केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नवी मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन और हिंदी दिवस समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने हिंदी को देश की भाषाई एकता और राष्ट्रीय चेतना की प्रमुख वाहक बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश की भाषाई विविधता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है और हिंदी इस विविधता को जोड़ने का काम करती है।
मातृभाषा और राष्ट्रीय पहचान का गहरा संबंध
समारोह के दौरान अमित शाह ने कहा कि "वंदे मातरम्" केवल एक गीत नहीं है बल्कि एक गहरी भावना है। उनका मानना था कि कोई भी बच्चा अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही भारत को सबसे बेहतर तरीके से समझ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी किसी अन्य प्रांतीय भाषा की विरोधी नहीं है, बल्कि वह सभी भारतीय भाषाओं को आपस में जोड़कर राष्ट्रीय एकता की एक मजबूत कड़ी बनती है।
इतिहास में हिंदी की भूमिका
गृह मंत्री ने याद दिलाया कि स्वामी दयानंद सरस्वती से लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस तक, इतिहास के विभिन्न कालखंडों में महापुरुषों ने हिंदी को देश को एकजुट करने का माध्यम बनाया था। उन्होंने कहा कि भाषाई दूरियों को पाटकर हिंदी ने हमेशा राष्ट्रीय संवाद को सुगम बनाया है। यह भाषा देश के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए एक मजबूत सेतु की तरह काम करती आई है।
बोलियों का संरक्षण और संस्थागत प्रयास
देश की समृद्ध भाषाई विरासत को बचाना आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि कई स्थानीय बोलियों पर धीरे-धीरे लुप्त होने का खतरा मँडरा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 117 भाषाएं और बोलियां ऐसी हैं जो गंभीर खतरे में हैं, क्योंकि इन्हें बोलने वाले लोगों की संख्या अब 10,000 से भी कम रह गई है। इस सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय मंचों से लगातार आवाज उठाई जा रही है। इसी कड़ी में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होकर एक महत्वपूर्ण बात कही थी। उन्होंने जोर देकर कहा था कि भारतीय भाषाओं के माध्यम से ही भारत की आत्मा की वास्तविक अभिव्यक्ति संभव है। इसके लिए शैक्षणिक और सामाजिक स्तर पर लगातार स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
क्षेत्रीय सम्मेलन और सांस्कृतिक प्रयास
भाषाई संवाद को सुगम बनाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में नियमित रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हाल ही में बिहार की राजधानी पटना में एक क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान लोक भवन में "लाल पहाड़ी: स्त्री महाविहार" नामक एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जो क्षेत्रीय साहित्य की प्रगति को दर्शाता है। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों के राज्यपालों ने भी अपने वक्तव्यों में हिंदी को राष्ट्र की एकता का सेतु बताया है। विश्व रेडियो दिवस 2026 जैसे अवसरों पर भी स्थानीय बोलियों में प्रसारण के महत्व को रेखांकित किया गया था। ये सभी साझा प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि देश में हिंदी के विकास के साथ-साथ सभी प्रांतीय और क्षेत्रीय भाषाओं के सह-अस्तित्व को मजबूत किया जा रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री के इस सोशल मीडिया पोस्ट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई लोगों ने भाषाई गौरव और राष्ट्रीय एकजुटता के इस संदेश का स्वागत किया, वहीं कुछ लोगों ने स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को लेकर चिंता जताई और कुछ ने क्षेत्रीय नीतिगत निर्णयों पर सवाल उठाए।



























