एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात मादक पदार्थ तस्कर पप्पूलाल को धर दबोचा है। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए आरोपी तमाम हथकंडे अपना रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने मोबाइल फोन का उपयोग करना तक बंद कर दिया था। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों का खुफिया तंत्र उस तक पहुंच गया और उसे उदयपुर के प्रसिद्ध सेलिब्रेशन मॉल से उस समय गिरफ्तार कर लिया गया जब वह पूरी बेफिक्री के साथ खरीदारी में व्यस्त था।
शास्त्री नगर से मॉल तक ऐसे बिछाया गया जाल
कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को पुख्ता सूचना मिली कि वांछित अपराधी पप्पूलाल उदयपुर में मौजूद है। इस इनपुट के आधार पर टीम तुरंत शास्त्री नगर सेक्टर-3 के लिए रवाना हुई, लेकिन तब तक आरोपी वहां से निकल चुका था। हालांकि, टीम ने हार नहीं मानी और उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखी। इसी दौरान खुफिया माध्यमों से पता चला कि आरोपी सेलिब्रेशन मॉल के अंदर खरीदारी कर रहा है। बिना समय गंवाए टीम ने मौके पर पहुंचकर मॉल को चारों तरफ से घेर लिया और शातिर अपराधी को दबोच लिया।
अपराध जगत में पुराना इतिहास और 16 गंभीर मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यह अपराधी पहली बार साल 2018 में सिगोली थाना क्षेत्र में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में पकड़ा गया था और करीब एक साल तक सलाखों के पीछे रहा था। जेल से रिहा होने के बाद उसने अपनी पुरानी हरकतों से बाज न आते हुए फिर से अवैध नशे का कारोबार शुरू कर दिया। साल 2021 में चित्तौड़गढ़ के बेगूं थाना क्षेत्र में डोडा-चूरा तस्करी का एक और मामला दर्ज होने के बाद से ही वह पुलिस की गिरफ्त से दूर चल रहा था। अधिकारियों के अनुसार, इस तस्कर के खिलाफ राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न थानों में एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, मारपीट और पुलिस पर फायरिंग जैसे संगीन अपराधों के 16 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
मोबाइल से दूरी और बसों से सफर की अनोखी चाल
कानून के शिकंजे से बचने के लिए इस शातिर अपराधी ने अपनी जीवनशैली पूरी तरह बदल ली थी। वह किसी भी सूरत में मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। वह कभी भी एक जगह पर ज्यादा दिन नहीं ठहरता था और शहर आने-जाने के लिए सार्वजनिक बसों का सहारा लेता था। इस हाई-टेक युग में बिना फोन के रहना और लगातार ठिकाने बदलना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती जरूर बन गया था, लेकिन एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के मजबूत सूचना तंत्र ने आखिरकार उसकी इस लुकाछिपी को खत्म कर दिया।



















