राजस्थान के दौसा जिले में सदर थाना पुलिस की तत्परता और त्वरित तकनीकी कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। दौसा के एक निजी स्कूल से अचानक गायब हुए 9वीं कक्षा के छात्र को पुलिस टीम ने महज 4 घंटे के भीतर करीब 500 किलोमीटर दूर चलती ट्रेन से सकुशल बरामद कर लिया। छात्र के सुरक्षित मिलने की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची, पिछले कई घंटों से मंडरा रही भारी चिंता खुशी और राहत में बदल गई। ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई और विभिन्न विभागों के बीच शानदार तालमेल की जमकर सराहना की है।
घर से नकदी और मोबाइल लेकर निकला था छात्र
मामले के विवरण के अनुसार, दौसा जिले के भेडोली गांव का रहने वाला 9वीं कक्षा का एक छात्र रोजाना की तरह दौसा स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ाई करने आया था। हालांकि, स्कूल पहुंचने के कुछ ही समय बाद वह बिना किसी को बताए अचानक परिसर से गायब हो गया। जब दोपहर तक छात्र घर वापस नहीं लौटा और परिजनों को उसकी कोई जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद भी जब छात्र का सुराग नहीं लगा, तो घबराए परिजन तुरंत सदर थाना पुलिस पहुंचे और गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए बिना कोई समय गंवाए जांच शुरू कर दी। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई कि छात्र अपने घर से अच्छी-खासी नकदी और एक मोबाइल फोन साथ लेकर निकला था। स्कूल से निकलने के बाद वह सीधे रेलवे स्टेशन की ओर गया और वहां से रानीखेत ट्रेन में सवार होकर आगे की यात्रा पर निकल गया। शुरुआत में परिजनों और पुलिस दोनों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा था कि छात्र आखिर कहां और किस दिशा में जा सकता है।
70 हजार रुपये का नया फोन खरीदा, नया सिम डालते ही खुली लोकेशन
सदर थाना पुलिस ने छात्र की तलाश के लिए साइबर सेल की मदद से मोबाइल नंबर का सर्विलांस शुरू किया और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुट गई। जांच के दौरान पुलिस को एक बेहद महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा। छात्र ने ट्रेन पकड़ने से पहले बाजार में जाकर घर से लाई गई नकदी में से करीब 70 हजार रुपये का एक ब्रांड न्यू स्मार्टफोन खरीदा था। इसके बाद उसने ट्रेन में सफर करते समय अपने मोबाइल में दूसरा सिम कार्ड डाल दिया।
जैसे ही छात्र ने नया सिम कार्ड अपने फोन में डाला और डिवाइस नेटवर्क से कनेक्ट हुआ, मोबाइल टावर ने उसका लाइव लोकेशन सिग्नल जनरेट कर दिया। साइबर टीम ने तुरंत इस लोकेशन को इंटरसेप्ट किया, जिससे पता चला कि छात्र दौसा से काफी दूर रानीखेत ट्रेन के मार्ग पर लगातार यात्रा कर रहा है। लोकेशन मिलते ही दौसा पुलिस अलर्ट मोड में आ गई और ट्रेन की दिशा में अपनी तलाश तेज कर दी।
जीआरपी, आरपीएफ और ट्रेन टीटीई के साथ सटीक समन्वय
मोबाइल लोकेशन से यह स्पष्ट हो चुका था कि छात्र लगभग 500 किलोमीटर दूर जा रही चलती ट्रेन में सफर कर रहा है। समय की नजाकत को देखते हुए दौसा पुलिस ने तुरंत रेलवे प्रशासन से संपर्क साधा। सदर थाना पुलिस ने गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP), रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) और ट्रेन में तैनात ट्रेन टिकट परीक्षक (TTE) से सीधा तालमेल स्थापित किया।
दौसा पुलिस ने छात्र की फोटो, शारीरिक बनावट, कपड़े और मोबाइल लोकेशन की जानकारी तुरंत ट्रेन में मौजूद रेलकर्मियों और जीआरपी जवानों के साथ साझा की। जीआरपी और आरपीएफ की टीमों ने टीटीई के साथ मिलकर चलती ट्रेन के डिब्बों में सघन जांच अभियान शुरू किया। बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय का ही परिणाम था कि रेलवे कर्मियों और पुलिस ने छात्र को चलती ट्रेन के डिब्बे में उसकी सीट पर ढूंढ निकाला और उसे अपनी सुरक्षा में ले लिया। स्कूल से लापता होने की सूचना मिलने के महज 4 घंटे के भीतर 500 किलोमीटर दूर चलती ट्रेन में छात्र को ट्रैक करना पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुआ।
दिनों से हो रहा था बोर, जैसलमेर घूमने के लिए बनाई योजना
छात्र को सुरक्षित ट्रेन से उतारने के बाद जब पुलिस ने उससे बातचीत की और अचानक घर से चले जाने का कारण पूछा, तो उसने बेहद चौंकाने वाली वजह बताई। छात्र ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह पिछले कई दिनों से अपनी दिनचर्या से काफी बोर महसूस कर रहा था। इसी बोरियत को दूर करने और अपना मन बहलाने के लिए उसने अकेले ही किसी दूर स्थान पर घूमने जाने का फैसला किया।
उसने बताया कि उसने प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जैसलमेर घूमने जाने का उद्देश्य बनाया था और इसी योजना के तहत वह घर से नकदी और मोबाइल उठाकर निकला था। उसने रास्ते में 70 हजार रुपये का नया स्मार्टफोन खरीदा ताकि यात्रा के दौरान उसका इस्तेमाल कर सके और फिर जैसलमेर जाने वाली ट्रेन में सवार हो गया। छात्र को इस बात का अंदाजा बिल्कुल नहीं था कि उसके इस कदम से उसके परिवार वाले कितने परेशान और चिंतित हो जाएंगे।
दौसा वापस लाए जाने पर परिजनों ने ली राहत की सांस
सुरक्षा प्रक्रियाओं और आवश्यक कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद दौसा पुलिस की एक टीम छात्र को लेकर वापस दौसा पहुंची। सदर थाने में जब छात्र को उसके माता-पिता और परिजनों के सुपुर्द किया गया, तो वहां का माहौल भावुक हो गया। पिछले कई घंटों से अपने मासूम बेटे की सुरक्षा को लेकर अनगिनत आशंकाओं से घिरे परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
भेडोली गांव के निवासियों और छात्र के परिजनों ने दौसा की सदर थाना पुलिस की कार्यशैली, तत्परता और पेशेवर रुख की मुक्त कंठ से तारीफ की। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस त्वरित कदम न उठाती और जीआरपी, आरपीएफ व टीटीई के साथ समय पर समन्वय न स्थापित करती, तो बच्चा बहुत दूर निकल सकता था। महज 4 घंटे के भीतर 500 किलोमीटर दूर से बच्चे को सुरक्षित बरामद कर वापस लाना राजस्थान पुलिस की सतर्कता और प्रभावी कार्यप्रणाली की एक मिसाल बन गया है।





















