पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर क्षेत्र में इन दिनों शाहबाज शरीफ प्रशासन के खिलाफ तीव्र जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है, जिसे दबाने के लिए सरकारी मशीनरी हरसंभव कदम उठा रही है। इसी माहौल के बीच वहां आयोजित होने जा रही तथाकथित चुनाव प्रक्रिया को लेकर नई दिल्ली ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से देश का अभिन्न अंग रहे हैं और रहेंगे।
भारत ने क्यों जताया कड़ा ऐतराज
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस क्षेत्र में हो रहे तथाकथित चुनाव केवल एक दिखावटी कसरत भर हैं। पाकिस्तान इन हथकंडों के जरिए अपनी जबरन और गैर-कानूनी हुकूमत पर पर्दा डालने का असफल प्रयास कर रहा है। सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब स्थानीय जनता बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरी हुई है और सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
दशकों के शोषण का नतीजा है जनता का गुस्सा
दिल्ली का मानना है कि वहां की जनता का यह भयंकर रोष पिछले कई दशकों से चले आ रहे आर्थिक शोषण, प्रशासनिक ज्यादतियों और मौलिक अधिकारों के हनन का स्वाभाविक परिणाम है। भारत सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस तरह के चुनावी ड्रामे रचकर पाकिस्तान अपनी जमीन पर हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों और अवैध कब्जे की सच्चाई को दुनिया की नजरों से छिपा नहीं सकता है।



















