जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मंगलवार को एनेस्थीसिया विभाग के प्रथम वर्ष के पीजी छात्र डॉ. राज नीलेश यादव (31) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव अस्पताल के शौचालय के भीतर मिला, जिसके बाद पुलिस ने शुरुआती स्तर पर खुदकुशी की आशंका जताई है। इस अप्रत्याशित घटना से आहत और नाराज रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार से संस्थान में अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। आंदोलनकारी डॉक्टरों ने मृतक के आश्रितों के लिए 5 करोड़ रुपये के मुआवजे के साथ-साथ संस्थान प्रशासन की जवाबदेही तय करने और काम के माहौल में ठोस सुधार की मांग रखी है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस अमल नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप, आपातकालीन विभाग में इलाज जारी
रेजिडेंट डॉक्टरों के सामूहिक कार्य बहिष्कार के चलते अस्पताल में नियमित ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं। सामान्य मरीजों को परामर्श नहीं मिल पा रहा है, लेकिन गंभीर रूप से बीमार लोगों की देखभाल के लिए आवश्यक इंतजाम रखे गए हैं। आंदोलनकारी डॉक्टरों ने निर्णय लिया है कि इमरजेंसी ओपीडी और आकस्मिक सर्जरी की सेवाएं निरंतर जारी रहेंगी, ताकि किसी भी गंभीर मरीज की जान पर संकट न आए। अस्पताल परिसर में आने वाले आपातकालीन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जा रहा है।
ऑपरेशन थिएटर ड्यूटी के बीच वॉशरूम में अचेत मिले थे डॉक्टर
मूल रूप से एनेस्थीसिया विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर राज नीलेश यादव मंगलवार को ऑपरेशन थिएटर में अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे। दोपहर लगभग एक बजे वह एक छोटे अंतराल के दौरान वॉशरूम गए थे। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी वह कार्यस्थल पर नहीं लौटे, तो उनके साथी चिकित्सकों को चिंता हुई। साथियों ने उनकी तलाश शुरू की और उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। जब फोन की घंटी वॉशरूम के भीतर से बजती सुनाई दी, तो अनहोनी की आशंका में कर्मचारियों ने तुरंत दरवाजा तोड़ दिया। अंदर डॉ. यादव अचेत अवस्था में पड़े मिले, जिसके बाद उन्हें तुरंत इमरजेंसी वार्ड ले जाया गया। वहां मौजूद चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सीरिंज बरामदगी और पुलिस की प्रारंभिक जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। बसनी थाना प्रभारी नितिन डेव के अनुसार, घटनास्थल से कुछ सीरिंज बरामद की गई हैं। प्राथमिक तौर पर पुलिस को यह अंदेशा है कि डॉ. यादव ने संभवतः किसी जानलेवा दवा का इंजेक्शन अपने शरीर में लगाया होगा। हालांकि, मौत के असल कारणों पर अंतिम राय पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक नमूनों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। थाना प्रभारी ने यह भी स्पष्ट किया कि घटनास्थल से अब तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, इसलिए मामले की हर पहलू से विस्तृत जांच की जा रही है।
प्रशासन के साथ लंबी तनातनी और मौन विरोध
घटना की खबर मिलते ही मृतक चिकित्सक के परिजन अस्पताल पहुंचे। वहां परिजनों और संस्थान के निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी के बीच हुई चर्चा के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर भी प्रशासन और परिजनों के बीच कई घंटों तक गतिरोध बना रहा। बाद में शव को रवाना किए जाने पर सैकड़ों रेजिडेंट डॉक्टर परिसर के पोर्च में एकत्रित हुए और उन्होंने निदेशक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने अपने मुंह पर काली टेप बांधकर मौन प्रदर्शन किया और काम के अमानवीय दबाव के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। इस विरोध के समर्थन में संस्थान के अध्यक्ष ने भी बुधवार को दो घंटे का सांकेतिक कार्य बहिष्कार किया, जबकि इससे पूर्व सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों ने डॉ. यादव की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की थी।
आंदोलनकारी चिकित्सकों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने डॉ. यादव के परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए 5 करोड़ रुपये के मुआवजे के अतिरिक्त उनके सभी लागू लाभ, लंबित बकाया, बीमा राशि और अन्य जरूरी संस्थागत सहायता तुरंत जारी करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही डॉक्टरों ने प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख शर्तें रखी हैं
- प्रशासन पूरे मामले में अपनी कथित संस्थागत चूकों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करे और उनके लिए माफी मांगे।
- संस्थान में सामने आई प्रशासनिक लापरवाहियों पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
- भविष्य में डॉक्टरों पर इस तरह की त्रासदियों को रोकने के उपायों को लेकर पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए।
- कार्यकारी निदेशक की सीधी जवाबदेही तय करते हुए उनके पद से इस्तीफे की मांग की गई है।
- रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और छात्र संघ को आधिकारिक मान्यता प्रदान की जाए।
- चिकित्सकों, छात्रों के प्रतिनिधियों और अस्पताल प्रबंधन के मध्य नियमित बातचीत की एक स्थायी व्यवस्था स्थापित की जाए।





















