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शुभेंदु अधिकारी की गरीब परिवारों को पंद्रह हजार रुपये देने की मांग से पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमाईराजनीति
16 अक्तू॰ 2026, 8:12 pm (10 दिन पहले)· 1

शुभेंदु अधिकारी की गरीब परिवारों को पंद्रह हजार रुपये देने की मांग से पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमाई

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के एक नए बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने गरीब परिवारों को हर महीने बारह हजार से पंद्रह हजार रुपये तक की आर्थिक मदद देने की वकालत की है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया भूचाल आ गया जब पूर्वी मेदिनीपुर जिले के ऐतिहासिक नंदीग्राम शहर में एक दुर्गा पूजा पंडाल के उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए हर महीने बारह हजार से पंद्रह हजार रुपये तक की सहायता राशि उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग उठाई। उनके इस तीखे और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बयान से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे में गहरी चिंता और खलबली मच गई है। त्योहारों के इस खास माहौल में दिए गए इस संबोधन ने राज्य के राजनीतिक गलियारों का पारा पूरी तरह से चढ़ा दिया है।

हर महीने बारह से पंद्रह हजार रुपये की सहायता की वकालत

जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने इस बात पर खास जोर दिया कि राज्य प्रशासन और सरकार का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व बनता है कि वह समाज के सबसे आखिरी पायदान पर जीवन बसर कर रहे उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों की सुध ले, जिन्हें वास्तव में वित्तीय संबल की सबसे अधिक आवश्यकता महसूस हो रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभिन्न जनहित और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से ऐसे परिवारों के खातों में हर महीने कम से कम बारह से पंद्रह हजार रुपये की पक्की आय या मदद पहुंचनी चाहिए। हालांकि, उनके इस भाषण से यह बात तुरंत साफ नहीं हो सकी कि यह भारी-भरकम वित्तीय सहायता योजना केवल नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र के निवासियों तक सीमित रहेगी या इसे पूरे पश्चिम बंगाल के तमाम आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के लिए लागू किया जाएगा, लेकिन इस बात ने विपक्षी दलों की नींद जरूर उड़ा दी है।

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भवानीपुर और नंदीग्राम से अपने गहरे राजनीतिक रिश्ते पर रखी बात

अपने विस्तृत भाषण के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक कार्यक्षेत्र और मतदाताओं के साथ जुड़े पुराने रिश्तों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर और नंदीग्राम के साथ उनका नाता बेहद पुराना और मजबूत है। उन्होंने यह भी साफ किया कि जब तक दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर क्षेत्र के लोग खुद यह चाहेंगे, वह लगातार वहां के विधायक के रूप में उनका प्रतिनिधित्व करते रहेंगे। इसके विपरीत, नंदीग्राम के साथ उनका संबंध केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मतदाता के रूप में उनके आजीवन जुड़ाव का प्रतीक है।

अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में बदलते राजनीतिक समीकरणों का दावा

नंदीग्राम आंदोलन और अपने बीते दिनों के राजनीतिक संघर्षों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बंगाल की बदलती हुई जमीनी हकीकत का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब इक्कीस और छब्बीस के चुनावों के दौरान वह नंदीग्राम के कई अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में प्रचार करने के लिए जा भी नहीं पा रहे थे और वहां प्रवेश करना उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन आज का समय पूरी तरह बदल चुका है और वही लोग अब उन पर फूलों की वर्षा करके उनका गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं।

टीएमसी खेमे में मची खलबली और सियासी नफा-नुकसान

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा गरीब तबके के लोगों के लिए बारह हजार से पंद्रह हजार रुपये तक की मासिक वित्तीय सहायता की पैरवी करने वाले इस बयान की गूंज अब पूरे पश्चिम बंगाल में सुनाई दे रही है। इस बयान के सामने आने के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी के खेमे में इस बात को लेकर गहरी बेचैनी और हड़कंप मचा हुआ है कि कहीं इस मास्टरस्ट्रोक से उनका पारंपरिक वोट बैंक उनसे छिटक कर दूसरी तरफ न चला जाए। नंदीग्राम की पावन भूमि से जनता के बीच दिया गया यह संदेश इस बात की ओर साफ इशारा करता है कि आने वाले समय में राज्य सरकार कल्याणकारी योजनाओं के जरिए सामाजिक ढांचे को अपने पक्ष में करने के लिए और भी कई बड़े व कड़े कदम उठा सकती है।

सवाल-जवाब

शुभेंदु अधिकारी ने गरीब परिवारों के लिए कितनी मासिक मदद की मांग की है?
उन्होंने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए हर महीने बारह हजार से पंद्रह हजार रुपये की आर्थिक मदद की पैरवी की है।
यह बयान किस स्थान पर दिया गया?
यह बयान पूर्वी मेदिनीपुर जिले के ऐतिहासिक शहर नंदीग्राम में एक दुर्गा पूजा पंडाल के उद्घाटन के दौरान दिया गया।
इस बयान से किस राजनीतिक दल में हलचल मची है?
इस बयान के बाद पूर्व सीएम ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी के खेमे में हड़कंप मच गया है।
शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के संबंध में क्या स्पष्ट किया?
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर के लोग चाहेंगे, वह वहां के विधायक के रूप में उनका प्रतिनिधित्व करते रहेंगे।
नंदीग्राम के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों को लेकर क्या दावा किया गया?
उन्होंने दावा किया कि जिन इलाकों में पहले प्रचार करना कठिन था, आज वहां के लोग उन पर फूलों की बारिश कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·10 दिन पहले

नंदीग्राम के उस दुर्गा पंडाल में जब मैं भी उपस्थित था, तब हवा में एक अलग ही तनाव था। जनता के बीच पैसे बांटने की ऐसी बातें सुनकर बुजुर्गों की पुरानी चिंताएं फिर से ताजा हो गईं।

Rohan Verma@rohan-verma·10 दिन पहले

हर महीने पंद्रह हजार रुपये देने की बात तो ठीक है, पर बंगाल सरकार का खजाना पहले से ही खाली है, ऐसे में इतना पैसा आखिर कहां से आएगा?

Neha Verma@neha-verma·10 दिन पहले

रोहन जी, खजाना खाली होने की बात तो ठीक है, पर नेताजी ने यह भी तो नहीं साफ किया कि यह पैसा सिर्फ नंदीग्राम के लोगों को मिलेगा या पूरे बंगाल के गरीबों को।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

पंद्रह हजार रुपये महीना देने की बात कह दी, पर ये पैसे आएंगे कहां से, यह नहीं बताया।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही पकड़े! चुनावी भाषणों में बड़े-बड़े वादे तो हो जाते हैं, पर राजकोष पर इसका असर कौन देखेगा?

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