संसद के मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। एक तरफ जहां सरकार देश के प्रशासनिक और परीक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए नए संशोधन विधेयक सदन के पटल पर रख रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। संसद भवन परिसर में विभिन्न मुद्दों को लेकर माहौल गरमाया हुआ है, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक और विभिन्न नए कानूनों पर चर्चा के चलते संसदीय कार्यवाही पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश
गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026' पेश करने जा रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और कड़ा बनाना है। इस नए संशोधन बिल में देरी से होने वाले पंजीकरण के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण और सख्त प्रशासनिक प्रावधान जोड़े गए हैं।
नए नियमों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में 1 साल से लेकर 2 साल तक का विलंब होता है, तो अब इसके लिए साधारण प्रक्रिया काम नहीं करेगी। ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, अगर यह देरी 2 साल से अधिक समय की होती है, तो मामला सीधे अदालत के समक्ष जाएगा और न्यायिक मंजूरी मिलने के बाद ही पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से जाली दस्तावेजों के निर्माण और फर्जी पंजीकरण की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून: राज्यसभा से संशोधन विधेयक पारित
संसद ने सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लाए गए 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल' को अपनी मंजूरी दे दी है। बुधवार को लोकसभा में करीब सात घंटे तक चली विस्तृत बहस के बाद इस बिल को पारित किया गया था, जिसके बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी इसे अपनी सर्वसम्मति और विस्तृत चर्चा के बाद पास कर दिया। उच्च सदन में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को पेश किया था।
इस नए संशोधन कानून के तहत पेपर लीक में शामिल भू-माफिया और संगठित गिरोहों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई के इंतजाम किए गए हैं। कानून में दोषियों पर आर्थिक दंड की राशि को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है। इसके अलावा, मामले की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की स्थापना और फास्ट-ट्रैक अदालती कार्यवाही का प्रावधान शामिल किया गया है, ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके। विधेयक में लंबी जेल की सजा का भी कड़ा प्रावधान रखा गया है।
राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन को अवगत कराया कि सरकार वर्ष 2024 में लागू किए गए मूल कानून के अनुभवों से सीख लेते हुए यह सुधार ला रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मूल कानून के प्रभाव में आने के बाद से अब तक 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के कारण युवाओं द्वारा आत्महत्या करने जैसी दुखद घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आई है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब इस विधेयक को अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद यह पूर्ण कानून का रूप ले लेगा।
राहुल गांधी के गंभीर आरोप और सदन में गतिरोध का मुद्दा
संसदीय सत्र के बीच राजनीतिक माहौल उस समय और गरमा गया जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर युवाओं और युवा पीढ़ी की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए सरकार की नीतियों और रवैये पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को डराने-धमकाने और उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने का प्रयास कर रही है।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा, "पीएम मोदी और अमित शाह, आप जेन जी को धमकाकर चुप नहीं करा सकते।" उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि पहले युवाओं पर शारीरिक बल प्रयोग किया गया और अब उन पर एफआईआर दर्ज कर सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराए जा रहे हैं। कांग्रेस सांसद ने सरकार को सचेत करते हुए कहा कि वह देश के भविष्य के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर सतर्क रहे।
इससे पहले बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी राहुल गांधी ने संसद की कार्यवाही को लेकर अपनी नाराजगी जताई थी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें लोकसभा के अंदर अपना पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी गई। राहुल गांधी के अनुसार, उनसे कहा गया था कि अगर वे गृहमंत्री अमित शाह से जुड़े अपने पिछले बयान पर माफी मांगते हैं, तभी उन्हें बोलने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार लोकसभा अध्यक्ष से सदन में व्यवस्था बहाल करने और बोलने का समय देने का अनुरोध किया, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य मंत्रियों को लगातार बोलने दिया गया जबकि उन्हें रोक दिया गया।
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक और राष्ट्रपति से मुलाकात
संसद सत्र की गतिविधियों के बीच आज दोपहर में केंद्रीय कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली यह कैबिनेट बैठक संसद भवन परिसर के भीतर ही बुलाई गई है, जिसमें देश की प्रशासनिक और आर्थिक प्राथमिकताओं से जुड़े कई अहम नीतिगत फैसलों पर मुहर लग सकती है।
कैबिनेट बैठक से पहले प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल देखी जा रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते कल ही राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से औपचारिक मुलाकात की थी। इस मुलाकात और आज होने वाली कैबिनेट बैठक को वर्तमान संसदीय सत्र और आगामी सरकारी योजनाओं के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।



















