बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में मतदान के ठीक पहले बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। जो मुकाबला शुरुआत में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की मौजूदगी के कारण त्रिकोणीय लग रहा था, वह अब भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के बीच आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भावुक अपील और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार ने बांकीपुर के पूरे चुनावी परिदृश्य को बदलकर रख दिया है।
तेजस्वी यादव की एंट्री और राष्ट्रीय जनता दल का पलटवार
चुनाव प्रचार के शुरुआती चरण में तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति के कारण राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता की स्थिति कमजोर मानी जा रही थी। इस मौके का फायदा उठाकर प्रशांत किशोर की पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करती दिख रही थी। हालांकि, वोटिंग से ठीक तीन-चार दिन पहले तेजस्वी यादव ने पटना में कदम रखा और 27 जुलाई तथा 28 जुलाई को भव्य रोड शो किया। तेजस्वी के इस आक्रामक प्रचार से राजद कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर गया, जिससे प्रशांत किशोर का प्रभाव सीमित हो गया और लड़ाई सीधे भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा बनाम राजद प्रत्याशी रेखा गुप्ता हो गई।
नीतीश कुमार का संदेश और कुर्मी वोट बैंक की लामबंदी
वर्तमान सम्राट चौधरी सरकार की कुछ स्थानीय नीतियों को लेकर बांकीपुर क्षेत्र के कुर्मी और अतिपिछड़ा समाज के मतदाताओं में असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। एनडीए के रणनीतिकारों को डर था कि इस असंतोष से नुकसान हो सकता है। इसी स्थिति में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता के नाम एक विशेष अपील जारी की। उन्होंने अपने शासनकाल की विकास योजनाओं और बांकीपुर से अपने पुराने रिश्तों का हवाला दिया। नीतीश कुमार के इस कदम के बाद करीब 15,000 कुर्मी वोटर फिर से एनडीए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में एकजुट होते दिखाई दे रहे हैं।
बांकीपुर का सामाजिक और जातिगत समीकरण
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल मिलाकर करीब 3.89 लाख मतदाता हैं, जहां जातिगत आंकड़े हार-जीत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस सीट पर सबसे बड़ा वोट बैंक सवर्ण समाज का है, जिनकी संख्या 1,25,000 से 1,30,000 के बीच है, जो कुल मतदाताओं का 33 प्रतिशत से अधिक है। सवर्णों में सर्वाधिक प्रभावशाली कायस्थ समुदाय है, जिनकी आबादी 65,000 से अधिक है। इसके अलावा करीब 35,000 भूमिहार, 18,000 ब्राह्मण और 12,000 राजपूत मतदाता हैं, जो पारंपरिक रूप से भाजपा के साथ रहते हैं।
बांकीपुर में वैश्य समुदाय की आबादी लगभग 85,000 से 90,000 के करीब है, जो कुल वोट बैंक का करीब 22 प्रतिशत है। इनमें गुप्ता, कलवार और साहू जैसी उपजातियां शामिल हैं, जिन पर भाजपा और राजद दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। दूसरी तरफ मुस्लिम और यादव का माई समीकरण लगभग 55,000 से 60,000 के बीच है, जो करीब 15 प्रतिशत बैठता है। इसमें लगभग 32,000 मुस्लिम और 25,000 यादव मतदाता हैं। तेजस्वी यादव के आने से पहले प्रशांत किशोर बंटी यादव हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिले थे और मुस्लिम इलाकों में प्रचार कर रहे थे ताकि वोट विभाजित न हों। इसके अलावा क्षेत्र में करीब 45,000 दलित और महादलित मतदाता भी हैं। इन सभी समीकरणों का वास्तविक प्रभाव 30 जुलाई को होने वाले मतदान के बाद ही साफ हो पाएगा।



















