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राजस्थान निकाय चुनाव: जोधपुर से अजमेर तक मेयर की कुर्सी के लिए दिलचस्प जोड़-तोड़राजनीति
16 सित॰ 2026, 10:51 am (41 दिन पहले)· 0

राजस्थान निकाय चुनाव: जोधपुर से अजमेर तक मेयर की कुर्सी के लिए दिलचस्प जोड़-तोड़

राजस्थान के 10 नगर निगमों में वार्ड चुनाव संपन्न होने के बाद अब मेयर की कुर्सी के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज हो गई है। जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली में मुकाबला सबसे रोमांचक बना हुआ है जहां विभिन्न दलों और निर्दलियों के बीच कड़ा संघर्ष है।

राजस्थान के शहरी निकायों में वार्डों की तस्वीर साफ होने के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा फोकस मेयर की कुर्सी पर टिक गया है। राज्य के कुल 10 नगर निगमों में से चार ऐसे शहर हैं जहां चुनावी गणित बेहद पेचीदा और रोमांचक हो गया है। इन चार प्रमुख शहरों में जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली शामिल हैं। इन सभी जगहों पर राजनीतिक समीकरण एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। कहीं दो दल बराबरी पर खड़े हैं तो कहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने दोनों बड़ी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा कुछ जगहों पर एक दल सबसे बड़े रूप में उभरा है लेकिन बहुमत का जादुई आंकड़ा दूर है। ऐसे में पार्षदों के समर्थन को साधने की यह जंग काफी दिलचस्प हो चली है।

जोधपुर में बराबरी का कड़ा मुकाबला

जोधपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। दोनों ही प्रमुख दलों ने यहां 44-44 वार्डों पर जीत दर्ज की है। संख्या समान होने के कारण जोधपुर में मेयर पद की दौड़ बेहद संवेदनशील हो गई है। अब फैसला इस बात पर टिका है कि बाकी बचे पार्षद किस राजनीतिक खेमे का रुख करते हैं। मामूली अंतर या एक-एक पार्षद का समर्थन यहां पूरा बोर्ड बनाने के समीकरण को बदल सकता है। यही वजह है कि जोधपुर में दोनों ही दल अपने पाले में समर्थन जुटाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं और यहां की रणनीति पर हर किसी की नजर बनी हुई है।

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भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवारों की सबसे बड़ी ताकत

भरतपुर नगर निगम का चुनावी परिदृश्य पूरी तरह से अलग कहानी कहता है। यहां निर्दलीय पार्षदों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 36 वार्डों पर कब्जा जमाया है और वे सबसे बड़ा समूह बनकर उभरे हैं। इसके मुकाबले भारतीय जनता पार्टी के खाते में 20 सीटें आई हैं जबकि कांग्रेस पार्टी केवल 7 वार्डों में ही जीत दर्ज कर पाई है। क्षेत्रीय दलों की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को भी एक-एक सीट मिली है। भरतपुर में दोनों प्रमुख दलों से ज्यादा संख्या निर्दलियों के पास होने के कारण मेयर की कुर्सी की चाबी उन्हीं के हाथों में नजर आ रही है। वार्डों के नतीजे आने के बाद अब यहां समर्थन हासिल करने का नया दौर शुरू हो चुका है।

अजमेर और पाली में कांग्रेस की स्थिति

अजमेर नगर निगम में कांग्रेस पार्टी 37 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 32 वार्डों पर जीत हासिल की है। इसके अतिरिक्त 11 सीटों पर निर्दलीय पार्षद विजयी होकर आए हैं। हालांकि कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा सीटें जरूर हैं लेकिन मेयर पद की पक्की जीत केवल सबसे बड़े दल होने भर से तय नहीं होती। बोर्ड गठन के लिए जरूरी समर्थन जुटाना ही असली चुनौती है। ठीक इसी प्रकार पाली नगर निगम में भी कांग्रेस ने 29 वार्ड अपने नाम किए हैं और वह सबसे आगे है। पाली में भारतीय जनता पार्टी ने 21 सीटें जीती हैं जबकि 15 निर्दलीय पार्षद भी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। पाली में भी निर्दलियों की मजबूत संख्या के कारण मेयर का रास्ता बिना उनके समर्थन के साफ नहीं हो सकता है।

अन्य छह नगर निगमों का हाल

जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली के विपरीत राज्य के बाकी छह नगर निगमों में स्थिति काफी हद तक स्पष्ट नजर आ रही है। राजधानी जयपुर में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। कोटा में भारतीय जनता पार्टी ने 55 वार्ड जीतकर अपने दम पर पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके अलावा उदयपुर में 53 और भीलवाड़ा में 45 सीटें हासिल कर भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। अलवर में भी भारतीय जनता पार्टी 28 सीटों के साथ सबसे आगे रही है। दूसरी ओर बीकानेर में कांग्रेस ने 42 वार्डों पर जीत दर्ज करते हुए स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है। उदयपुर, कोटा, बीकानेर और भीलवाड़ा में बहुमत का साफ आंकड़ा होने के कारण वहां का गणित जोधपुर या भरतपुर जैसा पेचीदा नहीं है, लेकिन शुरुआती चार निगमों का चक्रव्यूह आने वाले दिनों में और दिलचस्प होने वाला है।

सवाल-जवाब

राजस्थान के कितने नगर निगमों में मेयर चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा रोमांच है?
राज्य के 10 नगर निगमों में से जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली में मेयर चुनाव का गणित सबसे ज्यादा दिलचस्प है।
जोधपुर नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस की क्या स्थिति है?
जोधपुर में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने 44-44 वार्ड जीतकर बराबरी हासिल की है।
भरतपुर में सबसे ज्यादा वार्ड किस दल या समूह ने जीते हैं?
भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों ने 36 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी संख्या हासिल की है।
अजमेर और पाली में सबसे बड़ा दल कौन सा बनकर उभरा है?
अजमेर और पाली दोनों ही नगर निगमों में कांग्रेस पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है।
किन निगमों में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है?
कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·40 दिन पहले

राजस्थान के इन निकाय चुनावों के नतीजे दिखाते हैं कि शहरी राजनीति में राष्ट्रीय दलों का एकछत्र दबदबा कम हो रहा है। जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच बराबरी, जबकि भरतपुर, अजमेर और पाली में निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी यह संकेत देती है कि स्थानीय स्तर पर मतदाता दलीय निष्ठा से इतर उम्मीदवारों को तरजीह दे रहे हैं। ऐसे में मेयर बनाने के लिए जारी जोड़-तोड़ केवल तात्कालिक सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह आने वाले समय में नगर निगमों के संचालन और स्थानीय गठबंधन की स्थिरता को भी गहराई से प्रभावित करेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·40 दिन पहले

राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के ये नतीजे स्थानीय स्तर पर मतदाताओं के बदलते मिजाज और राजनीतिक विखंडन को दर्शाते हैं। जोधपुर में पूर्ण बराबरी और भरतपुर में निर्दलियों का दबदबा यह साबित करता है कि जनता अब केवल पारंपरिक दलीय ढर्रे पर वोट नहीं दे रही है। हालांकि, स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में होने वाली राजनीतिक जोड़-तोड़ और निर्दलियों पर अत्यधिक निर्भरता से नगर निगमों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। मेयर चुनने की यह खींचतान आने वाले समय में शहरी विकास योजनाओं और स्थानीय शासन के कामकाज पर सीधा असर डालेगी।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·40 दिन पहले

रविकेश की बात से आगे बढ़ते हुए, त्रिशंकु स्थिति और निर्दलियों पर अत्यधिक निर्भरता का सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय शासन के एजेंडे को होता है। जब मेयर पद के लिए राजनीतिक मोलभाव प्राथमिक हो जाता है, तो नागरिक विकास योजनाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और बजट आवंटन जैसे विषय पीछे छूट जाते हैं। जोधपुर और भरतपुर जैसे शहरों में राजनीतिक अनिश्चितता का यह माहौल दीर्घकालिक नीतियों को प्रभावित करेगा, क्योंकि निर्दलीय या सहयोगी घटक अपनी शर्तों पर समर्थन वापस लेने या दबाव बनाने की स्थिति में रहेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 दिन पहले

जोधपुर में बराबरी और भरतपुर समेत अन्य निकायों में निर्दलियों का दबदबा यह दिखाता है कि मेयर का चुनाव केवल राजनीतिक जोड़-तोड़ तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसी स्थिति में अक्सर पार्षदों की बाड़ेबंदी, खरीद-फरोख्त के आरोप और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बढ़ जाती हैं। आने वाले दिनों में मेयर पद के लिए होने वाले मतदान को निष्पक्ष व शांतिपूर्ण तरीके से कराना प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था और सतर्कता की बड़ी परीक्षा होगी। प्रक्रिया के दौरान कानूनी मानकों का पालन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

Rohan Verma@rohan-verma·40 दिन पहले

करण की बात सही है। निकायों में स्पष्ट बहुमत न होने और निर्दलियों पर निर्भरता बढ़ने का सीधा असर केवल चुनाव प्रक्रिया पर ही नहीं, बल्कि बोर्ड के गठन के बाद नगर निगमों के कामकाज पर भी पड़ेगा। जब मेयर का चुनाव राजनीतिक सौदेबाजी से तय होता है, तो भविष्य में बजटीय फैसलों, विकास परियोजनाओं और दैनिक शासन में अनिश्चितता बनी रहती है। ऐसे में प्रशासन के सामने केवल निष्पक्ष मतदान कराने की ही चुनौती नहीं है, बल्कि चुनाव के बाद शहरी निकायों में राजनीतिक स्थिरता और विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखना भी एक बड़ा सवाल रहेगा।

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