शिक्षा के क्षेत्र में सितंबर का महीना ऐतिहासिक आयोजनों, राजनीतिक हलचल और गंभीर विवादों का गवाह रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित नामी शिक्षण संस्थान अलग-अलग कारणों से लगातार सुर्खियों का हिस्सा बने रहे। किसी जगह शताब्दी वर्ष पूरे होने पर भव्य उत्सव मनाए गए, तो किसी परिसर में छात्रसंघ चुनावों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। इसके अलावा, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के चलते कुछ परिसरों में छात्रों का गुस्सा भी खुलकर सामने आया। इन तमाम घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि शैक्षणिक संस्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि वहां होने वाली हर गतिविधि का व्यापक असर पूरे समाज पर पड़ता है। महीने की शुरुआत राजधानी दिल्ली से हुई, जहां देश के शीर्ष कॉमर्स कॉलेजों में गिने जाने वाले संस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कदम रखे। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव और दक्षिण दिल्ली के एक प्रमुख महिला कॉलेज में सुरक्षा को लेकर हुए आंदोलनों ने जोर पकड़ा। माह के अंतिम दिनों में पंजाब के निजी परिसरों और मुंबई के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से जुड़ी घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आइए जानते हैं सितंबर के दौरान इन प्रमुख संस्थानों में क्या कुछ खास घटित हुआ।
श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की सौ साल की गौरवशाली यात्रा और प्रधानमंत्री का आगमन
सितंबर माह के शुरुआती दिनों में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स ने अपनी स्थापना के एक सौ वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। इस ऐतिहासिक शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। इस कार्यक्रम का एक खास पहलू यह रहा कि प्रधानमंत्री ने किसी विशेष काफिले के बजाय सामान्य नागरिकों की तरह दिल्ली मेट्रो के जरिए सफर किया और यात्रा के दौरान युवाओं के साथ संवाद भी स्थापित किया। इस खास अवसर पर संस्थान के सौ साल के सफर को याद करते हुए एक सौ रुपये का विशेष स्मारक सिक्का भी जारी किया गया, जो इस मौके को और भी ज्यादा यादगार बना गया। कॉलेज के इस बड़े आयोजन ने शिक्षा जगत में एक सकारात्मक शुरुआत की, जिसके बाद महीने के आगे बढ़ने के साथ अन्य परिसरों की हलचलें भी तेज हो गईं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनावों का रोमांच और महिला सुरक्षा पर छात्राओं का आंदोलन
मध्य सितंबर आते-आते दिल्ली विश्वविद्यालय का माहौल पूरी तरह से राजनीतिक रंग में रंग गया। डूसू चुनावों के दौरान परिसरों में जोरदार प्रचार और गहमागहमी देखने को मिली, जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर केंद्रीय पदों पर नियंत्रण हासिल किया। चुनावों की इस सरगर्मी के ठीक बाद दक्षिण दिल्ली स्थित लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्राओं ने अपने परिसर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया। इलाके में हुई एक गंभीर घटना के बाद छात्राओं ने खराब स्ट्रीट लाइटों और पुलिस गश्त की कमी के मुद्दों को उठाते हुए जोरदार मार्च निकाला और प्रदर्शन किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन को ऑनलाइन कक्षाओं का निर्देश देना पड़ा, जिससे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पंजाब के प्रमुख निजी विश्वविद्यालयों में अफवाहों और तनाव का माहौल
सितंबर के अंतिम सप्ताह में पंजाब के दो बड़े निजी शिक्षण संस्थानों, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा यूनिवर्सिटी में अचानक तनावपूर्ण हालात पैदा हो गए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ अप्रमाणित और डरावनी अफवाहें तेजी से वायरल होने लगीं, जिनके असर से परिसरों में उग्र प्रदर्शन भड़क उठे। हजारों छात्र अपने हॉस्टलों से बाहर निकल आए और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। हालांकि बाद में विश्वविद्यालय प्रशासनों ने स्पष्ट किया कि वायरल होने वाले सारे दावे पूरी तरह निराधार और फर्जी थे। फिर भी एहतियात के तौर पर संस्थानों में छुट्टियां घोषित करनी पड़ीं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके और शांति बहाल हो सके।
आईआईटी बॉम्बे में संकट के बादल और परीक्षाओं का स्थगन
देश के अग्रणी तकनीकी संस्थानों में गिने जाने वाले आईआईटी बॉम्बे के लिए सितंबर का महीना काफी भारी और तनावपूर्ण रहा। साहिल वाकोडे के दुखद निधन से जुड़े मामले ने पूरे कैंपस को झकझोर कर रख दिया और छात्रों का गुस्सा भड़क उठा। विद्यार्थियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए संस्थान के निदेशक और संबंधित प्रोफेसर से इस्तीफे की मांग दोहराई। परिसर में लगातार बढ़ते रोष और अशांत माहौल को शांत करने के लिए प्रशासन को बीच में दखल देना पड़ा। हालात को संभालने और सामान्य स्थिति वापस लाने के उद्देश्य से आईआईटी बॉम्बे ने अपनी निर्धारित मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया है।



















