केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से लगाए गए विदेशी फंडिंग के आरोपों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने तीखा पलटवार किया है। पार्टी के प्रमुख नेता आशुतोष रांका ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए सरकार से ठोस सबूत पेश करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता पक्ष बेरोजगारी, परीक्षाओं के पेपर लीक और वोटर लिस्ट की धांधली जैसे बुनियादी जनमुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।
गंभीर आरोपों पर सीजेपी का तीखा रुख
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सीजेपी और उसके कार्यकर्ताओं को विदेशों से वित्तीय मदद मिल रही है। उन्होंने दावा किया था कि इस नए राजनीतिक संगठन को अमेरिकी दानदाताओं, पाकिस्तानी राजनेताओं और भारत विरोधी तत्वों से धन प्राप्त हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके पर अमेरिका से और नेता आशुतोष रांका पर पाकिस्तानी राजनीतिज्ञों से पैसे लेने का आरोप जड़ा था।
इन आरोपों का जवाब देते हुए आशुतोष रांका ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार को पार्टी के विदेशी संबंधों के बारे में पहले से जानकारी या संदेह था, तो फिर सरकारी प्रतिनिधि सीजेपी के नेताओं से मुलाकात क्यों कर रहे थे? आशुतोष रांका ने तंज कसते हुए पूछा कि अगर हमारे पास विदेशी फंडिंग आ रही थी, तो केंद्रीय मंत्री और सरकारी अधिकारी हमसे हाथ क्यों मिला रहे थे, हमारे साथ बैठकें क्यों कर रहे थे और साथ बैठकर चाय-नाश्ता क्यों कर रहे थे?
असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश का आरोप
सीजेपी नेता ने कहा कि देश का युवा आज बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों से परेशान है। इसके अलावा, चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि इन वास्तविक समस्याओं का जवाब देने के बजाय सरकार झूठे आरोप लगाकर ध्यान भटका रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करने में इतनी तत्परता क्यों दिखा रही है।
पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने भी जितेंद्र सिंह के बयानों का जोरदार खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी ने जून महीने की शुरुआत से ही इन आरोपों पर सबूत मांगने शुरू कर दिए थे। 3 जून को आयोजित पहली पत्रकार वार्ता में भी पार्टी ने स्थिति साफ की थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार या जांच एजेंसियां कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी हैं। सौरव दास ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी और कट्टरपंथी समूह युवाओं के इस स्वतःस्फूर्त आंदोलन को बदनाम करने के लिए सुनियोजित अभियान चला रहे हैं।
प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और कानूनी जांच
उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे वोटर लिस्ट में पारदर्शिता लाने और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई थी। पुलिस का आरोप था कि सीजेपी कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा बैरिकेड तोड़े और बंद दरवाजे पर चढ़ने का प्रयास किया। इस संदर्भ में रांका ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर तिरंगा लहराना किसी भी स्थिति में अपराध नहीं माना जा सकता।
इस मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को कार्रवाई करते हुए आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद 13 अक्टूबर के घटनाक्रम को लेकर रांका, दास और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए। 5 नवंबर को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आशुतोष रांका और सौरव दास को पूछताछ के लिए तलब किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रांका ने दोहराया कि यह एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और उनकी पार्टी जांच में पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग करेगी।



















