देश के युवाओं को कानून व्यवस्था के लिए खतरा या समस्या की तरह क्यों देखा जा रहा है। अभिषेक बनर्जी ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में देश भर में सामने आए पेपर लीक मामलों में एक भी दोषी व्यक्ति को सजा नहीं मिल पाई है। उनके अनुसार लगातार हो रहे पेपर लीक इस बात का सबसे बड़ा और अकाट्य प्रमाण हैं कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुधारने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है।

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अखिलेश यादव का सरकार पर तंज

लोकसभा में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर सीधा और तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग अपनी व्यवस्था के भीतर चोरों को नहीं रोक पा रहे हैं, वे भला परीक्षाओं में पेपर लीक कैसे रोक सकते हैं। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में भी नीट यानी NEET की परीक्षाएं लीक होती रहेंगी क्योंकि वर्तमान सरकार इसे रोकने में पूरी तरह से असमर्थ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में 10वीं और 12वीं कक्षाओं के बोर्ड पेपर भी लीक हुए थे लेकिन सरकार के पास इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। समाजवादी पार्टी के मुखिया ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सोची-समझी रणनीति के तहत देश के प्राथमिक स्कूलों को निशाना बनाकर उन्हें बंद कर दिया है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS पर देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों को बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में नफरत की राजनीति फैलाई जा रही है और सरकार किसी भी मोर्चे पर आम जनता को न्याय दिलाने में पूरी तरह से असफल रही है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सदन के भीतर आगे कहा कि देश के युवाओं और नौजवानों ने सरकार के खिलाफ कड़े नारे लगाए क्योंकि सरकार के भीतर इस बात का घमंड था कि वह कभी झुकती नहीं है। लेकिन देश के युवाओं ने यह साबित कर दिया कि व्यवस्था को सही रास्ते पर लाने और उसे झुकाने वाले लोग भी मौजूद हैं। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि जब एक केंद्रीय मंत्री सदन से बाहर लौटे तो उनका जिस तरह से स्वागत किया गया, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि देश के युवाओं के मन में सरकार के खिलाफ कितना अधिक गुस्सा और आक्रोश भरा हुआ है।

गौरव गोगोई के तीखे सवाल और एनटीए पर सवालिया निशान

कांग्रेस पार्टी के सांसद गौरव गोगोई ने इस एंटी पेपर लीक बिल को महज एक राजनीतिक ड्रामा करार दिया। गौरव गोगोई ने कहा कि यह बात अब पूरी तरह से साफ हो चुकी है कि मौजूदा सरकार शिक्षा क्षेत्र के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और न ही उसकी नीयत इस सेक्टर में किसी प्रकार के वास्तविक सुधार लाने की है। गोगोई ने नीट यूजी 2024 की पूरी जांच प्रक्रिया पर भी बहुत बड़ा सवालिया निशान उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि नीट मामले में जितने भी चार्जशीटेड लोग थे, उनमें से ज्यादातर यानी 45 में से 44 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने इस स्थिति को सरकार की विफलता का एक स्मारक बताया। इसके अलावा उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर भी सरकार को घेरा। गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार ने खुद यह जानकारी दी है कि एनटीए से जुड़े 47 लोगों का ट्रांसफर किया गया है, जबकि तकनीकी रूप से एनटीए की स्वीकृत ताकत यानी सैंक्शन स्ट्रेंथ सिर्फ 34 लोगों की ही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि ये अतिरिक्त 47 लोग असल में कौन हैं। इसके साथ ही उन्होंने असम में हाल ही में आई भीषण बाढ़ से हुई 70 लोगों की मौतों का दर्दनाक मुद्दा भी उठाया और केंद्र सरकार से तुरंत एक विशेष आर्थिक पैकेज दिए जाने की पुरजोर मांग की।

बांसुरी स्वराज का पलटवार और कानून की खूबियां

विपक्ष के इन तमाम तीखे हमलों का जवाब देने के लिए भारतीय जनता पार्टी की सांसद बांसुरी स्वराज ने मोर्चा संभाला। बांसुरी स्वराज ने अपने संबोधन में कहा कि यह नया प्रस्तावित कानून देश से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को हमेशा के लिए समाप्त करने की सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को पूरी तरह दर्शाता है। उन्होंने इस बिल को एक ट्रांसफॉर्मेटिव यानी बदलाव लाने वाला कदम बताया। स्वराज ने सदन में स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत बनने वाली फास्ट ट्रैक अदालतें महज तीन महीने के भीतर अदालती ट्रायल को पूरा कर लेंगी, जिससे देश के मेहनती छात्रों को समय पर न्याय मिल सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के युवाओं के भविष्य को पूरी तरह से सुरक्षित करने के लिए ही इस कड़े बिल को लेकर आई है और यह विषय किसी भी तरह की दलगत राजनीति से कहीं ऊपर है। उन्होंने पेपर माफिया को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे आपराधिक तत्वों के खिलाफ देश के कानून के तहत सबसे सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जब इस अहम बिल पर सदन में चर्चा की शुरुआत हुई थी, तब कांग्रेस पार्टी के सांसद केसी वेणुगोपाल ने एक प्रक्रियागत आपत्ति उठाई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सदन में उस समय मौजूद न होने को लेकर सवाल खड़े किए थे। हालांकि विपक्ष की लगातार मांग थी कि इस अति महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए, जिस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सहमति जताई। किरेन रिजिजू ने सदन में स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष और अधिक समय की मांग कर रहा है तो सरकार चर्चा की अवधि को बढ़ाकर 10 घंटे तक करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि यह देश के भविष्य से जुड़ा हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और पूरा देश यही चाहता है कि संसद से एक बेहतर और मजबूत कानून बनकर निकले।

एंटी पेपर लीक बिल के कड़े प्रावधान

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इस एंटी पेपर लीक बिल को सोमवार को राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा सदन में पेश किया गया था। इस बिल का मुख्य उद्देश्य देश की पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना है। इस नए कानून के तहत अपराधियों के लिए बेहद कड़े दंड के प्रावधान तय किए गए हैं। इसके मुताबिक यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस तरह के कृत्यों में दोषी पाई जाती है, तो उसे अधिकतम 10 साल तक की लंबी जेल की सजा हो सकती है। इसके साथ ही दोषी पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाए जाने का भी प्रावधान रखा गया है। इतना ही नहीं, दोषियों की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को भी सरकार द्वारा जब्त कर लिया जाएगा। मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा जो तीन महीने के अंदर अपना अंतिम निर्णय सुनाएंगी। इन तमाम सख्त प्रावधानों के जरिए देश में सक्रिय पेपर माफिया की कमर पूरी तरह से तोड़ दी जाएगी।

सवाल-जवाब

लोकसभा में कौन सा नया बिल पेश किया गया है?
लोकसभा में मानसून सत्र के दौरान पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026 यानी एंटी पेपर लीक बिल पेश किया गया है।
एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए कितना समय तय किया गया है?
विपक्ष की मांग पर इस बिल पर चर्चा के समय को बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया है।
इस नए बिल के तहत दोषी पाए जाने पर क्या सजा का प्रावधान है?
दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और संपत्तियों को सीज करने का प्रावधान है।
सदन में एंटी पेपर लीक बिल किसने पेश किया था?
इस बिल को राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा सदन में पेश किया गया था।
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