सितंबर के महीने में पड़ने वाली उमस भरी गर्मी सिर्फ चेहरे या बदन को ही पसीने से तरबतर नहीं करती, बल्कि इसका सीधा असर सिर की त्वचा पर भी पड़ता है। इस मौसम में वातावरण की नमी और लगातार निकलने वाले पसीने के कारण बाल तेजी से चिपचिपे होने लगते हैं। स्कैल्प पर तेल और पसीने के जमाव से खुजली शुरू हो जाती है और कई बार डैंड्रफ की समस्या भी काफी बढ़ जाती है। ऐसी मौसमी उलझनों से निपटने के लिए दादी-नानी के जमाने से चले आ रहे पारंपरिक उपाय आज भी कारगर साबित होते हैं।
नीम की पत्तियों से करें स्कैल्प की प्राकृतिक सफाई
सिर की त्वचा को संक्रमण और चिपचिपाहट से बचाने के लिए नीम का प्रयोग बरसों पुराना घरेलू उपचार माना जाता है। कमला देवी के अनुसार, नीम की ताजी और साफ पत्तियों को पानी में डालकर अच्छी तरह उबाल लिया जाता है। इसके बाद जब यह पानी ठंडा हो जाए, तो सामान्य तरीके से बाल धोने के बाद इस तैयार पानी से स्कैल्प को साफ किया जाता है। उमस भरे दिनों में जब पसीना सूखने का नाम नहीं लेता और सिर में भारीपन महसूस होता है, तब नीम के पानी से मिलने वाली ठंडक स्कैल्प की बेचैनी को शांत करने में मदद करती है।
दही के प्रयोग में बरतें थोड़ी सावधानी
घरेलू नुस्खों में दही को बालों को पोषण देने के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना गया है। सादे दही को बालों की पूरी लंबाई पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ा जा सकता है। इसके पश्चात बालों को सामान्य पानी से बहुत अच्छी तरह धोना चाहिए, ताकि सिर में दही का कोई भी अंश बाकी न रह जाए। हालांकि, जिन लोगों की त्वचा पहले से ही बहुत तैलीय है या जिन्हें रूसी की पुरानी शिकायत रहती है, उन्हें इस मौसम में दही लगाते वक्त सतर्क रहना चाहिए। इसे लगातार सिर पर लगाने के बजाय पहले बेहद कम मात्रा लगाकर पैच टेस्ट की तरह जांच लेना चाहिए। यदि लगाने के बाद किसी तरह की जलन, खुजली या असुविधा महसूस हो, तो इसका प्रयोग फौरन रोक देना चाहिए।
मेथी के दानों का पेस्ट और इस्तेमाल का सही तरीका
बालों की देखभाल की पुरानी परंपराओं में मेथी के दानों का उपयोग प्रमुखता से शामिल रहा है। इसके लिए मेथी दानों को रात भर पानी में भिगोकर रखा जाता है और अगली सुबह उन्हें बारीक पीसकर एक मुलायम पेस्ट बना लिया जाता है। इस तैयार लेप को बालों और स्कैल्प पर कुछ समय के लिए लगाया जाता है, फिर पानी से साफ कर लिया जाता है। गर्म और उमस भरे वातावरण में इस पेस्ट को बहुत ज्यादा देर तक सिर पर लगाकर रखने से परहेज करना चाहिए। पहली बार यह नुस्खा आजमाने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे शुरुआत में बहुत थोड़ी मात्रा का ही इस्तेमाल करें, ताकि किसी भी तरह की त्वचा प्रतिक्रिया का समय रहते पता चल सके।
उमस भरे दिनों में ऑयलिंग की आदत में बदलाव
यूं तो बड़े-बुजुर्ग बालों में नियमित तेल लगाने पर जोर देते आए हैं, परंतु अत्यधिक नमी वाले मौसम में तेल लगाने की शैली में बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है। सिर में भारी मात्रा में तेल लगाकर उसे कई-कई घंटों तक छोड़ देने से स्कैल्प की चिपचिपाहट दोगुनी हो सकती है, जिससे रोमछिद्र बंद होने का खतरा रहता है। इसलिए इस मौसम में आवश्यकतानुसार केवल सीमित मात्रा में ही तेल लगाना चाहिए और थोड़ी देर बाद सिर को अच्छे से धो लेना चाहिए। यदि तेल लगाने के तुरंत बाद सिर में खुजली, जलन महसूस हो या रूसी बढ़ने लगे, तो तेल लगाना बंद कर देना उचित रहता है। गंभीर परेशानी होने पर त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
गीले बाल बांधने से बचें और साफ-सफाई पर दें ध्यान
बाल धोने के बाद उन्हें बांधने को लेकर भी पारंपरिक नियम काफी स्पष्ट रहे हैं। उमस के मौसम में जब बाल पूरी तरह नहीं सूखते, तो उन्हें गीली हालत में बांधने से सिर के भीतर नमी कैद हो जाती है। यह रुकी हुई नमी स्कैल्प पर फंगल प्रभाव, लगातार खुजली और चिड़चिड़ाहट को जन्म देती है। इसलिए बालों को धोने के पश्चात खुली हवा में पूरी तरह सूखने देना चाहिए। जब बालों से नमी पूरी तरह निकल जाए, केवल तभी कंघी करनी चाहिए और उन्हें बांधना चाहिए। साथ ही, बालों को बहुत कसकर बांधने की गलती भी नहीं करनी चाहिए।
बालों के स्वास्थ्य के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है। इस चिपचिपे मौसम में उपयोग की जाने वाली कंघी, तौलिया और तकिए के गिलाफ को लगातार धोकर साफ रखना आवश्यक है। अपनी कंघी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि पसीने से सिर भीग जाए, तो बालों को लंबे समय तक टोपी या कपड़े से ढककर न रखें, क्योंकि इससे भीतरी नमी बनी रहती है। स्कैल्प को तरोताजा रखने के लिए समय-समय पर धोते रहें, और यदि खुजली या डैंड्रफ की समस्या लगातार बनी रहे, तो विशेषज्ञ की सलाह लेने में देर न करें।




















