लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को अपने आवास पर INDIA गठबंधन के सभी सांसदों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है। इस बैठक में मुख्य तौर पर हाई टी का आयोजन किया गया है, जिसके जरिए विपक्षी दलों के बीच आपसी समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस अनौपचारिक मुलाकात के दौरान संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की ठोस रूपरेखा तैयार की जाएगी।
वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त पर होगी चर्चा
इस अहम बैठक के एजेंडे में प्रमुख रूप से वोट चोरी के गंभीर आरोपों के खिलाफ साझा विरोध-प्रदर्शन की योजना शामिल है। इसके अलावा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी विपक्षी नेता अपनी आगामी कार्रवाई की रूपरेखा तय करेंगे। सूत्रों के अनुसार इस अनौपचारिक सभा के बाद कोई साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस या सड़कों पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान भी किया जा सकता है, हालांकि इस पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था विपक्षी मार्च
राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित सरकारी आवास पर होने वाली यह बैठक ठीक उस घटना के एक दिन बाद हो रही है, जब विपक्षी दलों का आक्रोश राजधानी की सड़कों पर साफ दिखाई दिया था। चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक विशाल मार्च निकाला था, जो भारी सुरक्षा प्रबंधों और बैरिकेड्स को पार करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत तक जा पहुंचा था। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने अपनी राजनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन किया था।
दिग्गज नेताओं ने की थी मार्च में शिरकत
कनॉट प्लेस के पास एकत्र हुई भारी भीड़ और झंडों-पोस्टरों के साथ निकले इस मार्च में विपक्ष के कई शीर्ष नेता कंधे से कंधा मिलाकर चले थे। इस प्रदर्शन में मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, डी. राजा, एम.ए. बेबी, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले जैसे प्रमुख नेता शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने भगवान दास रोड पर सुरक्षा बलों द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को भी पार करने का प्रयास किया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था।
सर्वोच्च अदालत में दाखिल हुई है याचिका
सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन के तुरंत बाद INDIA गठबंधन के प्रमुख नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां एक औपचारिक याचिका दायर की। इस कानूनी कदम के तहत भारत निर्वाचन आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मामले पर विपक्ष के नेताओं से मिलने का अनुरोध यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि मामला अभी अदालत के विचाराधीन है।


















