जयपुर में पहचान छिपाकर रहने का एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने एक ऐसी बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है, जो पिछले कई सालों से अपनी असली राष्ट्रीयता पूरी तरह छिपाकर एक आम भारतीय बहू की जिंदगी बिता रही थी। इस महिला ने समाज की पैनी नजरों से बचने के लिए सिंदूर और मंगलसूत्र जैसे पारंपरिक प्रतीकों को पूरी तरह अपना लिया था। वह स्थानीय लोगों के बीच इस तरह सहजता से घुलमिल गई थी कि आस-पड़ोस के किसी भी व्यक्ति को उस पर जरा सा भी संदेह नहीं हुआ। हालांकि, पुलिस की एक गुप्त और गहन जांच ने अंततः उसके सारे राज खोल दिए। इस बड़ी सुरक्षा कार्रवाई के तहत पुलिस ने अवैध रूप से शहर में रह रहे दो अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को भी धर दबोचा है।
जयपुर के अलग-अलग इलाकों में पुलिस की संयुक्त छापेमारी
यह पूरी कार्रवाई पुलिस की एक बेहद सुनियोजित और संयुक्त योजना का अहम हिस्सा थी। डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने जानकारी दी कि नारायण विहार, मानसरोवर और सांगानेर सदर थानों की विशेष टीमों ने मिलकर शहर के तीन अलग-अलग स्थानों पर अचानक दबिश दी। इस सटीक छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी रुबिया को नारायण विहार इलाके के एक मकान से गिरफ्तार किया गया। वहीं, पुलिस ने दूसरे आरोपी नदीम को मानसरोवर क्षेत्र से पकड़ा, जबकि तीसरे व्यक्ति आशीष हलधर को सांगानेर सदर थाना इलाके की सीमा से हिरासत में लेने में कामयाबी हासिल की।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ में यह महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि इन तीनों ने भारत की सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने के लिए बिल्कुल अलग-अलग बहाने बनाए थे। पकड़े गए दोनों युवक कथित तौर पर रोजगार की तलाश का बहाना बनाकर सीमा पार करके भारत आए थे। दूसरी ओर, रुबिया ने जांचकर्ताओं के सामने दावा किया कि वह बीमारी का इलाज कराने के मकसद से भारत में दाखिल हुई थी। भारत आने के बाद ये तीनों जयपुर शहर के अलग-अलग हिस्सों में अपना सुरक्षित ठिकाना बनाकर रह रहे थे और लंबे समय तक किसी की नजर में नहीं आए।
जोधपुर का सफर और सोची-समझी कोर्ट मैरिज
पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, रुबिया की जिंदगी की कहानी में कई नए और चौंकाने वाले मोड़ सामने आए। पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि वह अपने कथित इलाज के सिलसिले में जोधपुर भी गई थी। उसी यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात नागौर जिले के मेड़ता इलाके के रहने वाले मनमोहन नामक एक व्यक्ति से हुई। धीरे-धीरे उन दोनों की जान-पहचान काफी बढ़ गई और यह रिश्ता अंततः एक औपचारिक कोर्ट मैरिज तक पहुंच गया। कानूनी रूप से शादी संपन्न होने के बाद रुबिया पूरी तरह से एक समर्पित भारतीय गृहणी के रूप में ढल गई।
विवाह के बाद उसने हर दिन अपनी मांग में सिंदूर भरना और गले में मंगलसूत्र पहनना शुरू कर दिया। इस पारंपरिक वेशभूषा ने उसे एक ऐसा मजबूत आवरण दिया कि आस-पड़ोस के लोगों को कभी उसकी नागरिकता या उसके अतीत पर शक करने का कोई मौका ही नहीं मिला। फिलहाल जांच अधिकारी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या यह विवाह वास्तव में एक सामान्य रिश्ता था, या फिर इसे केवल एक वैध भारतीय पहचान प्राप्त करने के मकसद से रचा गया था। इसके साथ ही, पुलिस मनमोहन से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि क्या उसे शादी से पहले रुबिया के असली बांग्लादेशी होने की सच्चाई मालूम थी।
संदिग्ध पासपोर्ट की बरामदगी और पैसों का अवैध लेन-देन
यह गंभीर मामला अब केवल अवैध रूप से सीमा पार करने तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। पुलिस अधिकारियों ने जब रुबिया के ठिकानों की बारीकी से तलाशी ली, तो उन्हें वहां से एक बेहद संदिग्ध पासपोर्ट बरामद हुआ। इस अहम दस्तावेज के मिलने से फर्जी कागज तैयार करने वाले किसी बड़े गिरोह के सक्रिय होने की आशंका पैदा हो गई है। पुलिस ने तुरंत संबंधित विभागों को पत्र लिखकर यह जानकारी मांगी है कि यह पासपोर्ट आखिर कब, कहां से और किन कागजातों के आधार पर बनवाया गया।
इसके अतिरिक्त, जांच एजेंसियां इस बात की भी बहुत बारीकी से जांच कर रही हैं कि कहीं इस आरोपी महिला ने किसी और फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल तो नहीं किया है। मामले को और अधिक गंभीर बनाते हुए, रुबिया पर यह भी आरोप है कि उसने इन जाली भारतीय दस्तावेजों का सहारा लेकर बांग्लादेश में पैसे भी भेजे हैं। इस वित्तीय लेन-देन की सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस अब गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों के बैंक खातों, पुराने संपर्कों और मोबाइल फोन के विस्तृत विवरणों को बारीकी से खंगाल रही है।
खुफिया एजेंसियों की एंट्री और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की तलाश
मामले की बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए अब राज्य की खुफिया एजेंसियां भी इस जांच से जुड़ी जानकारी जुटाने में लग गई हैं। पूछताछ के दौरान रुबिया ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए अहमदाबाद भी जा चुकी है। इस नए बयान के बाद पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह देश के किन-किन शहरों में रुकी और इस पूरी अवधि के दौरान वह किन-किन लोगों के संपर्क में आई।
इस पूरी जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इनके पीछे कोई बहुत बड़ा नेटवर्क सक्रिय रूप से काम कर रहा है या नहीं। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि दस्तावेजों की जांच और आरोपियों से चल रही निरंतर पूछताछ पूरी होने के बाद ही यह तस्वीर साफ हो पाएगी कि उन्होंने ठीक किस तारीख को भारत में कदम रखा था और कितने समय से यहां रह रहे थे। फिलहाल तीनों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके।



















