पश्चिम बंगाल बार काउंसिल चुनाव के आए नतीजों में राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। कुल घोषित 23 सीटों के परिणामों में से तृणमूल कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 15 सीटों पर जीत का परचम लहराया है। वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को इस चुनाव में मात्र 3 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। हालिया राजनीतिक उथल-पुथल और विधानसभा चुनाव के झटकों के बाद कानूनी बिरादरी में टीएमसी का यह प्रदर्शन पार्टी के लिए राहत की बड़ी खबर माना जा रहा है।
कानूनी बिरादरी में टीएमसी का दबदबा
बार काउंसिल चुनाव के इस नतीजे को पश्चिम बंगाल के लीगल सेक्टर और अधिवक्ताओं के बीच टीएमसी की मजबूत पकड़ के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से राज्य की राजनीति में उतार-चढ़ाव जारी था, जिसके बीच इस चुनाव परिणाम ने सत्तारूढ़ दल को नई ऊर्जा प्रदान की है। 23 सदस्यीय बार काउंसिल में 15 सीटें जीतकर पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि बीजेपी और लेफ्ट गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
हालिया राजनीतिक संकट के बाद मिली राहत
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लिए यह जीत कई मायनों में अहम है। राज्य में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी को कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जुलाई के महीने में पार्टी के भीतर बागी गुट द्वारा चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने और 58 विधायकों के समर्थन का दावा करने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया था। इसके साथ ही विधानसभा में बागी और समर्थक विधायकों के बीच तीखी बहस और तनातनी भी देखने को मिली थी।
पूर्व डिप्टी स्पीकर के निधन और नए बदलावों के बीच नतीजे
यह चुनावी सफलता ऐसे समय में आई है जब हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और 5 बार के टीएमसी विधायक आशीष बनर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद विधानसभा में डिप्टी स्पीकर के पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं और बीजेपी विधायक बिमान घोष के नाम पर मंथन की खबरें भी आईं। इन तमाम परिस्थितियों और राजनीतिक दबाव के बीच बार काउंसिल चुनाव में मिली यह 15 सीटों की जीत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक संजीवनी मानी जा रही है।





















