राजस्थान विधानसभा का छठा सत्र अगस्त अंत में तय, कानून व्यवस्था पर विपक्ष का हमला तेजराजनीति
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राजस्थान विधानसभा का छठा सत्र अगस्त अंत में तय, कानून व्यवस्था पर विपक्ष का हमला तेज

राजस्थान में 16वीं विधानसभा का छठा सत्र अगस्त के अंतिम सप्ताह में बुलाए जाने की संभावना है, जिसमें कांग्रेस कानून व्यवस्था, प्रसूताओं की मौत और यूसीसी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।

राजस्थान में 16वीं विधानसभा के छठे सत्र की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इसे अगस्त के आखिरी हफ्ते में बुलाए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सत्र की आहट के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल तेज हो गई है, खासतौर पर कांग्रेस ने पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है।

छह महीने के अंतराल के नियम ने बढ़ाई सरगर्मी

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने खुद संकेत दिए हैं कि दो सत्रों के बीच का अंतराल नियमों के मुताबिक 180 दिन यानी छह महीने से ज्यादा नहीं हो सकता। इसी वजह से 10 सितंबर से पहले सत्र बुलाना अनिवार्य हो गया है। यही वजह है कि अगले महीने राजस्थान की राजनीति गरमाने के पूरे आसार बन रहे हैं, क्योंकि विधानसभा सत्र में हर मुद्दे पर बहस तय मानी जा रही है।

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कांग्रेस बोली, पूरी तैयारी के साथ उतरेंगे सदन में

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने साफ कहा कि कांग्रेस इस बार पूरी तैयारी के साथ विधानसभा में उतरने जा रही है। उनके मुताबिक पार्टी पिछले छह महीनों में सामने आए हर बड़े मुद्दे और घटनाक्रम पर मंथन कर रही है, ताकि जनता से जुड़ा कोई भी सवाल विधानसभा में मजबूती से रखा जा सके। जूली ने यह भी बताया कि मानसून सत्र में आमतौर पर चर्चा के लिए वक्त कम मिलता है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि विधानसभा अध्यक्ष का रवैया सकारात्मक है और वे चाहते हैं कि सत्र लंबा चले, ताकि प्रदेश के अहम मुद्दों पर विस्तार से बात हो सके। उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगेगा, चाहे वह प्रसूताओं की हो रही मौतों का मामला हो या कानून व्यवस्था से जुड़ा कोई और सवाल।

सरकार पर सत्र छोटा रखने की मंशा का आरोप

जूली ने आरोप लगाया कि सरकार खुद नहीं चाहती कि सत्र लंबा चले। लेकिन उनका कहना है कि इसके बावजूद विपक्ष अपनी कोशिश जारी रखेगा, चाहे सत्र पांच दिन का ही क्यों न हो, हर अहम मुद्दे को गंभीरता से सदन में उठाया जाएगा। इसके आगे उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर सीधा निशाना साधा। उनके मुताबिक राजस्थान में बढ़ते अपराध और लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था सरकार की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं, जबकि आम आदमी का सरकारी तंत्र पर भरोसा टूटता जा रहा है। जूली के मुताबिक अब किसी एक विभाग को अलग से जिम्मेदार ठहराना बेमानी है, क्योंकि हालात हर क्षेत्र में चिंताजनक बने हुए हैं।

जेल के भीतर हत्या, बाहर भी बेखौफ अपराध

टीकाराम जूली ने कानून व्यवस्था पर हमला और तेज करते हुए कहा कि जेल के भीतर हत्या की वारदातें हो रही हैं और दूसरे कैदी खुद अपनी जान की सुरक्षा को लेकर डर जता रहे हैं। वहीं जेल की चारदीवारी के बाहर राजधानी जयपुर में भी हत्या जैसी वारदातें थमने का नाम नहीं ले रहीं। उनके मुताबिक शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जब कहीं फायरिंग, हत्या, साइबर फ्रॉड या फिर महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म की कोई घटना सामने न आए। जूली ने कहा कि इतना सब होने के बावजूद सरकार की ओर से अपराधों पर कोई असरदार कार्रवाई होती नहीं दिख रही।

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की हाल की कानून व्यवस्था समीक्षा बैठक को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने छह महीने बाद, वह भी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर समीक्षा बैठक की, जबकि इस दौरान अपराध लगातार होते रहे। जूली ने सवाल खड़ा किया कि अगर अब एसपी और आईजी स्तर के अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, तो इससे पहले आखिर जिम्मेदारी किसकी बनती थी। उनका कहना है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पर लगातार और बारीकी से निगरानी की जरूरत है। गृह विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही है, इसलिए जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। जूली ने यहां तक आरोप लगाया कि प्रदेश का पूरा सिस्टम माफियाओं के कब्जे में जाता दिख रहा है और कई मामलों में तो पुलिसकर्मियों पर भी हमले हो रहे हैं।

यूसीसी समेत कई विधेयक आ सकते हैं इस सत्र में

सूत्रों की मानें तो विधानसभा के इस आगामी सत्र में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी समेत कई अहम विधेयक सदन में पेश हो सकते हैं। राजस्थान में पिछला बजट सत्र 10 मार्च को समाप्त हुआ था। सत्र बुलाने का अंतिम फैसला राज्य सरकार करेगी, उसके बाद राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े इसकी विधिवत अधिसूचना जारी करेंगे। माना जा रहा है कि यह सत्र करीब 5 से 7 दिन तक चल सकता है और इसी दौरान सरकार यूसीसी बिल का मसौदा भी सदन के सामने रख सकती है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस मौके पर कहा कि राजस्थान विधानसभा देश की उन गिनी-चुनी विधानसभाओं में शामिल है, जहां सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध को लंबा खींचने के बजाय संवाद के जरिए ही समाधान निकालने की परंपरा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाला सत्र भी सुचारू रूप से चलेगा।

यूसीसी को लेकर पहले से मचा है घमासान

यह सत्र इस बार खासा अहम माना जा रहा है, क्योंकि समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर बनाई गई समिति की ओर से अलग-अलग जिलों में जनसुनवाई का दौर चल रहा है और कांग्रेस पहले से ही इस प्रक्रिया का विरोध जता रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, तीनों ही इस जनसुनवाई प्रक्रिया पर पहले सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि यूसीसी का मुद्दा आगामी सत्र में विपक्ष के हमलों का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बनेगा।

सवाल-जवाब

राजस्थान विधानसभा का अगला सत्र कब बुलाया जा सकता है?
यह सत्र अगस्त के अंतिम सप्ताह में बुलाए जाने की संभावना है और नियमों के तहत इसे 10 सितंबर से पहले बुलाना अनिवार्य है।
यह सत्र इसी समयसीमा में क्यों बुलाना जरूरी है?
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के मुताबिक दो सत्रों के बीच 180 दिन यानी छह महीने से ज्यादा का अंतराल नहीं हो सकता, इसलिए तय समय में सत्र बुलाना जरूरी है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने किन मुद्दों पर सरकार को घेरने की बात कही है?
उन्होंने प्रसूताओं की हो रही मौतों, कानून व्यवस्था, बढ़ते अपराध और जेल के भीतर हो रही हत्याओं जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की बात कही है।
सत्र कितने दिन तक चल सकता है?
माना जा रहा है कि यह सत्र करीब 5 से 7 दिन तक चल सकता है।
इस सत्र में कौन सा अहम बिल पेश हो सकता है?
सूत्रों के मुताबिक इस सत्र में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का मसौदा बिल पेश हो सकता है।
यूसीसी को लेकर कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस यूसीसी को लेकर जिलों में चल रही जनसुनवाई प्रक्रिया का विरोध कर रही है और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा व टीकाराम जूली इस पर पहले ही सवाल उठा चुके हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की समीक्षा बैठक पर क्या सवाल उठे?
जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री ने छह महीने बाद, वह भी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कानून व्यवस्था की समीक्षा की, जबकि इस दौरान अपराध लगातार होते रहे।
सत्र बुलाने का अंतिम फैसला कौन करेगा?
सत्र बुलाने का अंतिम निर्णय राज्य सरकार करेगी, उसके बाद राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े इसकी अधिसूचना जारी करेंगे।
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