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राजस्थान के सीकर में 24 करोड़ रुपये की लागत से 12 गांवों में बनेंगी आधुनिक सीसी सड़केंराजस्थान
16 अग॰ 2026, 7:39 pm (1 घंटे पहले)· 2

राजस्थान के सीकर में 24 करोड़ रुपये की लागत से 12 गांवों में बनेंगी आधुनिक सीसी सड़कें

सार्वजनिक निर्माण विभाग ने सीकर जिले की 12 ग्रामीण सड़कों के लिए 24 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। अटल प्रगति पथ योजना के तहत 16.2 किलोमीटर लंबी ढलवां कंक्रीट सड़कों के साथ पक्की नालियां बनाई जाएंगी।

सीकर जिले के ग्रामीण अंचलों में यातायात ढांचे को मजबूत करने और जलभराव की पुरानी समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से एक बड़ा ढांचागत अभियान शुरू होने जा रहा है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने अटल प्रगति पथ योजना के अंतर्गत जिले की 12 प्रमुख ग्रामीण सड़कों के निर्माण प्रस्ताव को अपनी प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी प्रदान कर दी है। इस विस्तृत परियोजना पर कुल 24 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी, जिसके जरिए कुल 16.2 किलोमीटर लंबी ढलवां सड़कों का संजाल तैयार होगा। यह पहल केवल गाड़ियां दौड़ाने के लिए रास्ता तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ ही गांवों की गलियों और मुख्य रास्तों पर जल निकासी का टिकाऊ समाधान भी विकसित किया जाएगा।

अटल प्रगति पथ योजना का स्वरूप और तकनीकी मानक

इस निर्माण कार्य के तहत प्रत्येक सड़क की लागत के लिए अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक का बजट तय किया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी सड़कों को सीमेंट कंक्रीट की मदद से निर्मित किया जाएगा, जिनकी मानक चौड़ाई 7 मीटर होगी। निर्माण कार्य का सबसे अहम पहलू यह है कि कंक्रीट की सड़क ढालने के साथ ही दोनों किनारों पर मजबूत पक्की नालियों का निर्माण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इससे मानसूनी वर्षा के दौरान पानी रास्तों पर जमा होने के बजाय नालियों के जरिए आगे निकल जाएगा। जल निकासी की यह व्यवस्था न केवल ग्रामीणों की आवाजाही सुगम बनाएगी, बल्कि सड़क की उम्र और मजबूती को भी कई सालों तक बनाए रखेगी।

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राज्यस्तरीय बजट घोषणा और सीकर का आवंटन

राजस्थान सरकार ने अपने बजट भाषण में 5 हजार से अधिक आबादी वाले बड़े गांवों की ढांचागत स्थिति सुधारने के लिए अटल प्रगति पथ योजना शुरू करने का संकल्प व्यक्त किया था। उसी नीति के क्रियान्वयन के क्रम में पूरे प्रदेश में 192 ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 381.91 करोड़ रुपये की कुल राशि मंजूर की जा चुकी है। इसी प्रांतीय योजना का लाभ सीकर जिले को मिला है, जहां 12 गांवों को इस चरण में शामिल किया गया है। प्रशासनिक विभाजन के अनुसार नीमकाथाना क्षेत्र के 6 गांवों को इसमें जगह मिली है, जबकि दांतारामगढ़ क्षेत्र के 4 गांव योजना से जुड़ेंगे। इसके अतिरिक्त श्रीमाधोपुर और लक्ष्मणगढ़ क्षेत्रों से 1-1 गांव का चयन किया गया है।

नीमकाथाना और आसपास के गांवों में प्रस्तावित निर्माण

स्वीकृत प्रस्तावों में नीमकाथाना और उसके नजदीकी इलाकों को परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। आंकड़ों के मुताबिक थोई गांव में 1.50 किलोमीटर लंबा मार्ग तैयार होगा, वहीं रैवासा में फकीरपुरा कॉलोनी वाले रास्ते पर 1.10 किलोमीटर लंबी कंक्रीट सड़क बनाई जाएगी। इसके अलावा बाय गांव में 1.10 किलोमीटर, मंडा गांव में 1.30 किलोमीटर तथा कोछोर गांव में 1.20 किलोमीटर मार्ग के निर्माण की स्वीकृति मिली है। इन सभी निर्माण कार्यों के पूरा होने से क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा।

अन्य तहसीलों के चयनित गांव और सड़क की लंबाई

सीकर के अन्य ग्रामीण इलाकों की बात करें तो गुहाला गांव में 1.50 किलोमीटर, जीलो में 1.40 किलोमीटर और चला में 1.30 किलोमीटर लंबे अटल प्रगति पथ का निर्माण प्रस्तावित है। इसके साथ ही गांवड़ी, गणेश्वर और रायपुर पाटन में भी 1.50-1.50 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। लक्ष्मणगढ़ उपखंड के बठोठ गांव में 1.30 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण होगा। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार सभी स्वीकृत कार्यों में गुणवत्ता के तय पैमानों, कंक्रीट मोटाई और जलनिकासी चैनल के मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा।

स्ट्रीट लाइट और स्थानीय पंचायत की जिम्मेदारी

इस योजना में गांवों को आधुनिक बनाने के लिए एक और विशेष प्रावधान जोड़ा गया है। जरूरत महसूस होने पर इन सभी निर्मित मार्गों पर स्ट्रीट लाइट की सुविधा दी जा सकेगी। हालांकि, इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत को आगे आकर एक औपचारिक सहमति पत्र देना होगा। पंचायत को यह जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी कि वह इन बत्तियों के बिजली बिलों का भुगतान करेगी और समय-समय पर उनके रखरखाव का जिम्मा उठाएगी। कमजोर कनेक्टिविटी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में इन सड़कों के बनने से निकटवर्ती कस्बों, कृषि मंडियों और शहर के केंद्रों तक लोगों का पहुंचना बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगा। शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर धरातल पर काम शुरू किया जाएगा।

सवाल-जवाब

सीकर जिले में अटल प्रगति पथ योजना के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है?
सीकर जिले के 12 गांवों में सड़कों के निर्माण के लिए लगभग 24 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दी गई है।
इन 12 सड़कों की कुल लंबाई और चौड़ाई कितनी होगी?
इन सभी 12 सड़कों की संयुक्त लंबाई 16.2 किलोमीटर होगी और प्रत्येक सड़क को 7 मीटर चौड़ी सीमेंट कंक्रीट की संरचना के रूप में बनाया जाएगा।
अटल प्रगति पथ योजना के तहत जल निकासी के लिए क्या विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं?
सड़क निर्माण के साथ ही दोनों ओर पक्की नालियां बनाई जाएंगी ताकि बारिश का पानी सड़क पर न जमा हो और सड़क टिकाऊ बनी रहे।
किस क्षेत्र के गांवों को इस परियोजना में सबसे अधिक सड़कें मिली हैं?
नीमकाथाना क्षेत्र को योजना में सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जहां कुल 6 सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई है।
सड़क पर स्ट्रीट लाइट लगाने की क्या शर्त रखी गई है?
स्ट्रीट लाइट लगाने की सुविधा उपलब्ध है, बशर्ते संबंधित ग्राम पंचायत बिजली के बिल और रखरखाव का खर्च उठाने के लिए अपनी सहमति दे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 मिनट पहले

भले ही यह खबर बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी है, लेकिन अपराध और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से इस तरह के बड़े बजट वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। 24 करोड़ रुपये की इस परियोजना और विशेष रूप से नीमकाथाना व दांतारामगढ़ जैसे क्षेत्रों में होने वाले 16.2 किलोमीटर के निर्माण कार्यों में यदि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार की कोई शिकायत आती है, तो स्थानीय प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आगे चलकर इन विकास कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच यह सुनिश्चित करेगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही मायनों में धरातल पर उतरे और आपराधिक तत्वों द्वारा ठेकों में किसी प्रकार की अवैध दखलअंदाजी न हो।

Rohan Verma@rohan-verma·30 मिनट पहले

नीमकाथाना और दांतारामगढ़ जैसे बड़े ग्रामीण क्षेत्रों में 24 करोड़ रुपये के इस ढांचागत निवेश पर प्रशासनिक निगरानी बेहद अहम होगी। अटल प्रगति पथ योजना के तहत बनने वाली इन 16.2 किलोमीटर कंक्रीट सड़कों और नालियों में यदि ठेका प्रणाली या क्रियान्वयन स्तर पर पारदर्शिता बरती जाए, तो यह स्थानीय संपर्क व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकती है। हालांकि, पूर्व के अनुभवों को देखते हुए यह आवश्यक है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और तय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग हो सके और ग्रामीण अंचलों में भ्रष्टाचार की गुंजाइश न बचे।

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