घर के आंगन या बालकनी में रखे गमलों में जब अचानक पौधे मुरझाने लगते हैं, तो अक्सर लोग पानी या धूप की कमी को वजह मान लेते हैं। हालांकि कई बार समस्या पौधे के ऊपर नहीं, बल्कि गमले की मिट्टी के भीतर छिपी होती है। मिट्टी में पनपने वाली चींटियां, नन्हे कीड़े और अदृश्य कीट धीरे-धीरे जड़ों को कुतरकर कमजोर कर देते हैं। बाहर से हरा-भरा दिखने वाला पौधा भीतर से अपनी पकड़ खोने लगता है। इस स्थिति से निपटने के लिए बाजार में मिलने वाले जहरीले रासायनिक कीटनाशकों का रुख करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि घर में मौजूद कुछ बेहद साधारण और असरदार प्राकृतिक तरीकों से इन कीटों का खात्मा किया जा सकता है।
नीम का पानी, हल्दी और दालचीनी का सुरक्षा कवच
कीटों को दूर रखने में नीम की पत्तियों का काढ़ा बेहद कारगर साबित होता है। ताजी नीम की पत्तियों को साफ पानी में डालकर 15 से 20 मिनट तक अच्छी तरह उबाल लें। जब यह पानी पूरी तरह ठंडा हो जाए, तो इसे किसी साफ कपड़े या छलनी से छानकर स्प्रे बोतल में भर लें। इस घोल का छिड़काव पौधे के पत्तों के साथ-साथ मिट्टी पर हर 7 से 10 दिन में एक बार हल्का-हल्का करें। यह मिट्टी में पनपने वाले परजीवियों को पनपने नहीं देता है।
इसके साथ ही रसोई में मौजूद मसाले भी पौधों की रक्षा करते हैं। गमले की मिट्टी की ऊपरी सतह पर थोड़ी मात्रा में हल्दी पाउडर छिड़कना चाहिए। मिट्टी में थोड़ी मात्रा में दालचीनी पाउडर भी मिलाया जा सकता है। यह दोनों सामग्रियां मिट्टी में फंगस यानी फफूंद के संक्रमण को खत्म करने के साथ नन्हे कीटों के प्रसार को रोकने में बहुत मददगार साबित होती हैं।
तेज धूप में मिट्टी सुखाना और नीम खली का प्रयोग
अगर गमले की मिट्टी में कीटों का प्रकोप काफी बढ़ चुका है, तो सबसे सुरक्षित तरीका मिट्टी का उपचार करना है। पूरे गमले की मिट्टी को बाहर निकालें और किसी साफ फर्श या तिरपाल पर पतली परत में फैला दें। इस मिट्टी को लगातार 2 से 3 दिन तक तेज धूप में सूखने दें। सूरज की तेज किरणें और गर्मी मिट्टी में गहराई तक छिपे कीड़ों के साथ-साथ उनके अंडों को भी पूरी तरह नष्ट कर देती हैं। इसके बाद मिट्टी को अच्छी तरह छान लें और दोबारा गमले में भरकर नया पौधा लगाने के लिए तैयार कर लें।
मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने और सुरक्षा के लिए प्रति गमला 1 से 2 मुट्ठी नीम खली मिलाना बेहद लाभकारी है। नीम खली से मिट्टी को जरूरी पोषक तत्व प्राप्त होते हैं और साथ ही यह जमीन के भीतर रहने वाले कई हानिकारक कीटों को नियंत्रित रखती है। इसके अलावा 10 से 15 लहसुन की कलियों को पानी के साथ बारीक पीसकर 6 से 7 घंटे के लिए छोड़ दें। इस तैयार अर्क को छानकर पौधों और मिट्टी पर हल्का छिड़काव करने से तीखी गंध के कारण कीट तुरंत दूर भागते हैं।
सरसों खली का घोल और लकड़ी की राख के नियम
पौधों के समुचित विकास और पोषण के लिए सरसों खली का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। सरसों खली को 2 से 3 दिन तक पानी में भिगोकर छोड़ दें, जिससे उसका पोषक तत्वों से भरपूर तरल घोल तैयार हो जाता है। इस घोल को सीमित मात्रा में मिट्टी में डालने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनकी बढ़वार में तेजी आती है।
मिट्टी में थोड़ी मात्रा में साफ लकड़ी की राख भी मिलाई जा सकती है। राख कई तरह के कीटों को मिट्टी से दूर रखने का काम करती है। हालांकि राख का इस्तेमाल करते समय बेहद सावधानी रखनी जरूरी है। लकड़ी की राख अधिक मात्रा में डालने से मिट्टी का पीएच स्तर बढ़ सकता है, जिससे पौधे के स्वास्थ्य पर उल्टा असर पड़ सकता है। इसलिए राख को हमेशा बहुत सीमित और संतुलित मात्रा में ही छिड़कना चाहिए।
लिक्विड साबुन के स्प्रे से सफेद कीड़ों और एफिड्स पर नियंत्रण
पत्तियों और तनों पर हमला करने वाले सफेद कीड़ों और एफिड्स को हटाने के लिए साबुन के पानी का हल्का छिड़काव असरदार होता है। एक लीटर साफ पानी में 1 से 2 चम्मच लिक्विड साबुन अच्छी तरह घोल लें। इस तैयार मिश्रण का छिड़काव पत्तियों की ऊपरी सतह के साथ-साथ उनकी निचली सतह पर भी करें, क्योंकि अधिकांश कीट पत्तों के पिछले हिस्से में ही छिपकर रस चूसते हैं।
छिड़काव करते समय घोल के अनुपात का खास ख्याल रखें। पानी में साबुन की मात्रा कभी भी तय अनुपात से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर साबुन का घोल बहुत गाढ़ा या तेज हो गया, तो पौधों की कोमल पत्तियां झुलस सकती हैं और उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। हल्का और संतुलित छिड़काव ही पौधों को सुरक्षित रखते हुए कीटों से मुक्ति दिलाता है।

















