राजस्थान के अलवर नगर निगम चुनाव के सभी 65 वार्डों के नतीजे आधिकारिक रूप से घोषित कर दिए गए हैं। इन परिणामों के बाद शहर की स्थानीय राजनीति का परिदृश्य पूरी तरह साफ हो गया है। भारतीय जनता पार्टी इन चुनावों में सबसे बड़े राजनैतिक दल के रूप में उभरकर सामने आई है। हालांकि, पूर्ण बहुमत का आंकड़ा न छू पाने के कारण भाजपा को स्थानीय बोर्ड का गठन करने के लिए निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की सख्त जरूरत होगी। इस बार के चुनाव केवल पार्टीगत आंकड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि रिश्तों के दिलचस्प समीकरणों और कई चौंकाने वाले उलटफेरों के लिए भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
सीटों का अंतिम गणित और किंगमेकर की भूमिका
अलवर नगर निगम के कुल 65 वार्डों में हुए इस मुकाबले में भाजपा के 28 प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को 23 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। इस बार के चुनावों में जनता ने 13 निर्दलीय उम्मीदवारों को भी विजयी बनाया है, जो अब बोर्ड गठन के समय निर्णायक भूमिका में होंगे। इसके अलावा, बहुजन समाज पार्टी के केवल एक प्रत्याशी को इस चुनाव में सफलता मिल सकी है। इस त्रिशंकु स्थिति में भाजपा के लिए निर्दलीयों को अपने पाले में लाना सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि बहुमत साबित करने के लिए उन्हें अतिरिक्त पार्षदों की आवश्यकता है।
रिश्तों की बिसात पर अनोखी हार और जीत
इन चुनावों में कुछ ऐसे नतीजे भी देखने को मिले जहां पारिवारिक रिश्तों की अनूठी कहानी सामने आई। वार्ड संख्या 23 से भाजपा की सुमन चौधरी और वार्ड संख्या 28 से भाजपा के ही सीताराम चौधरी चुनावी मैदान में थे। ये दोनों आपस में पति-पत्नी हैं, लेकिन इस बार जनता ने दोनों को ही नकार दिया और दोनों को हार का स्वाद चखना पड़ा। इसके बिल्कुल विपरीत, वार्ड संख्या 38 से भाजपा के श्याम सुंदर यादव और वार्ड संख्या 61 से भाजपा की सुनीता देवी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। खास बात यह है कि ये दोनों आपस में समधि-समधन हैं, और दोनों की जोड़ी ने मिलकर परिषद में अपनी जगह पक्की की है।
विरासत की जीत और अजय पूनिया का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
नगर निगम चुनावों में कई प्रत्याशियों ने अपनी पुरानी साख और पारिवारिक दबदबा कायम रखा है। वार्ड संख्या 20 से पूर्व मेयर घनश्याम गुर्जर की पुत्रवधू बीना गुर्जर ने शानदार जीत दर्ज की है, जिससे उनके परिवार का राजनैतिक वर्चस्व बना रहा। वहीं, वार्ड संख्या 49 से भाजपा के प्रत्याशी अजय पूनिया ने पूरे चुनाव में सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड बनाया। अजय पूनिया के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि यह उनकी लगातार पांचवीं जीत है। इससे पहले वे चार बार लगातार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर अपनी जमीनी पकड़ साबित कर चुके थे और इस बार उन्होंने भाजपा के टिकट पर अपनी जीत का सिलसिला कायम रखा।
दिग्गज परिवारों और मेयर पद के दावेदारों को लगा झटका
कुछ वार्डों में चुनाव परिणामों ने बड़े राजनैतिक दिग्गजों को स्तब्ध कर दिया है। वार्ड संख्या 32 से भाजपा उम्मीदवार नीलिमा जैन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वह पिछली बार सभापति पद के उम्मीदवार रहे धीरज जैन की पत्नी हैं, इसलिए उनकी हार को भाजपा के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इसी तरह, वार्ड संख्या 36 में कांग्रेस पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बेहद करीबी माने जाने वाले दीपक गर्ग की भाभी रिंकल गर्ग इस वार्ड से चुनाव हार गई हैं। चुनावी गलियारों में रिंकल गर्ग को मेयर पद की सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उनकी इस हार ने कांग्रेस के भावी समीकरणों को बिगाड़ दिया है।


















