पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुक्तसर साहिब में आयोजित 'पंजाब बचाओ' रैली के जरिए अपने आधिकारिक चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी है। रैली के दौरान एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अकाली दल प्रमुख ने राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए। अपनी इस जनसभा के दौरान उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यशैली पर सवाल उठाए, बल्कि जेल में निरुद्ध सांसद अमृतपाल सिंह और उनके संगठन की गतिविधियों पर भी कड़े सवाल खड़े किए।
भगवंत मान की कार्यशैली और धार्मिक प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल
मुक्तसर साहिब की रैली में सुखबीर सिंह बादल के भाषण का सबसे बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री भगवंत मान की आलोचना पर केंद्रित रहा। अकाली दल के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य के मुख्यमंत्री सिख धर्म और उसकी मान्यताओं का लगातार अनादर कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान शराब का सेवन करने के बाद पवित्र गुरुद्वारों में प्रवेश करते हैं और सिख महापुरुषों का अपमान करते हैं। इसके बावजूद हैरान करने वाली बात यह है कि विपक्षी राजनीतिक दल राज्य सरकार की नाकामियों को उजागर करने के बजाय अकाली दल को निशाना बनाने में अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं।
बादल ने मुख्यमंत्री के पांच साल के कार्यकाल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि भगवंत मान ने अपने पूरे शासनकाल को सिर्फ चुटकुले सुनाने और मंच संचालन तक ही सीमित रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के बुनियादी विकास, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पंजाब के विकास के मोर्चे पर मान सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है और राज्य की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
अमृतपाल सिंह के राजनीतिक उभार और पारिवारिक संबंधों पर घेराबंदी
मुख्यमंत्री के अलावा सुखबीर सिंह बादल के निशाने पर खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद अमृतपाल सिंह भी रहे। गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह ने वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए लड़ा और उसमें जीत हासिल की, और वह वर्तमान में भी जेल में ही निरुद्ध हैं। उनके राजनीतिक सफर पर सवाल उठाते हुए अकाली दल के अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2022 में अमृतपाल सिंह अचानक दुबई से पंजाब आए थे और महज दो वर्षों के भीतर ही सांसद बनने में कामयाब हो गए।
बादल ने इस तीव्र राजनीतिक उभार के पीछे किसी बड़ी अदृश्य ताकत का हाथ होने की आशंका जताई। उन्होंने दावा किया कि इतने कम समय में एक अज्ञात व्यक्ति का सांसद बन जाना यह स्पष्ट संकेत देता है कि उन्हें आगे बढ़ाने के पीछे पर्दे के पीछे से सहायता दी जा रही थी। इसके साथ ही सुखबीर सिंह बादल ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि अमृतपाल सिंह के परिवार के संबंध पुराने समय से ही कांग्रेस पार्टी के साथ रहे हैं।
'वारिस पंजाब दे' संगठन और बंदी सिखों के मुद्दे पर तीखा प्रहार
संगठन 'वारिस पंजाब दे' की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए अकाली दल प्रमुख ने कहा कि अकाली दल का एक गौरवशाली इतिहास रहा है और उसके नेताओं ने अपनी रिहाई के लिए कभी किसी के सामने दया की भीख नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि वास्तविक बहादुर वही होते हैं जो अपने सिद्धांतों और प्राथमिकताओं के लिए लड़ते हैं। बादल ने तंज कसते हुए कहा कि यह संगठन जनहित के मुद्दों से दूर होकर केवल अपने नेता की रिहाई तक सीमित रह गया है।
अमृतपाल सिंह को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की कोशिशों पर बादल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह एक मजाक जैसा लगता है, क्योंकि किसी को भी उनके पिछले रिकॉर्ड या भविष्य के विजन की कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन लंबे समय से जेलों में बंद 'बंदी सिखों' की रिहाई के वास्तविक मुद्दे की पूरी तरह उपेक्षा कर रहा है। संगठन का पूरा ध्यान केवल अपने व्यक्तिगत नेता को जेल से बाहर निकालने पर ही केंद्रित है।
पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने अपने जीवन के 16 वर्ष जेल की सलाखों के पीछे बिताए थे, लेकिन कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इसके विपरीत 'वारिस' संगठन महज दो साल के भीतर ही अपनी मांगों को लेकर विलाप कर रहा है। उन्होंने बंदी सिखों के वास्तविक आंदोलन से भटकने पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए इसे एक शर्मनाक स्थिति करार दिया।
हालिया हमला और राज्य में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां
इस राजनीतिक घटनाक्रम के साथ ही यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हाल ही में महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित एक परिसर में सुखबीर सिंह बादल पर एक जानलेवा हमला हुआ था। उस घटना के दौरान एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला कर दिया था, जिसके बाद उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि हमलावर पंजाब में लगातार बढ़ रही नशे की समस्या को लेकर नाराज था। इस पृष्ठभूमि के बावजूद सुखबीर सिंह बादल ने अपने सार्वजनिक अभियानों को जारी रखते हुए मुक्तसर साहिब रैली से राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।



















