महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई के कोलाबा इलाके में स्थित एक सुरक्षित नौसेना परिसर के भीतर भारतीय नौसेना के जवान पूरणमल मेहरा और उनके परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। इस दुखद घटना के बाद से उनके राजस्थान स्थित पैतृक गांव ककराना में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। इस हृदय विदारक हादसे ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
मुंबई पुलिस इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के असल कारणों का आधिकारिक खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगा। शुरुआती जांच के दौरान घटनास्थल से किसी भी प्रकार का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई पारिवारिक कलह, मानसिक तनाव या अन्य कोई व्यक्तिगत कारण था। फिलहाल हत्या और आत्महत्या दोनों ही एंगल से मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
तीन दिन तक फोन न उठने पर हुआ संदेह
इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा तब हुआ जब मृतक जवान के परिजनों ने उनसे संपर्क साधने की कोशिश की। पूरणमल के छोटे भाई मुकेश कुमार ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले तीन दिनों से परिवार के सदस्य उन्हें लगातार फोन कर रहे थे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। फोन रिसीव न होने की वजह से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती गई। इसके बाद शनिवार को मामले की जानकारी स्थानीय नौसेना अधिकारियों तक पहुंचाई गई। आखिरकार शनिवार की रात करीब 11 बजे मुंबई से परिजनों को इस मनहूस खबर की सूचना प्राप्त हुई।
वर्ष 2015 में सेना में भर्ती हुए थे जवान
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, पूरणमल मेहरा ने साल 2015 में जोधपुर से भारतीय नौसेना की सेवा ज्वाइन की थी। इसके बाद वर्ष 2020 में उनका विवाह सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र की रहने वाली ओमा मेहरा के साथ हुआ था। वह हाल ही में करीब 20 दिन की छुट्टी बिताकर अपने गांव ककराना आए थे और लगभग 9 महीने पहले की यह छुट्टी उनके जीवन की आखिरी पारिवारिक यात्रा साबित हुई। घटना से मात्र छह दिन पहले ही उनकी अपने परिजनों से फोन पर साधारण बातचीत हुई थी, तब किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।
मिलनसार स्वभाव के धनी थे पूरणमल
गांव के लोगों का कहना है कि पूरणमल का स्वभाव बेहद मिलनसार और मददगार था। पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र के मुताबिक, उनकी किसी से भी किसी भी प्रकार की कोई रंजिश नहीं थी। वह जब भी गांव आते थे, सभी से प्रेमपूर्वक मिलते थे। उनके परिवार की पृष्ठभूमि देशसेवा से जुड़ी रही है। पूरणमल तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनके बड़े भाई बृजलाल मेहरा भी भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, जबकि उनके छोटे भाई मुकेश कुमार अपने पिता के साथ गांव में ही रहते हैं। उनके पिता शंभुदयाल ककराना गांव में ही अपनी एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं और परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
सेना के वाहन से गांव पहुंचा पार्थिव शरीर
सोमवार को जब चारों शव गुढ़ागौड़जी थाने से सेना के विशेष ट्रक में ककराना गांव पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। जवान की अंतिम यात्रा को सेना के वाहन से निकाला गया, जबकि उनकी पत्नी की अर्थी को परिजनों और गांव के लोगों ने कंधा दिया। इसके अलावा दोनों मासूम बच्चों के पार्थिव शरीर को भी परिजन और ग्रामीण अपने हाथों में उठाकर श्मशान घाट तक ले गए। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की रुलाई छूट गई।
सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
गांव के श्मशान घाट में पूरणमल मेहरा को राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान सेना के जवानों ने उनके पिता शंभुदयाल को तिरंगा ध्वज सौंपा। जवान के छोटे भाई मुकेश कुमार ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। एक तरफ देश की हिफाजत करने वाले वीर जवान की अंतिम विदाई का गम था, तो दूसरी तरफ एक ही परिवार के चार सदस्यों को एक साथ खोने का असहनीय दर्द था। ककराना गांव में पसरा यह सन्नाटा इस बात की गवाही दे रहा है कि यह क्षति कभी पूरी नहीं की जा सकती है।
























