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पेड़ों पर चढ़ने वाली बकरियों का सच, अजूबा नहीं भुखमरी का दर्द हैदुनिया
8 नव॰ 2026, 10:28 am (13 मिनट पहले)· 2

पेड़ों पर चढ़ने वाली बकरियों का सच, अजूबा नहीं भुखमरी का दर्द है

मोरक्को के आर्गन के पेड़ों पर दिखने वाली बकरियों का यह नजारा कोई कुदरती चमत्कार नहीं है, बल्कि भीषण सूखे और गरीबी से जूझते किसानों की मजबूरी और बेजुबान जानवरों पर हो रही क्रूरता की दास्तान है।

मोरक्को के रेगिस्तानी इलाकों में सड़कों के किनारे आर्गन के पेड़ों पर दर्जनों बकरियों का एक साथ खड़ा होना किसी चमत्कार या कुदरती करिश्मे की तरह लग सकता है। दूर-दराज से आने वाले सैलानी इस अजीबोगरीब नजारे को देखकर हैरान रह जाते हैं और इसे अपने कैमरों में कैद करने के लिए रुक जाते हैं। लेकिन सच इसके ठीक उलट है और यह किसी प्राकृतिक खूबी का नतीजा नहीं है। असल में यह दृश्य गहरी गरीबी, भुखमरी और बेजुबान जानवरों पर होने वाले गंभीर जुल्म की एक दर्दभरी कहानी है, जिसे पर्यटकों को रिझाने के लिए जानबूझकर तैयार किया जाता है।

इन बेकसूर बकरियों को पेड़ों की बेहद पतली और कमजोर टहनियों पर घंटों खड़े रहने के लिए बेहद क्रूर और कठिन प्रशिक्षण दिया जाता है। स्थानीय लोग इन जानवरों को लुभाने के लिए अनाज और रसीले फलों का लालच देते हैं या फिर डंडों के बल पर उन्हें लकड़ी के छोटे-छोटे तख्तों पर खड़े होने के लिए मजबूर करते हैं। जो बकरियां अपनी मर्जी से ऊपर नहीं चढ़ पाती हैं, उन्हें उठाकर जबरन टहनियों के बीच बैठा दिया जाता है ताकि सैलानी इस तमाशे को देखकर खुश हो सकें।

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मोरक्को की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच इन मूक प्राणियों को बिना किसी छांव, पानी या खाने के लगातार तीन से चार घंटे तक ऊपर ही खड़ा रहना पड़ता है। पशु विशेषज्ञों और डॉक्टरों का मानना है कि इतने अत्यधिक तापमान में घंटों इस तरह तनाव में रहने से बकरियों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रेस जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इसके अलावा कई बार संतुलन बिगड़ने से वे ऊंचाई से नीचे गिर जाती हैं, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो जाती हैं और उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

इस अमानवीय प्रथा के पीछे की सबसे बड़ी वजह मोरक्को में पिछले कई दशकों से पड़ा हुआ भयानक सूखा है, जिसने कृषि व्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर दिया है। गेहूं की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और अन्न का एक दाना भी पैदा नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते ग्रामीण इलाकों के किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अपने परिवार और मासूम बच्चों का पेट पालने के लिए इन लाचार किसानों के पास खेती के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है, इसलिए वे पर्यटकों से मिलने वाली छोटी-मोटी टिप के सहारे ही अपना गुजारा करने को मजबूर हैं।

वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन जैसी कई अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार संस्थाओं ने इस पूरी गतिविधि को सीधे तौर पर पशु क्रूरता करार दिया है और इस पर गहरी चिंता जताई है। जानकारों का कहना है कि सुंदर तस्वीरें खिंचवाने के शौकीन पर्यटक अक्सर अनजाने में ही इस पूरे शोषण चक्र का एक हिस्सा बन जाते हैं। इसके साथ ही, मोरक्को का पशु कल्याण के मामलों में रिकॉर्ड पहले से ही काफी निराशाजनक रहा है, जिसके कारण इन बेजुबानों की सुध लेने वाला कोई प्रभावी तंत्र नजर नहीं आता है।

इस पूरे खेल से न केवल जानवरों को प्रताड़ित किया जा रहा है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और आर्गन के पेड़ों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। आम धारणा यह है कि बकरियों का पेड़ों पर चढ़ना बीजों के फैलाव में मददगार होता है, लेकिन सच्चाई यह है कि ये जानवर फल खाने के चक्कर में पेड़ों की नई और कोमल पत्तियों के साथ छोटे पौधों को भी पूरी तरह चबा जाते हैं। इस वजह से पेड़ों का प्राकृतिक रूप से विकास रुक गया है और नए पौधे उग नहीं पा रहे हैं, जिससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति हो रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि इससे किसानों के सामने भुखमरी का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह भारत के पारंपरिक 'डांसिंग बियर' मॉडल की तर्ज पर इन किसानों के लिए आय के नए और वैध साधन विकसित करे। जब तक स्थानीय नागरिकों को वैकल्पिक रोजगार के अवसर नहीं मिलते, तब तक पर्यटकों के मनोरंजन के नाम पर बेजुबान जानवरों का यह तमाशा पूरी तरह बंद होना असंभव है।

सवाल-जवाब

मोरक्को में बकरियां पेड़ों पर क्यों चढ़ती हैं?
किसानों द्वारा पर्यटकों से टिप कमाने के लिए बकरियों को जबरन आर्गन के पेड़ों पर खड़ा किया जाता है।
बकरियों को पेड़ों पर कैसे चढ़ाया जाता है?
उन्हें अनाज का लालच दिया जाता है और डंडे के जोर या जबरन उठाकर लकड़ी के प्लेटफॉर्म पर बिठाया जाता है।
इस प्रथा से बकरियों पर क्या असर पड़ता है?
घंटों धूप में रहने से वे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रेस का शिकार होती हैं और कई बार गिरकर घायल हो जाती हैं।
किसानों की इस मजबूरी की मुख्य वजह क्या है?
देश में दशकों का सबसे भयानक सूखा पड़ने से फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और किसानों के पास आजीविका का कोई साधन नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इसे क्या करार दिया है?
वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन जैसी संस्थाओं ने इसे सीधे तौर पर पशु क्रूरता बताया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Arjun Mehta@arjun-mehta·अभी

सैलानियों की एक फोटो के चक्कर में बेजुबान बकरियों पर इतना जुल्म ढाना वाकई दिल दहला देने वाला है। सूखा और गरीबी अपनी जगह बड़ी समस्या है, पर क्या स्थानीय प्रशासन और मानवाधिकार संस्थाएं इन किसानों के लिए कोई और वैकल्पिक आजीविका का साधन नहीं जुटा सकतीं?

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