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उत्तर प्रदेश चुनाव 2026-2027 से पहले ओपिनियन पोल, राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी पर जनता ने किसे ठहराया जिम्मेदारराजनीति
16 अक्तू॰ 2026, 7:29 pm (10 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश चुनाव 2026-2027 से पहले ओपिनियन पोल, राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी पर जनता ने किसे ठहराया जिम्मेदार

न्यूज 18 के मेगा ओपिनियन पोल में उत्तर प्रदेश की जनता ने राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी के लिए अपनी राय रखी है, जिसमें 31 प्रतिशत लोगों ने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों को जिम्मेदार माना है।

उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े सर्वे के नतीजे सामने आए हैं, जिसमें राज्य के सभी 75 जिलों से जनता की राय जुटाई गई है। इस महा-सर्वे के दौरान विभिन्न मुद्दों पर मतदाताओं से सीधी बातचीत की गई, जिसमें से एक बेहद संवेदनशील और तीखा सवाल राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं से जुड़ा हुआ था। जब जनता से यह पूछा गया कि इस पूरी स्थिति के लिए मुख्य रूप से किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, तो सर्वे के आंकड़ों ने कई चौंकाने वाले पहलू उजागर किए। इस व्यापक जनमत संग्रह में अलग-अलग आयु वर्ग, धर्म, जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी और व्यवस्था के विभिन्न स्तरों पर सवाल खड़े किए।

मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों और मिलीभगत पर उठे गंभीर सवाल

सर्वे के दौरान जब राम मंदिर के चंदे में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों के बारे में पूछा गया, तो जनता की प्रतिक्रिया काफी बंटी हुई नजर आई लेकिन एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर प्रबंधन से जुड़े लोगों पर सवाल उठा रहा था। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 31 प्रतिशत लोगों ने सीधे तौर पर मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों को इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार माना है। इसके अलावा, 25 प्रतिशत मतदाताओं का यह स्पष्ट मानना था कि इसमें किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि सभी संबंधित पक्षों की मिलीभगत और संयुक्त जिम्मेदारी है। वहीं दूसरी ओर, 21 प्रतिशत लोगों ने वित्तीय लेन-देन संभालने वाले कर्मचारियों और ठेकेदारों को कटघरे में खड़ा करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है, जिससे यह साफ होता है कि जनता धन के प्रबंधन को लेकर बेहद सतर्क और संशय में है।

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विशाल सैंपल साइज और सभी जिलों की भागीदारी से तैयार हुआ मेगा सर्वे

यह पूरा ओपिनियन पोल बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश के सुदूर गांवों से लेकर बड़े शहरों तक हर वर्ग की नुमाइंदगी सुनिश्चित की गई थी। राज्य के सभी 75 जिलों में कुल 30,925 लोगों से सीधे संवाद कर यह सर्वे तैयार किया गया, जिसकी समय-सीमा 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच तय की गई थी। इस महा-सर्वे में 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को शामिल किया गया था, जिसमें जनसांख्यिकी संतुलन का पूरा ध्यान रखते हुए 76 प्रतिशत पुरुष और 24 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई। इसमें किसानों, व्यापारियों, मजदूरों, नौकरीपेशा वर्ग के साथ-साथ युवाओं को भी पर्याप्त जगह दी गई ताकि समाज के हर कोने की आवाज सही रूप में सामने आ सके।

विभिन्न वर्गों और शिक्षा स्तर के आधार पर जुटाए गए आंकड़े

इस जनमत संग्रह को केवल राजनीतिक सीटों के समीकरण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसमें जनता के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी गहराई से टटोला गया है। सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, इसमें अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता और कामकाजी पृष्ठभूमि वाले लोगों की राय को शामिल किया गया ताकि हर तबके का दर्द और नजरिया स्पष्ट हो सके। इसमें गैर-कृषि क्षेत्र में मजदूरी करने वाले 5.5 प्रतिशत लोग शामिल थे, जिनकी आर्थिक स्थिति और विचार भी इस सर्वे का हिस्सा बने। इसके अलावा, उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले यानी ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट वर्ग की इसमें 21.4 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी रही, जिन्होंने अपनी तार्किक और समझदारी भरी राय से इस मेगा सर्वे के निष्कर्षों को एक नई गहराई और विश्वसनीयता प्रदान की है।

सवाल-जवाब

यह सर्वे कब से कब तक किया गया था?
यह सर्वे 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच किया गया था।
इस सर्वे में कुल कितने लोगों से बातचीत की गई?
राज्य के सभी 75 जिलों में कुल 30,925 लोगों से सीधे संवाद किया गया।
राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी के लिए कितने प्रतिशत लोगों ने ट्रस्ट के अधिकारियों को जिम्मेदार माना?
31 प्रतिशत लोगों ने सीधे तौर पर मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों को जिम्मेदार माना है।
सर्वे में पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी का प्रतिशत क्या था?
इस महा-सर्वे में 76 प्रतिशत पुरुष और 24 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं।
ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट लोगों की भागीदारी कितनी रही?
सर्वे में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट लोगों की हिस्सेदारी 21.4 प्रतिशत थी।
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टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·10 दिन पहले

पिछले साल जब अयोध्या जाना हुआ था, तो वहाँ स्थानीय लोगों से बातचीत में ही समझ आ गया था कि पैसे के लेन-देन को लेकर लोग कितने परेशान हैं। ट्रस्ट के नाम पर जो गड़बड़ी सामने आई है, उस पर जनता का गुस्सा लाजिमी है और ये सर्वे उसी सच को सामने ला रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

चंदे में गड़बड़ी पर जनता का गुस्सा साफ दिख रहा है, ट्रस्ट को जवाब देना ही होगा।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·10 दिन पहले

करण, बात तो सही है, पर 31% लोग ही ट्रस्ट को मान रहे हैं, बाकी तो बंटे हुए हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

चंदे में गड़बड़ी पर जनता का गुस्सा साफ दिख रहा है। जब इतने बड़े पैमाने पर सवाल उठ रहे हैं, तो ट्रस्ट को सामने आकर चीजें साफ करनी चाहिए, वरना चुनाव में इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·10 दिन पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही कहा आपने। मैं पिछले महीने जब अयोध्या गया था, तब भी स्थानीय लोगों दबे स्वर में यही बात कहते सुना था कि चंदे के हिसाब-किताब में पारदर्शिता होनी चाहिए थी।

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