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प्रशांत किशोर की चुनौती के बीच बांकीपुर में बीजेपी उम्मीदवार पर मंथन तेज़राजनीति
6 जुल॰ 2026, 9:10 pm (22 दिन पहले)· 2

प्रशांत किशोर की चुनौती के बीच बांकीपुर में बीजेपी उम्मीदवार पर मंथन तेज़

जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर के बांकीपुर से चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद बीजेपी उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन में जुटी है, नितिन नवीन के परिवार से लेकर नीतू चंद्रा तक कई नाम चर्चा में हैं.

बिहार की राजधानी पटना की सबसे चर्चित सीटों में शुमार बांकीपुर में होने वाला उपचुनाव अचानक सुर्खियों में आ गया है. वजह है जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर का यह ऐलान कि वे खुद इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे. पीके की इस सीधी एंट्री ने भारतीय जनता पार्टी को असहज कर दिया है, क्योंकि बांकीपुर को पार्टी अपना सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित किला मानती रही है. अब सवाल यह है कि पीके के सामने बीजेपी किसे उतारेगी, और क्या यह सीट पहली बार पार्टी के हाथ से फिसल सकती है.

दशकों से बीजेपी का अभेद्य किला रहा है बांकीपुर

बीजेपी के भीतर बांकीपुर सीट को 'सनातनी और सवर्ण दुर्ग' कहा जाता है. इस किले की नींव नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने रखी थी और उनके निधन के बाद यह विरासत उनके बेटे नितिन नवीन ने संभाली. नितिन नवीन फिलहाल बीजेपी बिहार प्रदेश अध्यक्ष हैं. वे राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद विधानसभा सीट से इस्तीफा दे चुके हैं, जिसके चलते बांकीपुर सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव होना है. पार्टी के लिए यह सीट सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र भर नहीं बल्कि प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है, इसलिए इसे बरकरार रखना बीजेपी आलाकमान के लिए नाक की लड़ाई बन गया है.

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टिकट की रेस में कौन कौन, परिवार से लेकर बॉलीवुड तक

प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने के ऐलान के बाद से सोशल मीडिया और पटना के राजनीतिक हलकों में बीजेपी के संभावित उम्मीदवार को लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. पार्टी के एक तबके की दलील है कि नवीन किशोर सिन्हा के परिवार का बांकीपुर की जनता से पुराना और भावनात्मक जुड़ाव रहा है, इसलिए सहानुभूति वोटों को भुनाने और किले को बचाए रखने के लिए नितिन नवीन की पत्नी या उनकी माताजी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. इसके उलट एक और नाम जो जोरशोर से चर्चा में है, वह है बॉलीवुड अभिनेत्री नीतू चंद्रा का. माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर की युवाओं में गहरी पैठ और उनकी चमकदार छवि का मुकाबला करने के लिए बीजेपी किसी युवा और महिला कायस्थ चेहरे को उतारकर चौंका सकती है. इनके अलावा पटना के कुछ नामी डॉक्टरों, वकीलों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े युवा कार्यकर्ताओं के नाम भी बीजेपी की कोर कमेटी की बंद कमरे की बैठकों में विचाराधीन बताए जा रहे हैं.

जाति का समीकरण, कायस्थ और वैश्य वोटर क्यों हैं निर्णायक

बांकीपुर मूल रूप से एक शहरी और पढ़े लिखे मतदाताओं वाली सीट मानी जाती है. यहां सवर्ण और वैश्य यानी बनिया समुदाय की भागीदारी सबसे ज्यादा असर डालने वाली है, और यही तबका परंपरागत रूप से बीजेपी का सबसे पक्का समर्थक रहा है. इस सीट पर कायस्थ मतदाता करीब 20 से 25 प्रतिशत तक हैं और दशकों से इन्हीं के हाथ में यहां की 'किंगमेकर' भूमिका रही है. पहले नवीन किशोर सिन्हा और फिर उनके निधन के बाद नितिन नवीन के साथ कायस्थ समाज एकजुट होकर खड़ा रहा है. कायस्थ के अलावा वैश्य बनिया व्यापारी वर्ग भी हमेशा बीजेपी की आर्थिक और वैचारिक ताकत रहा है. करीब 15 प्रतिशत ब्राह्मण और भूमिहार मतदाता भी परंपरागत रूप से बीजेपी के खाते में जाते रहे हैं. यह कोर सवर्ण वोट बैंक राष्ट्रवाद और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा रहता है. वहीं करीब 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक और दलित मतदाता आरजेडी कांग्रेस गठबंधन का मुख्य आधार रहे हैं. यही वह गणित है जिसके सहारे बीजेपी दशकों से इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखने में कामयाब रही है.

ब्राह्मण कार्ड खेलना बीजेपी के लिए हो सकता है उल्टा दांव

चूंकि प्रशांत किशोर खुद ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, इसलिए यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि वे बांकीपुर के सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी कोशिश करेंगे. यही वजह है कि पार्टी के कुछ रणनीतिकार सुझाव दे रहे हैं कि बीजेपी को भी किसी कद्दावर ब्राह्मण चेहरे को उतारकर पीके को उन्हीं के समुदाय में जवाब देना चाहिए. लेकिन यह रणनीति बीजेपी के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है. अगर पार्टी ब्राह्मण कार्ड खेलती है, तो इससे उस कायस्थ समुदाय में नाराजगी फैल सकती है, जो दशकों से इस सीट पर अपना दावा जताता आया है, और यह नाराजगी बीजेपी के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकती है. दरअसल कायस्थ और बनिया मतदाता बांकीपुर में इतने मजबूत माने जाते हैं कि इनकी नाराजगी बीजेपी के अब तक अभेद्य रहे किले को भी हिला सकती है.

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में क्या है पीके की रणनीति?

राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर ने बांकीपुर को सोच समझकर ही चुना है. उनका तर्क है कि पीके बीजेपी के कोर शहरी वोट बैंक को सीधी चुनौती देकर अपनी राजनीतिक ताकत को परखना और साबित करना चाहते हैं, ताकि आने वाले वक्त में उनकी राजनीति की दिशा साफ हो सके. प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार को अगले 10 साल देने की बात करते रहे हैं, लेकिन अब वे यह भी परखना चाहते हैं कि सवर्ण मतदाताओं का मिजाज उनके प्रति कैसा है. दूसरी ओर विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बीजेपी इस मुकाबले में कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिखती. उनके मुताबिक बीजेपी के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प यही होगा कि किसी ऐसे चेहरे को टिकट दिया जाए जो कायस्थ और वैश्य समीकरण में फिट बैठता हो, या फिर नितिन नवीन के परिवार की राजनीतिक विरासत को ही आगे बढ़ाया जाए.

आरजेडी की एंट्री के बाद अब बीजेपी के फैसले का इंतजार

बांकीपुर उपचुनाव की सरगर्मी सोमवार को उस वक्त और बढ़ गई जब जन सुराज के बाद आरजेडी ने भी अपनी उम्मीदवार के तौर पर रेखा गुप्ता के नाम का ऐलान कर दिया. अब मैदान में एक तरफ ब्राह्मण उम्मीदवार प्रशांत किशोर हैं, तो दूसरी तरफ बनिया उम्मीदवार रेखा गुप्ता, और इसी के साथ सबकी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या बीजेपी इस बार किसी कायस्थ चेहरे को टिकट देगी. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति यानी सीईसी जल्द ही अपने उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगाने वाली है. अब देखना यह होगा कि पीके के इस सियासी चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए बीजेपी परिवारवाद यानी नितिन नवीन के परिवार का रास्ता चुनती है, या फिर किसी नए और चौंकाने वाले युवा चेहरे को उतारकर बांकीपुर की इस दिलचस्प सस्पेंस कहानी का पटाक्षेप करती है.

सवाल-जवाब

बांकीपुर सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
यह सीट बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई है, इसलिए यहां उपचुनाव कराया जा रहा है.
बांकीपुर से जन सुराज की ओर से कौन चुनाव लड़ रहा है?
जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर खुद इस सीट से चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर चुके हैं.
आरजेडी ने बांकीपुर से किसे उम्मीदवार बनाया है?
आरजेडी ने सोमवार को रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार घोषित किया है.
बीजेपी की तरफ से उम्मीदवार की रेस में कौन कौन से नाम चर्चा में हैं?
नितिन नवीन की पत्नी या माताजी, अभिनेत्री नीतू चंद्रा, और पटना के कुछ डॉक्टर, वकील व संघ से जुड़े युवा चेहरे चर्चा में हैं.
बांकीपुर में कायस्थ मतदाताओं की कितनी हिस्सेदारी है?
इस सीट पर कायस्थ मतदाता करीब 20 से 25 प्रतिशत हैं और दशकों से यहां किंगमेकर की भूमिका में रहे हैं.
बीजेपी के लिए ब्राह्मण कार्ड खेलना जोखिम भरा क्यों माना जा रहा है?
क्योंकि इससे परंपरागत रूप से इस सीट पर दावा रखने वाला कायस्थ समुदाय नाराज हो सकता है, जिसका सीधा नुकसान बीजेपी को हो सकता है.
बीजेपी का उम्मीदवार कब तक तय होगा?
पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) जल्द ही उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला लेने वाली है.
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