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लंबी दूरी की रेलगाड़ियों में सोने और नकदी पर हाथ साफ करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार शातिर बीकानेर में गिरफ्तारराजस्थान
24 सित॰ 2026, 12:17 am (1 घंटे पहले)· 0

लंबी दूरी की रेलगाड़ियों में सोने और नकदी पर हाथ साफ करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार शातिर बीकानेर में गिरफ्तार

बीकानेर में जीआरपी ने ट्रेनों के वातानुकूलित कोचों में सफर कर रहे यात्रियों को निशाना बनाने वाले हरियाणा के चार बदमाशों को दबोचकर नकदी, आभूषण और बोलेरो गाड़ी बरामद की है।

रेलगाड़ियों के वातानुकूलित डिब्बों में सफर करने वाले मुसाफिरों को झांसा देकर उनके कीमती सामान पर हाथ साफ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह की करतूतों पर बीकानेर में राजकीय रेलवे पुलिस ने शिकंजा कसा है। पुलिस दल ने इस सिलसिले में हरियाणा के रहने वाले चार शातिर चोरों को हिरासत में ले लिया है। इन पकड़े गए आरोपियों के पास से वारदात में चुराए गए सोने व चांदी के जेवर, पांच लाख रुपये की नकदी और घटना को अंजाम देने के दौरान भागने में काम में लाई जाने वाली एक बोलेरो गाड़ी भी बरामद कर ली गई है।

नागपुर से सफर कर रही मां और बेटी बनी थीं शिकार

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब नागपुर से वापसी कर रही एक मां और उनकी बेटी मदुरई बीकानेर एक्सप्रेस के एसी कोच में यात्रा कर रही थीं। सफर समाप्त होने पर जब वे अपने घर पहुंचीं और उन्होंने अपना सामान संभाला, तो उनके होश उड़ गए। उनके बैग के भीतर रखे लगभग 65 से 70 तोला सोने के आभूषण, चांदी के जेवरात और आठ लाख रुपये की नकद रकम पूरी तरह नदारद थी। इस चोरी हुए जेवरात का कुल मूल्य करीब एक करोड़ रुपये आंका गया था। परिवार ने तत्काल बीकानेर जीआरपी थाने का रुख किया और वहां 14 सितंबर को अज्ञात बदमाशों के विरुद्ध औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसी गिरोह द्वारा अणुव्रत एक्सप्रेस में भी महिला यात्रियों के सामान से बड़ी तादाद में जेवर और नकदी पार करने की बात सामने आई थी।

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जांच के लिए विशेष दल का गठन और गिरोह का पर्दाफाश

इस सनसनीखेज वारदात के सामने आने के उपरांत जीआरपी थानाधिकारी नेहा राजपुरोहित ने जांच को तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम ने रेलगाड़ी के आरक्षण चार्ट, तकनीकी साक्ष्यों और पुराने आपराधिक इतिहास को बारीकी से खंगालना शुरू किया। तकनीकी विश्लेषण और लगातार सुराग जुटाने के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को दबोच लिया, जिनकी पहचान वीरेंद्र कुमार उर्फ पिल्ला, सुरेंद्र कुमार, सुनील कुमार और रणवीर के रूप में हुई है। प्राथमिक पूछताछ के दौरान इन अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे छह से सात लोगों की टोली बनाकर रेलगाड़ियों में ऐसी वारदातों को अंजाम देते थे।

स्टेशन आने से पहले घेरकर ध्यान भटकाने का अनूठा तरीका

पूछताछ में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि यह गिरोह लंबी दूरी की रेलगाड़ियों में पूर्व नियोजित तरीके से वारदात करता था। जब भी कोई पड़ाव या रेलवे स्टेशन नजदीक आने वाला होता था और यात्री अपने सामान को लेकर कोच के मुख्य द्वार या गलियारे की ओर बढ़ते थे, तभी गिरोह के सदस्य सहायता करने के बहाने उनके इर्द-गिर्द जमा हो जाते थे। दल के कुछ सदस्य मुसाफिरों से बातचीत कर उनका ध्यान पूरी तरह भटका देते थे, जबकि उसी समय उनके अन्य साथी मास्टर चाबी, पेचकस, ब्लेड अथवा अन्य धारदार औजारों की मदद से यात्रियों के बैग खोलकर जेवरात और नकदी चुरा लेते थे। इसके बाद बदमाश तुरंत अगले स्टेशन पर उतर जाते थे, जहां सड़क मार्ग पर साथ-साथ चल रही उनकी बोलेरो गाड़ी उन्हें लेकर सुरक्षित फरार हो जाती थी। फिलहाल पुलिस इन पकड़े गए चारों आरोपियों से गहन पूछताछ कर उनके अन्य साथियों और पुरानी वारदातों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

सवाल-जवाब

बीकानेर जीआरपी ने किस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है?
जीआरपी ने रेलगाड़ियों में यात्रियों के बैग से सोने-चांदी के जेवरात और नकदी चुराने वाले हरियाणा के अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
पीड़ित मां-बेटी से कितनी नकदी और जेवरात की चोरी हुई थी?
नागपुर से लौट रही मां-बेटी के बैग से लगभग 65 से 70 तोला सोने के आभूषण, चांदी के जेवर और 8 लाख रुपये की नकदी चोरी हुई थी, जिसकी कुल कीमत करीब 1 करोड़ रुपये थी।
पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद किया है?
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषण, 5 लाख रुपये की नकदी और वारदात में इस्तेमाल की गई बोलेरो गाड़ी बरामद की है।
यह गिरोह रेलगाड़ी में यात्रियों को कैसे अपना शिकार बनाता था?
स्टेशन आने से पहले जब यात्री गेट के पास आते थे, तो गिरोह के सदस्य सहायता के बहाने ध्यान भटकाते थे और साथी मास्टर चाबी व औजारों से बैग खोलकर जेवर निकाल लेते थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम क्या हैं?
पकड़े गए चारों आरोपियों के नाम वीरेंद्र कुमार उर्फ पिल्ला, सुरेंद्र कुमार, सुनील कुमार और रणवीर हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·26 मिनट पहले

ट्रेनों में इतनी बड़ी चोरियों के पीछे खराब नीयत और पैसों का लालच है, जो ग्रह-नक्षत्रों के गलत प्रभाव और इंसान की भटकती सोच को साफ दिखाता है। पुलिस ने सही समय पर इन शातिर चोरों को पकड़ लिया है, वरना ये लोग जाने कितने और परिवारों की मेहनत की कमाई पर ऐसे ही हाथ साफ कर देते।

Ravikash Gupta@ravikash·47 मिनट पहले

ट्रेनों में सफर करते वक्त अब सामान पर आंख गड़ाए रखना पड़ता है। पिछले साल जब मैं नागपुर से लौट रहा था, तब मेरा लैपटॉप वाला बैग भी ऐसे ही भीड़भाड़ में गायब हो गया था। पुलिस ने हरियाणा के इन चारों चोरों को पकड़कर अच्छा किया, वरना ये लोग न जाने कितने और मुसाफिरों की गाढ़ी कमाई ऐसे ही लूट लेते।

Arjun Mehta@arjun-mehta·46 मिनट पहले

रविकेश जी, आपकी बात सही है। एसी कोच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रेलवे और जीआरपी को और कड़े कदम उठाने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाएं रुक सकें।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

ट्रेनों में सफर करते वक्त अब सामान पर आंखें रखना और भी जरूरी हो गया है, खासकर एसी कोच में तो बिल्कुल भरोसा नहीं बचा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, वो सात तोला नहीं बल्कि सड़सठ से सत्तर तोला सोना उड़ा ले गए थे! एसी कोच में सफर करना वाकई डरावना हो गया है।

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