राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश जन्मोत्सव के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली। रविवार शाम को आयोजित विशेष सिंजारा पूजा के दौरान भगवान गणेश को अर्पित की गई प्रसादी मेहंदी प्राप्त करने के लिए हजारों की संख्या में भक्त मंदिर प्रांगण पहुंचे। घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने वालों में बड़ी तादाद में अविवाहित युवक और युवतियां भी शामिल थीं, जो इस विशेष प्रसाद को पाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
200 साल पुरानी परंपरा और 3500 किलो मेहंदी
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारे के दिन भगवान गणेश को मेहंदी चढ़ाने और तत्पश्चात उसे भक्तों के बीच प्रसादी के रूप में बांटने की यह पावन परंपरा लगभग 200 वर्ष पुरानी मानी जाती है। मंदिर के जानकारों के अनुसार, लगभग 70 वर्ष पूर्व इस परंपरा की शुरुआत केवल सवा किलो मेहंदी अर्पित करने के साथ हुई थी। बीते दशकों में श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा के चलते यह आयोजन विशाल रूप धारण कर चुका है।
इस वर्ष गणेश चतुर्थी उत्सव के लिए जयपुर और सोजत से विशेष रूप से लगभग 3500 किलोग्राम शुद्ध मेहंदी मंगवाई गई थी। विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद इस संपूर्ण मेहंदी को अभिमंत्रित कर मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
मनोकामना से जुड़ी मान्यता और ढूंढाड़ की लोक परंपरा
मोतीडूंगरी मंदिर का यह आयोजन विवाह संबंधी धार्मिक मान्यताओं के लिए बेहद प्रसिद्ध है। जनमानस में यह दृढ़ विश्वास है कि सिंजारे के शुभ दिन प्रथम पूज्य श्री गणेश के दर्शन करने और उनकी अभिमंत्रित प्रसादी मेहंदी प्राप्त करने से शीघ्र विवाह की मनोकामना पूर्ण होती है। इसी आस्था के वशीभूत होकर न केवल जयपुर, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों एवं शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विशेष प्रसाद को हासिल करने पहुंचे थे।
स्थानीय ढूंढाड़ क्षेत्र की लोक संस्कृति में इस पर्व को डंका चौथ के नाम से जाना जाता है। इस पारंपरिक रिवाज के तहत ननिहाल पक्ष से लड़के के लिए नए वस्त्र, तरह-तरह के मिष्ठान और मेहंदी भेजने की पुरानी परंपरा रही है। गणेश जन्मोत्सव के अवसर पर इसी सांस्कृतिक परंपरा का निर्वहन करते हुए सिंजारा पूजा का आयोजन गरिमामय ढंग से किया जाता है।
भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और ऑनलाइन प्रसादी
श्रद्धालुओं की संभावित आवक को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा मेहंदी वितरण के लिए पांच विशेष निकासी द्वार बनाए गए थे। हालांकि, आयोजन के दौरान उम्मीद से कहीं अधिक जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे मंदिर परिसर और उसके आसपास की सड़कों पर भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने रविवार शाम से लेकर देर रात तक मोर्चा संभाला और भीड़ को संभाला।
अत्यधिक भीड़ के चलते परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई जा रही थी। घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नेटिजन्स द्वारा मंदिर परिसर की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक चर्चा की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि मंदिर प्रबंधन ने दूर-दराज के भक्तों की सुविधा के लिए इस बार कूरियर सेवा के जरिए अभिमंत्रित मेहंदी और भगवान को चढ़ाया गया मोदक प्रसाद ऑनलाइन घर भेजने का नया इंतजाम भी किया था। इसके बावजूद भौतिक रूप से मंदिर पहुंचकर प्रसाद प्राप्त करने वाले श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई।

















