राजस्थान के नागौर जिले में खींवसर थाना पुलिस ने एक ऐसे संगठित और शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो अपनी चोरी की वारदातों के लिए बेहद अनोखा और शातिर तरीका अपनाता था। पुलिस ने इस गिरोह के पांच सदस्यों को धर दबोचने में सफलता हासिल की है और उनके कब्जे से एक 18 चक्का ट्रेलर भी जब्त किया गया है। प्रारंभिक पूछताछ और तफ्तीश से यह बात सामने आई है कि आरोपी किसी छोटे वाहन के बजाय इस भारी-भरकम ट्रेलर का इस्तेमाल करके चोरी के ठिकानों पर पहुंचते थे। बड़े वाहन के होने के कारण आम लोगों या सुरक्षा एजेंसियों को उन पर कभी शक नहीं होता था और वे आसानी से वारदात को अंजाम देकर चोरी का पूरा माल इसी वाहन में लादकर फरार हो जाते थे।
सात दिन और 650 किलोमीटर का लंबा पीछा
नागौर के पुलिस अधीक्षक के स्पष्ट निर्देशों के बाद स्थानीय पुलिस ने इस गिरोह की गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी थी। जैसे ही आरोपियों के बारे में सुराग मिला, पुलिस की एक विशेष टीम ने उनका पीछा करना शुरू किया। यह कोई सामान्य पीछा नहीं था, बल्कि पुलिस ने लगातार सात दिनों तक करीब 650 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हुए इस अंतरराज्यीय गिरोह का पीछा किया और आखिरकार इन्हें दबोच लिया। इस लंबी और जोखिम भरी कार्रवाई के बाद पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा 18 चक्का ट्रेलर भी अपने कब्जे में ले लिया। इस कार्रवाई के साथ ही संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस का यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नागौर जिले में एक दर्जन मामलों का खुलासा
पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने अकेले नागौर जिले में ही चोरी और नकबजनी की 12 बड़ी वारदातों को अंजाम दिया था। इन एक दर्जन घटनाओं में लगभग दो करोड़ रुपए के माल-मशरूका और अन्य सामान की चोरी होने की पुष्टि हुई है। पुलिस अब इन गिरफ्तार आरोपियों से लगातार गहन पूछताछ कर रही है ताकि अन्य अनसुलझे मामलों के बारे में भी पुख्ता जानकारी जुटाई जा सके और लूटे गए सामान का पता लगाया जा सके।
राजस्थान से मध्य प्रदेश तक फैला था नेटवर्क
पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इस गिरोह के आपराधिक साम्राज्य का दायरा भी सामने आने लगा। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि यह गिरोह न केवल राजस्थान बल्कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी पूरी तरह सक्रिय था। मध्य प्रदेश के विभिन्न इलाकों में इस गिरोह ने 100 से अधिक चोरी और नकबजनी की वारदातों को अंजाम दिया था। राजस्थान के भीतर नागौर को इस गिरोह ने अपना मुख्य केंद्र बना रखा था और यहीं से अपने काले कारनामों को संचालित करते थे। नागौर के अलावा जोधपुर, बाड़मेर, फलोदी, डीडवाना-कुचामन, बीकानेर और जयपुर जैसे आसपास के तमाम जिलों में भी इस गिरोह द्वारा वारदातों को अंजाम दिए जाने की बात सामने आई है।
ट्रेलर की आड़ में चलता था चोरी का खेल
इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था जो आम तौर पर लोगों की नजरों से बच जाता था। आरोपी चोरी की वारदातों को अंजाम देने के लिए 18 चक्का ट्रेलर का इस्तेमाल करते थे। सड़क पर इतने बड़े वाहन को चलते देख किसी के भी मन में यह संदेह पैदा नहीं होता था कि इसमें चोर सवार हैं। जब ये लोग किसी इलाके में चोरी करने पहुंचते थे, तो स्थानीय लोग और पुलिस इसे एक सामान्य मालवाहक वाहन ही समझते थे। वारदात को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद आरोपी चुराया हुआ सारा सामान इसी ट्रेलर में लोड करते थे और आसानी से वहां से निकल भागते थे। इसी वाहन के जरिए वे एक राज्य से दूसरे राज्य और एक जिले से दूसरे जिले तक सफर करते थे।
करोड़ों के जेवरात और नकदी पर हाथ साफ
पुलिस के अनुसार यह संगठित गिरोह पिछले करीब दो साल से लगातार चोरी और नकबजनी की वारदातों में सक्रिय रूप से संलिप्त था। इस दो साल की अवधि के दौरान आरोपियों ने 10 करोड़ रुपए से अधिक के सोने-चांदी के जेवरात और नगदी पर हाथ साफ किया है। हालांकि, पुलिस अभी भी आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया में जुटी हुई है और चोरी की कुल वास्तविक रकम तथा अन्य संदिग्ध वारदातों की पुष्टि की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे पूछताछ का दायरा और आगे बढ़ेगा, देश के अन्य राज्यों और जिलों में की गई कई और वारदातों का पर्दाफाश होने की पूरी संभावना है।




















