राजस्थान के पश्चिमी अंचल में स्थित नागौर कृषि अनाज मंडी में रबी मौसम की सबसे अहम मसाला नकदी फसल जीरे की नई खेप का आगमन आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो चुका है। फसल के आते ही मंडी यार्ड में लंबे समय से छाई सुस्ती समाप्त हो गई है और चारों ओर कारोबारी हलचल लौट आई है। नागौर जिले के निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ दूरदराज के अंचलों से भी काश्तकार अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों तथा मालवाहक वाहनों में जीरे की बोरियां लादकर लगातार मंडी प्रांगण पहुंच रहे हैं। नीलामी के दौरान उपज के ग्रेड और मानकों के आधार पर बोलियां लगाई जा रही हैं, जिसमें आला दर्जे के जीरे ने 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल का अहम स्तर पार कर लिया है। सीजन के शुरुआती दौर में ही इस तरह का भाव मिलने से कड़ी मेहनत करने वाले अन्नदाताओं के चेहरों पर चमक आ गई है।
मंडी प्रांगण में सुबह से ही बोली प्रक्रिया की रौनक
जीरे की नई खेप मंडी पहुंचते ही किसानों, आढ़तियों और बोलीदाताओं की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। अलसुबह से ही किसान मंडी परिसर में अपनी उपज के बड़े-बड़े ढेर लगाने में जुट जाते हैं। इसके तुरंत बाद स्थानीय व्यापारी और खरीददार मौके पर पहुंचकर फसल के नमूनों का सूक्ष्मता से मुआयना करते हैं। नीलामी के दौरान जीरे के दानों का आकार, उनकी मोटाई, प्राकृतिक रंगत, फसल में कंकड़-पत्थर या कचरे की मौजूदगी और दानों में बची नमी को बारीकी से परखा जाता है। खुले बाजार में जिस ढेर के दानों का आकार बड़ा है, रंग साफ है और नमी का स्तर बिल्कुल न्यूनतम है, उस माल को खरीदने के लिए व्यापारी सबसे ऊंची बोली लगा रहे हैं।
प्रीमियम क्वालिटी जीरे की घरेलू और वैश्विक बाजार में मजबूत पूछ-परख
कृषि मंडी के वरिष्ठ कारोबारियों के अनुसार, मौजूदा समय में राष्ट्रीय स्तर के मसाला बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निर्यात मांग में भी अव्वल दर्जे के जीरे की भारी मांग देखी जा रही है। जो काश्तकार खेत से कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह सुखाकर, छानकर और साफ-सुथरा करके मंडी ला रहे हैं, उन्हें 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल से भी अधिक का भाव बेहद आसानी से प्राप्त हो रहा है। इसके विपरीत जिन ढेरों में नमी अधिक पाई जा रही है या दाने बारीक व अशुद्धियों से युक्त हैं, उनके सौदे अपेक्षाकृत कम दामों पर हो रहे हैं। इसी कारण मंडी के अनुभवी व्यापारियों ने किसानों को सुझाव दिया है कि वे थ्रेशिंग और ग्रेडिंग के आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करें। दानों को धूप में सुखाकर उचित नमी स्तर पर लाने और बेहतर भंडारण अपनाने से उपज की गुणवत्ता निखरती है, जिससे खुले बाजार में अधिकतम दाम मिलना सुनिश्चित हो जाता है।
दैनिक आवक और बाजार रुझान तय करेंगे आगे की दिशा
कृषि बाजार के जानकारों और आढ़तियों का स्पष्ट कहना है कि जीरे जैसी प्रमुख मसाला फसल के बाजार भाव कभी एक स्तर पर टिके नहीं रहते। हर दिन मंडी में आने वाली बोरियों की कुल संख्या, देश के प्रमुख मसाला उपभोग केंद्रों की मांग, निर्यात आर्डरों की रफ्तार और देश के अन्य बड़े व्यापारिक केंद्रों में चल रहे रुख के हिसाब से कीमतों में रोजाना उतार-चढ़ाव दर्ज होता है। जैसे-जैसे कटाई का काम तेज होगा और आने वाले हफ्तों में दैनिक आवक का दबाव बढ़ेगा, बाजार का दीर्घकालिक रुख और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगा। ऐसी स्थिति में बाजार विशेषज्ञों ने किसानों को आगाह किया है कि वे अपना माल वाहन में लादकर मंडी के लिए निकलने से पहले स्थानीय कृषि उपज मंडी समिति अथवा अपने भरोसेमंद आढ़तियों से मौजूदा दरों की सही जानकारी अवश्य जुटा लें, ताकि वे सही समय पर फसल बेचने का नफा-नुकसान देखकर सही फैसला कर सकें।
पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए जीवनरेखा समान नकदी फसल
नागौर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के काश्तकारों के लिए जीरा केवल एक साधारण कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि उनकी आजीविका की मुख्य नकदी फसल है। इस मसाले की बुवाई से लेकर कटाई और थ्रेशिंग तक में किसानों को भारी लागत, निरंतर देखभाल और कई महीनों की कठोर मेहनत झोंकनी पड़ती है। ऐसे में रबी विपणन सत्र के शुरुआती पखवाड़े में ही 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर के दाम मिलना किसानों की जेब और घरेलू अर्थव्यवस्था दोनों के लिए काफी सुखद संकेत माना जा रहा है। नागौर मंडी प्रबंधन का अनुमान है कि जैसे-जैसे मौसम अनुकूल रहेगा, आगामी सप्ताहों में जीरे की दैनिक आवक में भारी उछाल दर्ज होगा, जिससे इस वर्ष मंडी का कुल कारोबार एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।


















