प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए भाषण में "दिमागी नक्सलियों" का मुद्दा उठाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। संबोधन के अगले ही दिन केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस टिप्पणी पर स्थिति स्पष्ट की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए एक विस्तृत बयान में मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह इशारा विपक्षी नेताओं की तरफ बिल्कुल नहीं था। अपनी बात को समझाने के लिए उन्होंने ऐसे तत्वों की तीन स्पष्ट श्रेणियां रेखांकित कीं और साथ ही जेल में बंद छात्र नेता शरजील इमाम के एक पुराने भाषण की वीडियो क्लिप भी साझा की।
किरेन रिजिजू द्वारा बताई गईं तीन मुख्य श्रेणियां
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि "दिमागी नक्सली" शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के लिए नहीं, बल्कि उन विशिष्ट समूहों के लिए किया गया है जो देश की अखंडता और संविधान के लिए खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने ऐसे व्यक्तियों और संगठनों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया
- माओवादियों के समर्थक: वे लोग जो सशस्त्र माओवादी हिंसा का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान में विश्वास नहीं रखते।
- अलगाववादियों के सहयोगी: वे तत्व जो अलगाववादी ताकतों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 की बहाली का समर्थन करते हैं।
- पूर्वोत्तर को अलग करने की साजिश रचने वाले: वे व्यक्ति जो पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ने वाले संकरे मार्ग, यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर ("चिकन नेक") को काटने की मंशा रखते हैं।
शरजील इमाम के भाषण का संदर्भ और विवाद
अपनी पोस्ट को तार्किक आधार देने के लिए किरेन रिजिजू ने छात्र नेता शरजील इमाम का एक भाषण वीडियो के रूप में संलग्न किया। यह भाषण नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ दिल्ली और अलीगढ़ में आयोजित प्रदर्शनों के दौरान दिया गया था। इस भाषण में इमाम ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्यधारा के भारत से अलग करने की बात कही थी।
वायरल वीडियो में इमाम को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यदि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों और रेलवे ट्रैक को अवरुद्ध कर दें, तो पूर्वोत्तर भारत को देश के शेष हिस्से से अस्थायी रूप से काटा जा सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के जरिए भारतीय सेना की आवाजाही और आवश्यक रसद की आपूर्ति को रोकना प्रदर्शनकारियों की जिम्मेदारी है, ताकि सरकार को उनकी मांगें सुनने पर मजबूर किया जा सके।
कानूनी मामले और 6 साल से जेल में बंद रहने का ब्योरा
शरजील इमाम के इस विवादित भाषण के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ा संज्ञान लिया था। उन्हें 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था और वे पिछले 6 साल से जेल में बंद हैं। इमाम पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (देशद्रोह) और धारा 153A (विभिन्न समुदायों के बीच धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाना) के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त उन पर आतंकवाद रोधी कानून UAPA की कड़ी धाराएं भी लगाई गई हैं।
लाल किले से पीएम मोदी का संबोधन और विपक्ष का पलटवार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान देश को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत जंगलों से "हथियारी नक्सलवाद" को काफी हद तक खत्म करने में कामयाब रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी थी कि इसके वैचारिक समर्थक अभी भी समाज में हिंसा और अस्थिरता फैलाने के मौके तलाश रहे हैं। प्रधानमंत्री का आरोप था कि ऐसे तत्वों ने देश की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में गहराई तक पैठ बना ली है और वे सरकारी नीतियों को प्रभावित कर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने नागरिकों का आह्वान किया था कि ऐसे लोगों की पहचान की जाए और उन्हें समाज से अलग-थलग किया जाए।
दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री के इस बयान का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार के खिलाफ सवाल उठाने वालों, नीतियों से असहमति व्यक्त करने वालों और नागरिक अधिकारों की बात करने वाले आलोचकों को निशाना बनाने तथा उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से "दिमागी नक्सल" जैसे शब्दों का सहारा लिया जा रहा है।



















