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सुप्रीम कोर्ट मार्च रोकने के बाद सड़कों पर उतरा विपक्ष, राहुल गांधी, अखिलेश और तेजस्वी ने दिखाया साझा दमराजनीति
12 अक्तू॰ 2026, 6:53 pm (14 दिन पहले)· 0

सुप्रीम कोर्ट मार्च रोकने के बाद सड़कों पर उतरा विपक्ष, राहुल गांधी, अखिलेश और तेजस्वी ने दिखाया साझा दम

दिल्ली में विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर विरोध मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग कर रोक दिया।

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में 12 अक्टूबर 2026 का दिन भारी गहमागहमी के बीच बीता। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी गठबंधन ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक एक विशाल मार्च निकालने का प्रयास किया। यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ नेताओं की बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों पर बसों का काफिला, पैदल चलते हजारों कार्यकर्ता, पुलिस की भारी बैरिकेडिंग और गूंजते नारों के साथ एक अभूतपूर्व दृश्य पेश कर गया। 10 और 11 अक्टूबर के बाद 12 अक्टूबर को भी दिल्ली पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद और अलर्ट पर दिखाई दी।

संविधान क्लब से शुरू हुआ नेताओं का काफिला

इस बड़े राजनीतिक प्रदर्शन की रूपरेखा दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में तैयार हुई, जहां सुबह से ही तमाम विपक्षी दलों का जमावड़ा शुरू हो गया था। बैठक समाप्त होने के बाद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा और गठबंधन के अन्य शीर्ष नेता बसों और निजी वाहनों के माध्यम से बाराखंभा रोड की तरफ बढ़े। योजना थी कि यहां से आगे सभी नेता और कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च करेंगे। पूरे रास्ते दो अलग-अलग दृश्य देखने को मिले, जहां एक तरफ बड़े नेता बसों में सवार होकर आगे बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर हजारों समर्थक झंडे और बैनर थामे पैदल चलते हुए नारेबाजी कर रहे थे।

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भगवान दास रोड पर पुलिस बैरिकेडिंग से लगा ब्रेक

विपक्षी नेताओं का काफिला जैसे ही बाराखंभा रोड जंक्शन से आगे बढ़कर सुप्रीम कोर्ट की दिशा में बढ़ा, पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। भगवान दास रोड पर दिल्ली पुलिस द्वारा भारी बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई। बैरिकेड्स के पास ही राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव एक साथ नजर आए। पुलिस द्वारा मार्च को रोके जाने के बाद नेताओं ने कानूनी कदम उठाने और सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की रणनीति बनाई। राहुल गांधी ने खुद सुप्रीम कोर्ट जाकर याचिका दाखिल करने का ऐलान किया।

तिरंगा, लाल-हरे गमछे और गांधी टोपी का अनोखा संगम

इस विरोध मार्च में विपक्षी दलों की एकजुटता के साथ-साथ एक विशेष रणनीति भी दिखाई दी। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सभी सहयोगी दलों को निर्देश दिया गया था कि प्रदर्शन को किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का आंदोलन बनाया जाए। इसलिए कार्यकर्ताओं से पार्टी के झंडों के स्थान पर केवल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर आने की अपील की गई थी। प्रदर्शन स्थल पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता लाल टोपी में, आरजेडी के कार्यकर्ता हरे गमछे में और कांग्रेस सेवा दल के सदस्य गांधी टोपी पहने हुए एक साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। दिल्ली की सड़कों पर लाल-हरे गमछे और गांधी टोपी का यह संगम पहली बार एक साथ इतने बड़े पैमाने पर दिखाई दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका की तैयारी

इस पूरे सुप्रीम कोर्ट मार्च का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर करना था। विपक्ष का आरोप है कि हालिया चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इस मुद्दे को सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत के समक्ष ले जाने के लिए विपक्ष ने यह संयुक्त मोर्चा खोला है। मार्च के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के साथ कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में चर्चाओं का जिक्र भी सामने आया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विपक्ष इस मुद्दे को केवल सड़क तक सीमित न रखकर अदालत के भीतर भी पूरी मजबूती से लड़ेगा।

छात्र संगठनों और नए चेहरों की भागीदारी

राजनीतिक दिग्गजों के अलावा इस मार्च में कई युवा और छात्र नेताओं की सक्रियता भी ध्यान खींचने वाली रही। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी राहुल गांधी के साथ मार्च में देखा गया। नेहा बोरा हाल के दिनों में दिल्ली में हुए कई जन-प्रदर्शनों और पुलिस बैरिकेडिंग के बीच अपनी सक्रियता को लेकर चर्चा में रही हैं। इससे पहले वे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों में भी नजर आ चुकी हैं। दिल्ली में विभिन्न विचारधाराओं के कार्यकर्ताओं, छात्र नेताओं और राष्ट्रीय स्तर के विपक्षी चेहरों की एक साथ मौजूदगी ने इस सुप्रीम कोर्ट मार्च को बेहद अहम बना दिया।

सवाल-जवाब

विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में कौन सा मार्च निकाला?
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकाला।
पुलिस ने विपक्षी प्रदर्शनकारियों को किस जगह रोका?
दिल्ली पुलिस ने भगवान दास रोड पर भारी बैरिकेडिंग करके विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया।
इस विरोध मार्च का मुख्य उद्देश्य क्या था?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची पुनरीक्षण में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करना इसका मुख्य मकसद था।
मार्च में कौन-कौन से मुख्य विपक्षी नेता शामिल हुए?
मार्च में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत कई बड़े नेता शामिल थे।
मार्च की शुरुआत दिल्ली में कहां से हुई थी?
सभी विपक्षी नेता पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एकत्र हुए, जिसके बाद वे बसों और गाड़ियों से बाराखंभा रोड की ओर रवाना हुए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·14 दिन पहले

राहुल, अखिलेश और तेजस्वी का यूं सड़कों पर एक साथ उतरना और बैरिकेड्स पर खड़े दिखना बढ़िया है, पर सच कहूँ तो सिर्फ मार्च निकालने से चुनाव आयोग के नियमों में कोई रातों-रात बदलाव आ जाएगा, इस बात पर मुझे पूरा भरोसा नहीं है।

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

सड़क पर विपक्ष का ऐसा जमावड़ा चुनाव आयोग के खिलाफ माहौल बनाने के लिए काफ़ी है, पर बात कोर्ट में कितनी टिकेगी देखना होगा।

Priya Sharma@priya-sharma·14 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात सही है कि कोर्ट में क्या होगा देखना बाकी है, पर क्या पुलिस ऐसे मार्च को हमेशा रोकती ही रहेगी या कोई बीच का रास्ता निकलेगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक बात पहुँच गई है, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना गंभीर मामला है।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछली बार जब मैं चुनाव के दौरान लखनऊ में ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहा था, तब भी ऐसे ही हंगामे के बीच आम जनता को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ी थीं।

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