भरतपुर की पहचान अब केवल प्राचीन ऐतिहासिक इमारतों, दुर्गों और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मानव सेवा और समाज कल्याण के क्षेत्र में भी इस शहर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है। बेसहारा, बीमार और निराश्रित लोगों के संरक्षण तथा पुनर्वास के लिए समर्पित स्थानीय संस्था अपना घर आश्रम की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे बड़े बेघर आश्रय स्थल के रूप में आश्रम के नाम दर्ज गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को अब राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी समसामयिक घटनाक्रम एवं सामान्य ज्ञान अध्ययन सामग्री में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है।
करंट अफेयर्स सामग्री में मिली खास जगह
राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए प्रकाशित होने वाली प्रसिद्ध करंट अफेयर्स पत्रिका राजस्थान क्रॉनोलॉजी Vol. 55 में भरतपुर के अपना घर आश्रम की इस वैश्विक उपलब्धि का विवरण प्रकाशित किया गया है। राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली अध्ययन सामग्री में किसी स्थानीय सामाजिक संस्था के कार्यों को स्थान मिलना भरतपुर जिले के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रकाशन के माध्यम से आश्रम द्वारा संचालित निस्वार्थ मानव सेवा अभियानों और उसके दूरगामी प्रभावों की प्रामाणिक जानकारी पूरे राजस्थान के कोने-कोने तक पहुंचेगी।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और आश्रम का सेवा संकल्प
आश्रम प्रबंधन और सचिव के अनुसार, हाल ही में अपना घर आश्रम को महिलाओं के लिए निर्मित दुनिया के सबसे विशाल आश्रय स्थल के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की मान्यता प्रदान की गई थी। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान उन अनगिनत निराश्रित, असहाय और पीड़ित महिलाओं की निरंतर सेवा, सुरक्षा और सम्मानजनक पुनर्वास के प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिन्हें जीवन की अत्यंत कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सड़कों पर जीवन बिताने को मजबूर होना पड़ा था। संस्था का मूल ध्येय केवल जरूरतमंदों को छत और भोजन उपलब्ध कराना भर नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान, मानसिक संबल और एक सुरक्षित जीवन की मुख्यधारा में वापस लाना है।
निराश्रितों की व्यापक देखभाल और परिवार से मिलाने की पहल
भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम वर्षों से लगातार ऐसे असहाय व्यक्तियों के सहारा बनने का कार्य कर रहा है जो पारिवारिक उपेक्षा, गंभीर शारीरिक या मानसिक बीमारियों, अपनों से बिछड़ने या अत्यधिक गरीबी के कारण सड़कों, रेलवे स्टेशनों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर दयनीय अवस्था में पाए जाते हैं। आश्रम में प्रवेश पाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उनकी शारीरिक व मानसिक स्थिति के अनुसार पौष्टिक भोजन, सुरक्षित आवास, विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा इलाज, चौबीसों घंटे देखरेख और मानवीय संवेदनाओं से युक्त सहयोग दिया जाता है। इसके साथ ही संस्था की विशेष टीमें इन व्यक्तियों के परिजनों की खोजबीन कर उन्हें पुनः उनके परिवारों से मिलाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास करती हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा और सामाजिक पहचान
राज्य की समसामयिक अध्ययन सामग्री में इस उपलब्धि के शामिल होने से स्पष्ट होता है कि भरतपुर में संचालित सेवा कार्य अब स्थानीय सीमाओं को लांघकर व्यापक पहचान हासिल कर चुके हैं। यह घटनाक्रम जहां एक ओर आश्रम से जुड़े कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों और सेवाभावी नागरिकों के उत्साह और प्रतिबद्धता को कई गुना बढ़ाता है, वहीं दूसरी ओर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवाओं के समक्ष निस्वार्थ समाज सेवा का एक ज्वलंत और अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। युवाओं को इससे यह जानने का अवसर मिलेगा कि किस प्रकार समर्पण और मानवीय संवेदनाओं के बल पर वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं।





















