पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एक तरफ गंभीर तनाव और विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, तो दूसरी तरफ उसी अशांत माहौल के बीच चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। मीरपुर डिवीजन के अंतर्गत आज सुबह ठीक 7 बजे विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान की शुरुआत हुई। हालांकि, पूरे इलाके में हो रहे कड़े विरोध और पूर्ण बहिष्कार के आह्वान के चलते कई मतदान केंद्र पूरी तरह वीरान नजर आ रहे हैं। आम नागरिकों ने मतदान प्रक्रिया से पूरी तरह दूरी बना ली है और लोग अपने घरों से बाहर तक नहीं आए हैं। पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की उपस्थिति न के बराबर दर्ज की जा रही है, जिससे साफ जाहिर होता है कि स्थानीय जनता चुनाव प्रक्रिया को सिरे से खारिज कर रही है और सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार जारी है।
मीरपुर, भीम्बर और कोटली में डाले जा रहे हैं वोट
मौजूदा चुनावी चरण के तहत मीरपुर, भीम्बर और कोटली जिलों में कुल 13 विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जा रहा है। इस पूरे चुनावी चक्र के लिए क्षेत्र में कुल 14 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता मौजूद हैं, जिनके लिए प्रशासन ने 2500 से ज्यादा मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। मुख्य राजनीतिक दलों की बात करें तो पाकिस्तान की प्रमुख पार्टियां जैसे पीएमएल-एन, पीपीपी और आईपीपी इस चुनावी दंगल में आमने-सामने हैं। अकेले कोटली जिले की बात की जाए तो वहां की 6 विधानसभा सीटों पर कुल 135 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आवामी एक्शन कमेटी सहित कई अन्य प्रमुख संगठनों ने इस पूरी चुनाव प्रक्रिया का पूरी तरह बहिष्कार करने का खुला आह्वान किया है। इन संगठनों का साफ तौर पर यह आरोप है कि यह पूरा चुनाव कार्यक्रम पूरी तरह फर्जी है और इसके नतीजे पहले से ही तय किए जा चुके हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सार्वजनिक अवकाश
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तानी सेना पर लगातार चुनावी प्रक्रिया में दखलंदाजी करने और चुनावों की इंजीनियरिंग करने के गंभीर आरोप मढ़े जा रहे हैं। विपक्षी समूहों का तर्क है कि यहां किसी भी प्रकार के वास्तविक लोकतंत्र का अस्तित्व नहीं बचा है और सब कुछ केवल एक दिखावा मात्र है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चप्पे-चप्पे पर रेंजर्स को तैनात किया गया है और भारी सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। वर्तमान विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर सभी प्रकार की रैलियों और सार्वजनिक सभाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। विशेष रूप से संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात हैं। मीरपुर डिवीजन में आज के दिन एक सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया था ताकि नागरिक आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें, लेकिन जन-आक्रोश और बहिष्कार के कारण इस छुट्टी का कोई सकारात्मक असर मतदान पर दिखाई नहीं दे रहा है।
पीओके की राजनीति और जनता का मूड
विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। स्थानीय निवासी यहां की शासन व्यवस्था, प्रशासनिक प्रतिनिधित्व और पाकिस्तानी सेना की संदेहास्पद भूमिका को लेकर लंबे समय से बेहद खफा हैं। मतदान के दौरान दर्ज किया गया बेहद कम प्रतिशत और जगह-जगह हो रहे जोरदार प्रदर्शन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पीओके की आम जनता इस पूरी चुनावी व्यवस्था से తీవ్ర असंतुष्ट है। पहले चरण के मतदान समाप्त होने और उसके परिणाम सामने आने के बाद ही यह तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी कि इस क्षेत्र की जनता का असली रुझान किस दिशा में है। फिलहाल तनाव, हंगामे और व्यापक बहिष्कार के साये में ही यह चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।



















