राजस्थान के जोधपुर शहर में बुधवार की शाम एक भयावह औद्योगिक दुर्घटना घटी, जब बासनी इलाके में स्थित एक हैंडीक्राफ्ट और केमिकल फैक्ट्री में अचानक भीषण लपटें उठने लगीं। घटना बासनी क्षेत्र की गणेश कॉलोनी की है, जहाँ शाम करीब 5:30 बजे बंद पड़ी फैक्ट्री के भीतर से धुएं का गुबार और आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। रिहायशी आबादी के पास स्थित इस कारखाने में देखते ही देखते स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आग पर काबू पाने की जद्दोजहद के दौरान हुए एक रासायनिक धमाके ने राहत कार्य में जुटे कर्मचारियों को अपनी चपेट में ले लिया।
बंद पड़ी इमारत में रखे रसायनों ने पकड़ी आग
हादसे के समय फैक्ट्री पूरी तरह बंद थी और उसके मुख्य द्वार पर ताला जड़ा हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के अनुसार, हैंडीक्राफ्ट निर्माण से जुड़ी इस इकाई के भीतर भारी मात्रा में अत्यधिक ज्वलनशील केमिकल और थिनर का स्टॉक जमा करके रखा गया था। आग की चिंगारी जैसे ही इन रसायनों तक पहुंची, लपटों ने पलक झपकते ही विकराल रूप धारण कर लिया। बंद कमरे के अंदर रासायनिक पदार्थों से भरे ड्रम अत्यधिक ताप के कारण एक के बाद एक तेज धमाकों के साथ फटने लगे, जिससे आसपास के भवनों में कंपन महसूस हुआ और स्थानीय नागरिकों में भारी दहशत फैल गई।
बिल्डिंग से पत्थर गिरने के बाद हुआ जोरदार विस्फोट
अग्निकांड की खबर मिलते ही अग्निशमन विभाग ने त्वरित कार्रवाई की और 10 दमकल वाहनों के साथ लगभग 35 कर्मियों का तकनीकी दल मौके पर रवाना किया गया। दमकल दल इमारत के विभिन्न हिस्सों से पानी और फोम की बौछारें डालकर लपटों को सीमित करने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान बिल्डिंग की छत का एक भारी पत्थर टूटकर सीधे नीचे रखे केमिकल ड्रम पर आ गिरा। भारी आघात होते ही ड्रम में भीषण रासायनिक विस्फोट हो गया और खौलता हुआ ज्वलनशील तरल तथा आग का गोला चारों ओर बिखर गया। इस अचानक हुए धमाके की सीधी जद में आने से मौके पर मौजूद 14 दमकलकर्मी गंभीर रूप से झुलस गए।
एम्स में बर्न यूनिट न होने से महात्मा गांधी अस्पताल किया गया रेफर
धमाके के तुरंत बाद झुलसे हुए सभी 14 दमकलकर्मियों को आपातकालीन वाहनों से एम्स जोधपुर पहुंचाया गया। एम्स के चिकित्सकों ने सभी घायलों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई, जिसके बाद मामूली रूप से प्रभावित 2 कर्मचारियों को छुट्टी दे दी गई। अस्पताल में अलग से बर्न यूनिट की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण शेष 12 कर्मियों को बेहतर उपचार के लिए महात्मा गांधी अस्पताल स्थानांतरित किया गया। महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती 12 दमकलकर्मियों में से 4 की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई गई है। इन गंभीर मरीजों की गहन निगरानी के लिए चिकित्सकों के एक विशेष दल ने एक अलग आईसीयू वार्ड तैयार कर उपचार शुरू किया है।
प्रशासनिक अमला सक्रिय, अवैध केमिकल भंडारण की जांच तेज
हादसे की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर के जिला कलेक्टर आलोक रंजन तथा पुलिस कमिश्नर अंशुमन भोमिया घायलों की स्थिति जानने तुरंत अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को सर्वोत्तम चिकित्सा प्रबंधन के निर्देश दिए। नगर निगम के चीफ फायर ऑफिसर जलज घसिया और बासनी थाने के थाना अधिकारी नितिन दवे ने घटनास्थल का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस कमिश्नर अंशुमन भोमिया ने स्पष्ट किया कि हैंडीक्राफ्ट फैक्ट्री के परिसर में ज्वलनशील केमिकल और थिनर को बिना उचित अनुमति एवं अवैध तरीके से भंडारित किया जा रहा था। प्रशासनिक टीमें अब इस बात की विस्तृत छानबीन कर रही हैं कि यह फैक्ट्री किसकी मिल्कियत है और वहां यह रासायनिक सामग्री किस स्तर की स्वीकृति के आधार पर रखी गई थी।
























