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सुप्रीम कोर्ट की याचिका में राहुल गांधी को बड़ा झटका, 220 रुपये की कमी और वकालतनामे गायब मिलने से अटकी सुनवाईराजनीति
13 अक्तू॰ 2026, 12:11 am (14 दिन पहले)· 3

सुप्रीम कोर्ट की याचिका में राहुल गांधी को बड़ा झटका, 220 रुपये की कमी और वकालतनामे गायब मिलने से अटकी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग और वोट चोरी के खिलाफ दाखिल राहुल गांधी की याचिका में रजिस्ट्री ने 14 तकनीकी कमियां निकाली हैं, जिसमें 220 रुपये की कम फीस और नौ नेताओं के वकालतनामे गायब होना शामिल है।

भारतीय राजनीति के गलियारों में उस समय अजीब स्थिति पैदा हो गई जब देश की सबसे बड़ी अदालत में दाखिल एक प्रमुख कानूनी याचिका तकनीकी खामियों के चलते बीच रास्ते में ही रुक गई। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और कथित वोट चोरी के मामलों को चुनौती देने के लिए तैयार किए गए इस कानूनी दस्तावेज पर अभी सुनवाई शुरू भी नहीं हो पाई थी कि न्यायालय की रजिस्ट्री ने इसमें एक साथ 14 बड़ी कमियां उजागर कर दीं। इन तकनीकी अशुद्धियों और कागजी औपचारिकताओं की अनदेखी के कारण फिलहाल इस पूरे मामले की सुनवाई पर विराम लग गया है, और जब तक ये त्रुटियां दूर नहीं की जातीं, तब तक तारीख मिलना मुमकिन नहीं है।

छोटी सी लापरवाही और गायब दस्तावेज

इस हाई-प्रोफाइल मामले में सामने आई कमियों में सबसे चौंकाने वाला पहलू अदालत की फीस से जुड़ा हुआ है, जहां निर्धारित शुल्क में पूरे 220 रुपये की कमी पाई गई। देश के राजनीतिक पटल पर बड़ा असर डालने की मंशा रखने वाली इस याचिका में इतने छोटे से शुल्क की अनदेखी हैरान करने वाली है। इसके अतिरिक्त, इस कानूनी कदम में शामिल कुल नौ याचिकाकर्ताओं के हस्ताक्षरयुक्त वकालतनामे भी संलग्न दस्तावेजों के बीच से गायब पाए गए। इन सभी प्रशासनिक और कागजी चूकों को अदालत की रजिस्ट्री ने फाइलिंग की शुरुआती जांच के दौरान ही तुरंत पकड़ लिया।

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चौदह तकनीकी आपत्तियां और नियमों का फेर

केवल फीस और वकालतनामे की गैरमौजूदगी ही इस मामले में एकमात्र समस्या नहीं है, बल्कि अदालत के नियमों के अनुसार दस्तावेजों की रूपरेखा और फॉर्मेटिंग से जुड़ी कुल 14 आपत्तियां दर्ज की गई हैं। न्यायिक प्रक्रिया के सख्त प्रावधानों के तहत वकीलों की टीम को अब इन सभी कमियों को दुरुस्त करना होगा ताकि अदालत के मानकों के अनुरूप कागजात तैयार किए जा सकें। जब तक इन सभी चौदह तकनीकी बाधाओं को पूरी तरह से ठीक नहीं कर लिया जाता, तब तक इस संवेदनशील और उच्च-स्तरीय मामले को आधिकारिक तौर पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा।

राजनीतिक मुहिम और आगे की राह

इस याचिका के माध्यम से विपक्षी दलों का यह गठबंधन निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और कथित रूप से चुराए गए वोटों के मुद्दों पर मुखर होकर सरकार को घेरने की तैयारी में था। इस कानूनी लड़ाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा थी, लेकिन इन तकनीकी अड़चनों ने फिलहाल इस योजना की रफ्तार धीमी कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राहुल गांधी की कानूनी टीम कितनी तेजी से इन चौदह कमियों को सुधारकर मामले को दोबारा अदालत के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत करती है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में कुल कितनी कमियां निकाली हैं?
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका में कुल 14 तकनीकी कमियां दर्ज की हैं।
याचिका में कितने रुपये की फीस कम पाई गई थी?
इस याचिका में कोर्ट फीस के पूरे 220 रुपये कम रह गए थे।
याचिका में कौन से दस्तावेज गायब मिले हैं?
याचिका के साथ कुल नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे गायब मिले हैं।
यह याचिका किस मुद्दे के खिलाफ दाखिल की गई थी?
यह याचिका चुनाव आयोग के विशेष पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी के खिलाफ दाखिल की गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·14 दिन पहले

अरे यार, इतनी बड़ी कानूनी टीम और 220 रुपये की छोटी सी फीस कम रह जाना! जब मैं खुद पिछले साल अपने कुछ कागजात जमा कराने कोर्ट गई थी, तो छोटी सी गलती पर बाबू ने पूरा फॉर्म वापस फेंक दिया था। वकीलों से ऐसी लापरवाही की उम्मीद नहीं थी।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

अदालत में ऐसी लापरवाही कैसे हो सकती है जब इतने बड़े नेताओं की टीम हो? 220 रुपये कम होना और वकालतनामे गायब मिलना थोड़ा अजीब लग रहा है, शायद जानबूझकर ध्यान भटकाने के लिए यह सब हुआ हो।

Sophie Laurent@sophie-laurent·14 दिन पहले

रोहन, बिल्कुल सही कहा आपने। ब्रुसेल्स में भी कई बार नेताओं की ऐसी छोटी गलतियां देखकर हैरानी होती है, जैसे कोई जानबूझकर फाइलें अटका रहा हो।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

इतने बड़े मामले में महज़ 220 रुपये की कमी और नौ वकालतनामे गायब होना वाकई हैरान करने वाला है। क्या कानूनी टीम इतनी बड़ी फाइलिंग करते वक्त बुनियादी कागज़ी कार्रवाई की भी जांच नहीं करती?

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

करण भाई, सही कह रहे हो। इतनी बड़ी लीगल टीम से इतनी बेसिक चूक कैसे हो सकती है, क्या सच में यह लापरवाही थी या जानबूझकर डिले करवाया गया?

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