मलेशियाई सियासी गलियारों में इन दिनों भारी फेरबदल देखने को मिल रहा है और इसकी मुख्य वजह नजीब रज्जाक हैं। सत्तर साल की उम्र पार कर चुके इस मलेशियाई नेता को अगस्त 2022 से जेल में रखा गया था। अरबों डॉलर के कुख्यात वनएमडीबी घोटाले में सजा भुगत रहे नजीब अब सलाखों के पीछे से निकलकर अपने आलीशान आवास में बाकी की सजा काटेंगे। इस शाही राहत के मिलने और अदालत में करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर वैश्विक स्तर पर लोग हैरान हैं।
जुर्माने की रकम का भुगतान और चंदे की पूरी कहानी
एसआरसी इंटरनेशनल मामले में अदालत ने नजीब रज्जाक को दोषी ठहराते हुए बारह साल कैद और भारी भरकम जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि इस वर्ष सितंबर माह में देश के राजा ने एक विशेष शाही माफी के तहत उनकी बाकी जेल की सजा को नजरबंदी में तब्दील करने का निर्देश दिया था। इस राहत के लिए शर्त यह रखी गई थी कि उन्हें सबसे पहले अदालत द्वारा तय किया गया वित्तीय दंड भरना होगा।
नजीब की पार्टी यूएनएमओ के महासचिव अशरफ वाजिदी दुसुकी ने शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि की कि उनके संगठन ने राष्ट्रव्यापी चंदा अभियान चलाकर पचास मिलियन रिंगिट की पूरी राशि एकत्र कर ली है। इस धन को क्वालालंपुर उच्च न्यायालय में जमा करवा दिया गया है, जिससे उनकी रिहाई और घर में नजरबंदी के रास्ते की कानूनी बाधाएं समाप्त हो गई हैं।
वनएमडीबी घोटाला जिसने देश की नींव हिला दी
इस पूरे घटनाक्रम की गहराई को जानने के लिए वनएमडीबी वित्तीय घोटाले के इतिहास को टटोलना जरूरी है। वर्ष 2009 में प्रधानमंत्री बनने के पश्चात नजीब रज्जाक ने देश के आर्थिक विकास को गति देने के लिए मलेशिया डेवलपमेंट बर्हाद नामक एक सरकारी निवेश कोष की स्थापना की थी।
लेकिन कुछ ही वर्षों के भीतर इस कोष से भारी पैमाने पर धन की हेराफेरी के मामले उजागर होने लगे। आरोप लगाए गए कि नजीब और उनके करीबी सहयोगियों ने इस कोष के 4.5 अरब डॉलर यानी लगभग 37,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का दुरुपयोग किया। इस पैसे का इस्तेमाल दुनिया भर में विलासितापूर्ण संपत्तियों, महंगी कलाकृतियों, आभूषणों और हॉलीवुड फिल्मों के वित्तपोषण में किया गया। इस प्रकरण ने मलेशियाई राजनीति को इस हद तक झकझोर दिया कि 2018 के आम चुनाव में उनकी पार्टी पहली बार सत्ता से बाहर हो गई।
क्वालालंपुर में बढ़ती प्रशासनिक हलचल और सुरक्षा इंतजाम
जैसे ही शुक्रवार को अदालत में जुर्माना जमा होने की खबर फैली, राजधानी क्वालालंपुर में उनके आलीशान बंगले के आसपास पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई। सुरक्षा महकमे ने उनके आवास की ओर आने वाले सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी और यातायात को रोक दिया गया।
प्रशासन की ओर से अभी तक यह आधिकारिक रूप से नहीं बताया गया है कि उन्हें किस विशेष दिन और समय पर जेल से उनके घर शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन उनके स्वागत के तमाम इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। पार्टी समर्थकों का मानना है कि उनका जेल से बाहर आना मौजूदा सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि आज भी संगठन में उनका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है।
शाही माफी और कानूनी पेचीदगियों पर उठते सवाल
देश के पूर्व प्रधानमंत्री को मिली इस रियायत और जुर्माना देकर घर में नजरबंदी हासिल करने की घटना पर कई तरह की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कानून के दोहरे मापदंड को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रभावशाली लोगों के लिए न्याय की प्रक्रिया अलग होती है। आम नागरिकों के लिए गंभीर अपराधों में जहां केवल जेल की सजा तय होती है, वहीं विशिष्ट राजनेताओं को इस प्रकार की विशेष राहत मिल जाती है। इसके अलावा इतनी कम अवधि में जनसहयोग से इतनी बड़ी राशि जुटाए जाने के तरीकों पर भी स्थानीय मीडिया में चर्चाएं जारी हैं।
आगे की राजनीतिक चाल और भविष्य की चुनौतियां
नजीब रज्जाक का जेल से निकलकर नजरबंदी में जाना देश की न्याय व्यवस्था और सरकार के लिए एक संवेदनशील दौर है। भले ही वे अब जेल की चारदीवारी से बाहर आ रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ चल रहे अन्य भ्रष्टाचार के मामलों की कानूनी सुनवाई लगातार जारी रहेगी। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे घर से ही अपनी पुरानी सियासी ताकत को फिर से खड़ा कर पाएंगे या यह बदलाव केवल उनकी ढलती उम्र के लिए दी गई एक प्रशासनिक राहत बनकर रह जाएगा।


















