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सुप्रीम कोर्ट पर बयान दिग्विजय सिंह को पड़ा भारी, इंदौर के महापौर ने तुषार मेहता को लिखकर मांगी अवमानना की कार्रवाईराजनीति
13 जून 2026, 6:23 am (46 दिन पहले)· 0

सुप्रीम कोर्ट पर बयान दिग्विजय सिंह को पड़ा भारी, इंदौर के महापौर ने तुषार मेहता को लिखकर मांगी अवमानना की कार्रवाई

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सुप्रीम कोर्ट संबंधी बयान पर विवाद गहराया, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पत्र भेजकर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट, 1971 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

मध्य प्रदेश की सियासत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह बना है सुप्रीम कोर्ट को लेकर दिया गया उनका एक बयान, जिसने राजनीतिक तापमान तो बढ़ाया ही, अब कानूनी पचड़े का रूप भी ले लिया है। शुरुआत में यह मामला सिर्फ बीजेपी के हमलों और पलटवार तक सीमित दिख रहा था, लेकिन अब इसने अदालती कार्रवाई की मांग तक का सफर तय कर लिया है।

महापौर ने सॉलिसिटर जनरल तक पहुंचाई बात

इस पूरे प्रकरण को नया मोड़ इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दिया। उन्होंने मामले को गंभीर करार देते हुए सीधे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पत्र लिखा है। भार्गव का तर्क है कि दिग्विजय सिंह का बयान न्यायपालिका की गरिमा पर चोट करता है, और इसी आधार पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट, 1971 के तहत कदम उठाए जाने की मांग रखी है।

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पत्र के साथ भेजे सबूत

महापौर ने अपनी बात को महज आरोप तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने पत्र के साथ बयान की रिकॉर्डिंग, उसकी कॉपी और दूसरे जरूरी दस्तावेज भी संलग्न कर भेजे हैं, ताकि शिकायत को ठोस आधार मिल सके। भार्गव का कहना है कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक अहम स्तंभ है, और उस पर की गई कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी आम लोगों के भरोसे को हिला सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पूरे मामले की जांच के बाद संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।

बीजेपी हमलावर, कांग्रेस की चुप्पी

इस घटनाक्रम के बीच बीजेपी ने कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। पार्टी के नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने वालों को अपनी जुबान पर संयम रखना चाहिए। दूसरी तरफ, इतने शोर-शराबे के बावजूद कांग्रेस की ओर से अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे क्या?

एक बयान से शुरू हुआ यह टकराव अब धीरे-धीरे प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। ऐसे में सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि कानूनी मोर्चे पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और इसका असर सूबे की सियासत पर कितना गहरा पड़ता है।

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