वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे में क्लीन स्वीप का लक्ष्य, गेंदबाजी में बड़े फेरबदल के संकेतरांची के मोरहाबादी एक्सपो में नवरात्रि की धूम, ₹1500 से शुरू हो रही आकर्षक गरबा चनिया चोली की रेंजबॉक्स ऑफिस पर 57वें दिन भी अडिग रही 'हनुमान अंश', 400 करोड़ पार हुआ वर्ल्डवाइड कलेक्शनपेशाब में जलन और पथरी की समस्या में राहत दे सकता है गोखरू, वैद्य ने बताए उपयोग के जरूरी नियमबॉक्स ऑफिस पर 'द वन' की मजबूत पकड़, नानी की 'द पैराडाइज' की धीमी पड़ी चालराजस्थान में परिवहन ढांचे का कायाकल्प, 35 ड्राइविंग ट्रैक ऑटोमेटेड करने और रोडवेज में 900 नई बसें जोड़ने की तैयारीपीएम सूर्य घर योजना के तहत रांची में विशेष शिविर, रूफटॉप सोलर पर 78 हजार रुपये तक सब्सिडीराजगढ़ में राज्य मंत्री नारायण सिंह पंवार के पैतृक आवास का ताला तोड़ 80000 रुपये नकदी चोरीराजस्थान की अनाज मंडी में जीरे की जोरदार दस्तक, बेहतरीन उपज के दाम 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल के पारब्रश के एक घुमाव से निखरती है लकड़ी और पत्थरों की कारीगरी, जमशेदपुर के राजा पोद्दार ने दर्जनों परिवारों को दिया सहारा
ब्रश के एक घुमाव से निखरती है लकड़ी और पत्थरों की कारीगरी, जमशेदपुर के राजा पोद्दार ने दर्जनों परिवारों को दिया सहाराझारखंड
3 अक्तू॰ 2026, 8:42 am (12 मिनट पहले)· 0

ब्रश के एक घुमाव से निखरती है लकड़ी और पत्थरों की कारीगरी, जमशेदपुर के राजा पोद्दार ने दर्जनों परिवारों को दिया सहारा

जमशेदपुर के कलाकार राजा पोद्दार सिंगल स्ट्रोक पेंटिंग से लकड़ी और चिकने पत्थरों पर सजावटी उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिससे करीब 12 अन्य कारीगरों को भी नियमित आजीविका मिल रही है।

हस्तकला और रचनात्मकता के संगम से न केवल सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा दी जा सकती है, बल्कि आत्मनिर्भरता का मजबूत मंच भी तैयार किया जा सकता है। जमशेदपुर के निवासी राजा पोद्दार ने इसी सोच को हकीकत में तब्दील कर दिखाया है। वे लकड़ी और कुदरती पत्थरों पर ऐसी महीन कारीगरी करते हैं जो पहली ही नजर में मन मोह लेती है। उनके काम की सबसे बड़ी खासियत ब्रश की वह खास तकनीक है, जिसमें बिना दोबारा हाथ घुमाए, एक ही झटके में पूरी आकृति उभरकर सामने आ जाती है।

लकड़ी के दैनिक उपयोग और सजावटी सामान को नया रूप

राजा पोद्दार साधारण लकड़ी के टुकड़ों से घर को सजाने वाले और रोजमर्रा के काम आने वाले कई अनूठे उत्पाद बनाते हैं। उनके संग्रह में पारंपरिक सिंदूर की कंघी, चाय-नाश्ते के लिए सजावटी कप ट्रे और आकर्षक नक्काशीदार वुडन लैंप प्रमुखता से शामिल हैं। इन सभी कृतियों में प्राचीन लोक कला की सादगी और आधुनिक इंटीरियर डिजाइनिंग की जरूरतों का बेहतरीन तालमेल दिखता है। पारंपरिक स्वरूप में नयापन होने के कारण लोग अपने ड्राइंग रूम और लिविंग स्पेस को सजाने के लिए इनके बनाए सामान को काफी पसंद कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें

समुद्र तट के साधारण पत्थरों पर रंगीन आकृतियों का जादू

कारीगरी का यह दायरा सिर्फ लकड़ी के सांचों तक ही सीमित नहीं है। समुद्र किनारे से मिलने वाले गोल और चिकने पत्थरों को भी राजा पोद्दार अपनी कला से एक नया जीवन देते हैं। इन पत्थरों की स्वाभाविक बनावट पर जब ब्रश का एक सधा हुआ स्ट्रोक पड़ता है, तो वे बेहद सुंदर पेपर वेट और टेबल डेकोर के नमूनों में बदल जाते हैं। जिस पत्थर को आम तौर पर लोग अनदेखा कर देते हैं, उस पर प्राकृतिक रंगों और सधे हुए हाथों की कलाकारी उसे एक कीमती कलाकृति का दर्जा दिला देती है।

साधना और अभ्यास से साधी गई सिंगल स्ट्रोक तकनीक

पेंटिंग की दुनिया में सिंगल स्ट्रोक विधा बेहद कठिन मानी जाती है। इसमें ब्रश को बार-बार चलाने या गलतियों को सुधारने की कोई गुंजाइश नहीं होती। एक ही बार में सटीक दबाव और सही कोण के साथ पूरे फूल, पत्ती या डिजाइन को पूरा करना होता है। इसके लिए निरंतर अभ्यास, एकाग्रता और हाथों की गजब की सफाई की दरकार होती है। राजा पोद्दार ने वर्षों के पसीने से इस तकनीक पर महारत हासिल की है और अब वे लगातार नए-नए प्रयोगों के जरिए अपने उत्पादों का दायरा बढ़ा रहे हैं।

सामूहिक आजीविका का जरिया बने करीब 12 कारीगर

इस कला यात्रा का सबसे प्रेरक पहलू यह है कि राजा पोद्दार की सफलता की परिधि केवल उन तक सीमित नहीं है। उनके इस उपक्रम से करीब 12 स्थानीय कारीगर जुड़े हुए हैं, जो नियमित रूप से काम कर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं। राजा का स्पष्ट मानना है कि यदि हम अपनी पुरानी और पारंपरिक विधाओं को आज के बाजार की पसंद और मॉडर्न टच के साथ पेश करें, तो स्थानीय स्तर पर आजीविका के असीमित अवसर पैदा किए जा सकते हैं। मशीनी दौर की आपाधापी के बीच हाथ की यह सधी हुई कारीगरी आज स्वावलंबन की जीवंत मिसाल बन चुकी है।

सवाल-जवाब

राजा पोद्दार कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
राजा पोद्दार एक कुशल कलाकार हैं जो झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले हैं।
राजा पोद्दार किस प्रकार की पेंटिंग विधा के लिए जाने जाते हैं?
वे सिंगल स्ट्रोक पेंटिंग विधा के लिए जाने जाते हैं, जिसमें ब्रश के एक ही फेर में पूरी डिजाइन तैयार हो जाती है।
वे लकड़ी से किस तरह के उत्पाद तैयार करते हैं?
वे लकड़ी से सिंदूर की कंघी, कप ट्रे और वुडन लैंप जैसे पारंपरिक व सजावटी उत्पाद बनाते हैं।
पत्थरों पर पेंटिंग के लिए वे किस तरह के पत्थर इस्तेमाल करते हैं?
वे समुद्र किनारे मिलने वाले चिकने पत्थरों का उपयोग करते हैं और उन्हें सजाकर पेपर वेट आदि डेकोरेटिव आइटम बनाते हैं।
इस कला से कितने परिवारों को आजीविका मिल रही है?
राजा पोद्दार के साथ करीब 12 कारीगर काम करते हैं, जिससे उनके परिवारों को नियमित रोजगार मिल रहा है।
राजा पोद्दार के अनुसार नए रोजगार के अवसर कैसे पैदा किए जा सकते हैं?
उनका मानना है कि यदि पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ा जाए तो रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp