नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान वैश्विक सहयोग और कूटनीतिक संवाद को मजबूत करने के लिए अहम बैठकें आयोजित की गईं। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों और सांसदों के साथ सार्थक विचार-विमर्श किया। राजधानी में जुटे इन सांसदों के साथ बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने संवाद पर रखे अपने विचार
इस संवाद सत्र के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि दिल्ली में जारी 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 के दौरान सदस्य देशों के सांसदों के साथ उनका संवाद बेहद शानदार रहा। उन्होंने साझा किया कि दोनों पक्षों ने विभिन्न मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए और व्यापक चर्चा की। इस बातचीत में देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने और संसदीय स्तर पर सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।
संसदीय लोकतंत्र और वैश्विक शांति पर मंथन
इस मंच पर अन्य भारतीय नेताओं ने भी वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित किया। मंच के दौरान असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि यह फोरम संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार करता है। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के इतर चीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में शांति बनाए रखने की साझा जिम्मेदारी पर बल दिया। इसके अलावा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी फोरम के समापन पर एक साझा घोषणापत्र जारी होने की आशा व्यक्त की।
जनता की प्रतिक्रिया
इस बैठक पर ऑनलाइन प्रतिक्रिया देते हुए नागरिकों के बीच मिली-जुली राय देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे वैश्विक सहयोग और भारत के कूटनीतिक कद को बढ़ाने वाला कदम बताते हुए सराहा, जबकि अन्य लोगों ने आम जनता को इससे मिलने वाले वास्तविक लाभ और ऐसे आयोजनों पर होने वाले सार्वजनिक खर्च को लेकर सवाल उठाए।


























