उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है, जिसने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में तहलका मचा दिया है। राज्य के सतर्कता विभाग (विजिलेंस) की टीम ने एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी के लखनऊ स्थित आलीशान आवास पर छापेमारी कर बेहिसाब नकदी, भारी मात्रा में सोना, चांदी और करोड़ों रुपये की संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए हैं। यह बड़ी कार्रवाई आगरा के पूर्व सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के ठिकाने पर की गई है। साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मियों के बीच हुई इस बड़ी छापेमारी के बाद अब इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या राज्य में अवैध रूप से अकूत संपत्ति बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ एक व्यापक सफाई अभियान शुरू हो चुका है।
अलीगंज में चला बयालीस घंटे का मैराथन तलाशी अभियान
सतर्कता विभाग की इस कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब टीम ने अदालत से बकायदा सर्च वारंट हासिल किया। इसके बाद सतर्कता विभाग की एक विशेष टीम लखनऊ के बेहद पॉश इलाके अलीगंज में स्थित चंद्रलोक कॉलोनी के मकान संख्या सी-143 पर पहुंची, जो ललित कुमार का मुख्य निवास स्थान है। अदालत के आदेश के साथ पहुंची जांच टीम ने 7 और 8 जुलाई को लगातार दो दिनों तक इस परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया। शुरुआत में अधिकारियों को केवल कुछ संदिग्ध फाइलों और दस्तावेजों के मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जैसे ही घर के गुप्त कोनों, दीवारों और विशेष लॉकरों की जांच शुरू हुई, वहां से नोटों की गड्डियां और सोने-चांदी की सिल्लियां बाहर आने लगीं।
जैसे-जैसे तलाशी का दायरा बढ़ता गया, बरामद संपत्ति का आकार इतना विशाल हो गया कि विजिलेंस टीम को मौके पर नोट गिनने वाली मशीनें, तराजू और पेशेवर मूल्यांककों को बुलाना पड़ा। दो दिनों तक चली इस मैराथन कार्रवाई के बाद जब पूरी बरामदगी का अंतिम ब्यौरा तैयार किया गया, तो वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों के भी होश उड़ गए। एक ही घर के भीतर इतनी भारी मात्रा में छिपाकर रखी गई संपत्ति इस बात का साफ संकेत थी कि सरकारी सेवा में रहते हुए बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई थीं।
करोड़ों की नकदी और सोने-चांदी के भंडार का पूरा ब्यौरा
जब्त की गई अघोषित संपत्ति की सूची किसी बड़े खजाने जैसी दिखती है। दो दिनों की इस गहन खोजबीन के दौरान विजिलेंस की टीम ने ललित कुमार के घर से कुल 1.62 करोड़ रुपये की नकद राशि बरामद की है। यह पूरी नकदी नोटों के बंडलों और पैकेटों में बांधकर घर के अत्यंत सुरक्षित और गोपनीय स्थानों पर छिपाई गई थी। नकदी के अलावा, जांच दल को वहां से लगभग 13 किलोग्राम सोना मिला है। इस सोने को बिस्कुट, ठोस बार (सिल्लियों) और भारी पारंपरिक आभूषणों के रूप में रखा गया था। सराफा बाजार के मौजूदा भाव के अनुसार, केवल इस जब्त किए गए सोने की कीमत ही लगभग 20 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इसके साथ ही, घर से चांदी का भी एक बड़ा भंडार मिला है। विजिलेंस ने लगभग 9 किलोग्राम चांदी जब्त की है, जिसमें चांदी की सिल्लियां, बिस्कुट और बेहद कीमती आभूषण शामिल हैं। इतनी बड़ी मात्रा में कीमती धातुओं और नकद राशि का एक सरकारी अधिकारी के घर से मिलना यह दर्शाता है कि आय के ज्ञात स्रोतों से इतर संपत्ति अर्जित करने का यह खेल कितने बड़े पैमाने पर खेला जा रहा था।
लखनऊ से नोएडा और दिल्ली-एनसीआर तक फैला रियल एस्टेट साम्राज्य
विजिलेंस की टीम को केवल भौतिक रूप से मौजूद नकदी और सोना ही नहीं मिला, बल्कि उनके हाथ कई ऐसे महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज भी लगे हैं जो एक विशाल अचल संपत्ति साम्राज्य की ओर इशारा करते हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पूर्व ARTO ललित कुमार ने अपने सेवाकाल के दौरान और उसके बाद उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न महत्वपूर्ण शहरों में करोड़ों रुपये का निवेश किया था। सतर्कता विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बरामद किए गए कागजात से कुल 15 से अधिक बहुमूल्य संपत्तियों का पता चला है, जिनकी कुल अनुमानित बाजार कीमत 35 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
इन दस्तावेजों के अनुसार, ललित कुमार के पास लखनऊ के पॉश अलीगंज इलाके में दो बड़े आलीशान रिहायशी मकान हैं। इसके अलावा, राजधानी के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों जैसे इस्माइलगंज, वृंदावन योजना और भरावं कला में कई आवासीय प्लॉट उनके नाम दर्ज हैं। केवल शहरों में ही नहीं, बल्कि उनके गृह जनपद रायबरेली और पड़ोसी जिले बाराबंकी में कई बीघा उपजाऊ कृषि भूमि के मालिकाना हक के दस्तावेज भी मिले हैं। इसके साथ ही, नोएडा, लखनऊ और दिल्ली-एनसीआर के कई अत्याधुनिक और हाई-टेक आवासीय प्रोजेक्ट्स में महंगे फ्लैटों की बुकिंग से जुड़े कागजात भी इस कार्रवाई के दौरान बरामद किए गए हैं।
राजनीतिक निहितार्थ और जांच की आगामी दिशा
इस बेहद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी नई चर्चा छेड़ दी है। चूंकि राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं, ऐसे में इस कार्रवाई को राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के एक बड़े प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सेवानिवृत्त अधिकारियों पर इस तरह का कड़ा शिकंजा कसकर प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पुराने भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।
मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले आरोपी ललित कुमार के खिलाफ काफी समय से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की एक बेहद गोपनीय जांच चल रही थी। इस प्राथमिक जांच में पुख्ता सबूत मिलने के बाद, कानपुर रेंज के एंटी-करप्शन पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ एक औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सतर्कता विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है। विभाग अब ललित कुमार के विभिन्न बैंक खातों, लॉकरों और उनके परिवार या करीबियों के नाम पर दर्ज बेनामी संपत्तियों की गहन पड़ताल कर रहा है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े लोगों और उनके सहयोगियों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।











