मध्य प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार को जिस भ्रष्टाचार के मामले में घेरने का प्रयास किया था, उसी पर उनके ही दल के अनुभवी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूरी तरह से उलट रुख अपना लिया है। उज्जैन में दिए गए इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और कांग्रेस के लिए स्थिति असहज हो गई है।
जीतू पटवारी का 500 करोड़ का दावा
पिछले गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। पटवारी का कहना था कि उज्जैन में सिंधिया परिवार द्वारा स्थापित करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी के ट्रस्ट, 'वीर भारत न्यास' को महज एक रुपये की लीज पर सौंप दिया गया है। जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी दावों पर सवाल खड़े करते हुए पूछा था कि आखिर ऐसी कीमती संपत्ति को कौड़ियों के भाव पर सरकारी ट्रस्ट को क्यों दिया गया।
दिग्विजय सिंह की ओर से क्लीन चिट
उज्जैन दौरे के दौरान दिग्विजय सिंह ने जीतू पटवारी के इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया। सिंह ने अपने दावे के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि वे बिना उचित शोध के कोई बयान नहीं देते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई निजी संस्थान नहीं, बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट है। दिग्विजय सिंह के अनुसार, इस ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं और जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे, तब वे भी इसके अध्यक्ष रहे थे।
दलालों पर सीधा निशाना
दिग्विजय सिंह ने जीतू पटवारी का नाम लिए बिना उन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में दलालों की कोई कमी नहीं है और ऐसे लोग ही झूठे आरोप गढ़कर धन वसूली का काम करते हैं। रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट के कागजात दिखाते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि 'वीर भारत संस्थान' एक सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत है, इसलिए इस पर घोटाले का आरोप पूरी तरह से निराधार है।
बीजेपी को मिला बड़ा राजनीतिक मौका
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का एक और मौका मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता ने ही प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों की हवा निकाल दी है। बीजेपी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह के बयान से यह साबित हो गया है कि कांग्रेस के भीतर कौन असल में दलाली का काम कर रहा है।













