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रूसी राष्ट्रपति पुतिन से शांति की अपील के बाद यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकरराजनीति
3 सित॰ 2026, 7:01 pm (8 दिन पहले)· 1

रूसी राष्ट्रपति पुतिन से शांति की अपील के बाद यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एससीओ शिखर सम्मेलन में युद्ध समाप्त करने की अपील के दो दिन बाद विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर कीव की ऐतिहासिक यात्रा पर पहुंचे हैं।

वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से युद्ध रोककर शांति का मार्ग अपनाने का आग्रह करने के ठीक बाद, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर कीव पहुंच गए हैं। इस दौरे को जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में भारत के बढ़ते राजनयिक प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

कीव की पहली आधिकारिक यात्रा और शांति संदेश

यूक्रेन के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का कीव में स्वागत किया। उन्होंने इसे किसी भी भारतीय विदेश मंत्री का यूक्रेन का पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा बताया। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और शांति बहाली की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन में बातचीत की शुरुआत करते हुए युद्ध के लंबे खिंचने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह संघर्ष अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। जयशंकर ने भारत के स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि आज का युग युद्ध का नहीं है और किसी भी समस्या का स्थाई समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता।

बिश्केक शिखर सम्मेलन और भारत की मध्यस्थता का प्रस्ताव

विदेश मंत्री ने दो दिन पहले बिश्केक में आयोजित एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का हवाला दिया। बिश्केक में पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से स्पष्ट कहा था कि अनिश्चितकालीन युद्ध के बजाय अब संघर्ष को समाप्त किया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने रेखांकित किया था कि युद्ध का हर बीतता दिन केवल अधिक मौतों और भारी तबाही का कारण बनता है।

कीव में अपनी वार्ता का ब्योरा देते हुए डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हालांकि शांति का रास्ता खोजना मुख्य रूप से संघर्ष में शामिल पक्षों का दायित्व है, लेकिन यदि भारत किसी भी तरह से समाधान में सहायता कर सकता है, तो वह इसके लिए पूरी तरह तैयार है। यूक्रेन के विदेश मंत्री के साथ हुई बैठक का मुख्य विषय यही रहा कि इस जारी संकट को कूटनीतिक संवाद के जरिए कैसे हल किया जाए।

सवाल-जवाब

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने यूक्रेन की यात्रा क्यों की?
जयशंकर ने युद्ध को समाप्त करने और कूटनीतिक रास्ते से शांति स्थापित करने पर चर्चा के लिए कीव का दौरा किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से क्या कहा था?
पीएम मोदी ने कहा था कि आज का युग युद्ध का नहीं है और अनिश्चितकालीन युद्ध के स्थान पर संघर्ष की समाप्ति होनी चाहिए।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को कितना समय हो चुका है?
विदेश मंत्री एस जयशंकर के अनुसार, यह युद्ध दुर्भाग्य से अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है।
क्या किसी भारतीय विदेश मंत्री की यह पहली यूक्रेन यात्रा है?
हां, यूक्रेन के विदेश मंत्री के अनुसार यह किसी भी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है।
शांति प्रक्रिया में भारत की क्या भूमिका है?
भारत का रुख है कि समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा, और यदि दोनों पक्ष चाहें तो भारत शांति प्रक्रिया में सहायता के लिए तैयार है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की यह कीव यात्रा वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक स्थिरता दोनों दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। रूस-यूक्रने संघर्ष के पांचवें वर्ष में प्रवेश करने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय बाज़ारों और ऊर्जा सुरक्षा पर लगातार दबाव बना हुआ है। भारत का यह सक्रिय राजनयिक रुख न केवल वैश्विक शांति प्रयासों में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि भारत व्यापारिक और ऊर्जा हितों के साथ-साथ कूटनीतिक संवाद के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता को कम करने के पक्ष में है। यदि यह मध्यस्थता सफल होती है, तो यह वैश्विक वित्तीय बाजारों और जोखिम वाले निवेश्टमेंट्स के लिए एक सकारात्मक संकेत साबित होगा।

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