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जयसिंहपुरा के इसरावाला गांव में जैविक खेती की नई मिसाल, किसान शैतान सिंह ऐसे उगा रहे हैं गोभीराजस्थान
16 अक्तू॰ 2026, 11:03 am (1 घंटे पहले)· 0

जयसिंहपुरा के इसरावाला गांव में जैविक खेती की नई मिसाल, किसान शैतान सिंह ऐसे उगा रहे हैं गोभी

जयपुर ग्रामीण के इसरावाला गांव के प्रगतिशील किसान शैतान सिंह जैविक तरीके से पत्ता गोभी और अन्य सब्जियां उगाकर खेती की लागत घटा रहे हैं और बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।

राजस्थान के जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के इसरावाला गांव में कृषि के क्षेत्र में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। यहां के किसान अब तेजी से रासायनिक खेती को छोड़कर जैविक खेती की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। इस बदलाव की अगुवाई करने वाले प्रगतिशील किसानों में शैतान सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वे पिछले कई वर्षों से अपने खेतों में जैविक पद्धति से पत्ता गोभी की बंपर पैदावार ले रहे हैं। पत्ता गोभी के अलावा उनके खेतों में फूलगोभी, ब्रोकली, तोरी और मौसम के अनुकूल अन्य तमाम सब्जियां भी उगाई जाती हैं। उनका साफ तौर पर यह मानना है कि जैविक खेती अपनाने से कीटनाशकों और रासायनिक खादों पर होने वाले भारी-भरकम खर्च से बड़ी राहत मिलती है। इससे न केवल खेती की कुल लागत में कमी आती है, बल्कि किसानों को अपनी फसल का बेहतर मुनाफा कमाने का भी पूरा अवसर मिलता है।

विविध फसलों का चयन और मौसम के अनुसार खेती

किसान शैतान सिंह ने बताया कि वे लंबे समय से जैविक सब्जियों की खेती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीन पर मौसम तथा मिट्टी की तासीर के हिसाब से ही फसलों का चयन करते हैं। उनके खेतों में पत्ता गोभी के अलावा फूलगोभी, ब्रोकली, तोरी और दूसरी मौसमी सब्जियां भी उगाई जाती हैं। अलग-अलग मौसम के अनुसार सब्जियां उगाने से उन्हें सालभर खेती से जुड़े रहने का मौका मिलता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जैविक खेती में फसलों की सही देखभाल करना, मिट्टी की उपजाऊ गुणवत्ता को बनाए रखना और सिंचाई का विशेष प्रबंधन करना बहुत जरूरी होता है। सही समय पर कृषि कार्य पूरा करने और फसल की मांग के अनुसार पोषण देने से उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार होता है। उनका यह भी मानना है कि खेती में आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ अपने पारंपरिक अनुभवों का मेल करके बहुत ही शानदार परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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सैकड़ों एकड़ जमीन पर पत्ता गोभी की बंपर पैदावार

इसरावाला गांव और उसके आसपास के इलाकों में पत्ता गोभी की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। यहां के सैकड़ों एकड़ खेतों में किसान इसकी फसल उगा रहे हैं, जो अब स्थानीय किसानों की आजीविका और आमदनी का एक बहुत बड़ा साधन बनती जा रही है। सब्जियों की इस व्यापक खेती से किसानों को अपनी उपजाऊ जमीन और उपलब्ध जल संसाधनों का सही इस्तेमाल करने का बेहतरीन मौका मिल रहा है। पत्ता गोभी की बंपर पैदावार हासिल करने के लिए खेत की सही ढंग से जुताई और तैयारी, पौधों के बीच में एक निश्चित दूरी बनाए रखना, समय-समय पर सिंचाई करना और फसल की लगातार निगरानी रखना बेहद जरूरी है। यदि फसल में किसी भी प्रकार के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई दे, तो समय रहते उसका उचित उपचार करना आवश्यक होता है, जिससे फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सके।

उत्पादन लागत घटाने और गुणवत्ता सुधार पर जोर

किसान शैतान सिंह का कहना है कि आज के समय में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती खेती की लागत को नियंत्रित करना और उत्पाद की गुणवत्ता को बरकरार रखना है। जैविक खेती में गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद और अन्य प्रमाणित जैविक उपायों का सही तरीके से प्रयोग करके मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। इसके साथ ही जैविक खेती में भी पौधों की जरूरत के मुताबिक पोषण प्रबंधन और कीटों से सुरक्षा का ध्यान रखना अनिवार्य है। उन्होंने सलाह दी है कि यदि किसान भाई अपने खेत की मिट्टी की जांच, स्थानीय मौसम और पानी की उपलब्धता को अच्छी तरह समझकर खेती की रूपरेखा तैयार करें, तो उन्हें काफी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इसके अलावा किसी भी सब्जी की खेती में उतरने से पहले बाजार की वास्तविक मांग और उसकी बिक्री की संभावनाओं का आकलन करना भी बेहद आवश्यक होता है।

क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत

इसरावाला गांव में जैविक सब्जियों की खेती का यह पूरा मॉडल आसपास के तमाम किसानों के लिए एक बहुत ही उपयोगी और अनुकरणीय उदाहरण बन गया है। किसान अपनी भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार इन जैविक तौर-तरीकों को अपनाकर अपनी खेती की लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं और अपनी जमीन की उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रख सकते हैं। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक ठोस कृषि योजना, समय पर फसल का उचित प्रबंधन और बाजार की सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

सवाल-जवाब

शैतान सिंह किस गांव के रहने वाले हैं?
शैतान सिंह जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के इसरावाला गांव के रहने वाले हैं।
वे मुख्य रूप से किन फसलों की खेती करते हैं?
वे मुख्य रूप से पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, तोरी और अन्य मौसमी सब्जियां उगाते हैं।
जैविक खेती से क्या मुख्य फायदा होता है?
जैविक खेती से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होता है और बेहतर मुनाफा मिलता है।
फसल की अच्छी पैदावार के लिए क्या जरूरी है?
खेत की सही तैयारी, पौधों के बीच उचित दूरी, समय पर सिंचाई और नियमित निगरानी जरूरी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 मिनट पहले

रासायनिक खादों से मुक्ति और लागत कम करने का ऐसा तरीका वाकई काबिल-ए-तारीफ़ है। शैतान सिंह ने साबित कर दिया कि थोड़ी मेहनत से खेती को भी मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·6 मिनट पहले

अर्जुन जी, सही कहा आपने! पत्та गोभी और ब्रोकली जैसी फसलें उगाकर लागत घटाने का शैतान सिंह का आइडिया कमाल का है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 मिनट पहले

शैतान सिंह जैसे किसान वाकई कमाल कर रहे हैं, बिना ज़हर के इतनी बढ़िया गोभी उगाना आसान नहीं होता।

Rohan Verma@rohan-verma·30 मिनट पहले

करण भाई, एकदम सही कहा आपने। पर क्या शैतान सिंह जैसे किसान बाज़ार में अपनी इस जैविक गोभी का सही दाम भी पा रहे हैं या बिचौलिए खा जाते हैं?

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