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मुंबई के नौसेना परिसर में मृत मिले जवान पूरणमल मेहरा, पत्नी और दो बच्चे, पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कारराजस्थान
17 अग॰ 2026, 11:53 pm (1 दिन पहले)· 2

मुंबई के नौसेना परिसर में मृत मिले जवान पूरणमल मेहरा, पत्नी और दो बच्चे, पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार

मुंबई के कोलाबा स्थित नेवी नगर में भारतीय नौसेना के जवान पूरणमल मेहरा, उनकी पत्नी और दो बच्चों के शव मिलने से हड़कंप मच गया है। चारों के पार्थिव शरीर झुंझुनूं के ककराना गांव पहुंचे, जहां उनका गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।

महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई के कोलाबा इलाके में स्थित एक सुरक्षित नौसेना परिसर के भीतर भारतीय नौसेना के जवान पूरणमल मेहरा और उनके परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। इस दुखद घटना के बाद से उनके राजस्थान स्थित पैतृक गांव ककराना में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। इस हृदय विदारक हादसे ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।

मुंबई पुलिस इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के असल कारणों का आधिकारिक खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगा। शुरुआती जांच के दौरान घटनास्थल से किसी भी प्रकार का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई पारिवारिक कलह, मानसिक तनाव या अन्य कोई व्यक्तिगत कारण था। फिलहाल हत्या और आत्महत्या दोनों ही एंगल से मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

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तीन दिन तक फोन न उठने पर हुआ संदेह

इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा तब हुआ जब मृतक जवान के परिजनों ने उनसे संपर्क साधने की कोशिश की। पूरणमल के छोटे भाई मुकेश कुमार ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले तीन दिनों से परिवार के सदस्य उन्हें लगातार फोन कर रहे थे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। फोन रिसीव न होने की वजह से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती गई। इसके बाद शनिवार को मामले की जानकारी स्थानीय नौसेना अधिकारियों तक पहुंचाई गई। आखिरकार शनिवार की रात करीब 11 बजे मुंबई से परिजनों को इस मनहूस खबर की सूचना प्राप्त हुई।

वर्ष 2015 में सेना में भर्ती हुए थे जवान

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, पूरणमल मेहरा ने साल 2015 में जोधपुर से भारतीय नौसेना की सेवा ज्वाइन की थी। इसके बाद वर्ष 2020 में उनका विवाह सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र की रहने वाली ओमा मेहरा के साथ हुआ था। वह हाल ही में करीब 20 दिन की छुट्टी बिताकर अपने गांव ककराना आए थे और लगभग 9 महीने पहले की यह छुट्टी उनके जीवन की आखिरी पारिवारिक यात्रा साबित हुई। घटना से मात्र छह दिन पहले ही उनकी अपने परिजनों से फोन पर साधारण बातचीत हुई थी, तब किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।

मिलनसार स्वभाव के धनी थे पूरणमल

गांव के लोगों का कहना है कि पूरणमल का स्वभाव बेहद मिलनसार और मददगार था। पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र के मुताबिक, उनकी किसी से भी किसी भी प्रकार की कोई रंजिश नहीं थी। वह जब भी गांव आते थे, सभी से प्रेमपूर्वक मिलते थे। उनके परिवार की पृष्ठभूमि देशसेवा से जुड़ी रही है। पूरणमल तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनके बड़े भाई बृजलाल मेहरा भी भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, जबकि उनके छोटे भाई मुकेश कुमार अपने पिता के साथ गांव में ही रहते हैं। उनके पिता शंभुदयाल ककराना गांव में ही अपनी एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं और परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

सेना के वाहन से गांव पहुंचा पार्थिव शरीर

सोमवार को जब चारों शव गुढ़ागौड़जी थाने से सेना के विशेष ट्रक में ककराना गांव पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। जवान की अंतिम यात्रा को सेना के वाहन से निकाला गया, जबकि उनकी पत्नी की अर्थी को परिजनों और गांव के लोगों ने कंधा दिया। इसके अलावा दोनों मासूम बच्चों के पार्थिव शरीर को भी परिजन और ग्रामीण अपने हाथों में उठाकर श्मशान घाट तक ले गए। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की रुलाई छूट गई।

सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

गांव के श्मशान घाट में पूरणमल मेहरा को राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान सेना के जवानों ने उनके पिता शंभुदयाल को तिरंगा ध्वज सौंपा। जवान के छोटे भाई मुकेश कुमार ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। एक तरफ देश की हिफाजत करने वाले वीर जवान की अंतिम विदाई का गम था, तो दूसरी तरफ एक ही परिवार के चार सदस्यों को एक साथ खोने का असहनीय दर्द था। ककराना गांव में पसरा यह सन्नाटा इस बात की गवाही दे रहा है कि यह क्षति कभी पूरी नहीं की जा सकती है।

सवाल-जवाब

पूरनमल मेहरा कौन थे?
पूरनमल मेहरा भारतीय नौसेना में कार्यरत एक जवान थे, जो मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के ककराना गांव के रहने वाले थे।
यह घटना कहां घटी?
यह घटना मुंबई के कोलाबा स्थित उच्च सुरक्षा वाले नेवी नगर के सरकारी आवास में घटी।
इस घटना में किनकी जान गई?
इस घटना में नौसेना के जवान पूरणमल मेहरा, उनकी पत्नी ओमा मेहरा और उनके दो मासूम बच्चों की मौत हो गई।
घटना की जानकारी परिवार को कैसे मिली?
तीन दिनों तक फोन रिसीव न होने पर परिजनों ने नौसेना के अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद शनिवार रात करीब 11 बजे परिवार को मौत की सूचना मिली।
अंतिम संस्कार कहां किया गया?
सभी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव ककराना में किया गया, जहां जवान और उनकी पत्नी को एक ही चिता पर और बच्चों को दफनाया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·1 दिन पहले

यह दुखद घटना रक्षा बलों के कर्मियों और उनके परिवारों में बढ़ते मानसिक दबाव व तनाव के गंभीर मुद्दे को उजागर करती है। उच्च सुरक्षा वाले परिसरों में ऐसी घटनाएं यह मांग करती हैं कि सैन्य व नौसेना प्रशासन अपने कर्मियों के लिए नियमित मनोवैज्ञानिक परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र की प्रभावशीलता की नए सिरे से समीक्षा करे।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

मुंबई के नौसेना परिसर में हुई इस पूरी घटना की गहराई तक पहुँचने के लिए केवल पारंपरिक पुलिस जाँच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि फॉरेंसिक साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट की गहन स्कैनिंग की आवश्यकता है। एक सैन्य परिवार में इस तरह का सामूहिक अवसाद या संकट सुरक्षा बलों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणालियों, काउंसलिंग विंग्स और कार्यस्थल के दबाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है। भविष्य में ऐसे दुखद हादसों को रोकने के लिए रक्षा कर्मियों के बीच मनोवैज्ञानिक सहायता तंत्र को और अधिक मजबूत और सुलभ बनाना होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

यह त्रासदी केवल एक स्थानीय आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह उच्च सुरक्षा वाले परिसरों में तैनात हमारे रक्षा कर्मियों की मनोवैज्ञानिक भलाई और संस्थागत निगरानी तंत्र पर एक गंभीर भू-राजनीतिक और प्रशासनिक सवालिया निशान लगाती है। जब एक सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े परिवार के भीतर इस तरह का अभूतपूर्व संकट उत्पन्न होता है, तो यह कमांड स्ट्रक्चर और वेलफेयर यूनिट्स के बीच संवाद की कमी को उजागर करता है। नीतिगत स्तर पर, सशस्त्र बलों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य ऑडिट को अनिवार्य बनाना और गोपनीय परामर्श कक्षों की पहुंच को ग्रासरूट स्तर तक प्रभावी करना अब समय की सबसे बड़ी मांग है, ताकि बल के भीतर ऐसे अदृश्य तनावों को समय रहते पहचाना और समाप्त किया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

मुंबई के कोलाबा स्थित सुरक्षित नौसेना परिसर में एक पूरे परिवार की इस तरह संदिग्ध मौत होना सुरक्षा और आंतरिक कल्याण दोनों मोर्चों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हाई-सिक्योरिटी ज़ोन के भीतर ऐसी घटना यह रेखांकित करती है कि वर्दीधारी कर्मियों और उनके परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य तथा आवासीय सुरक्षा की मॉनिटरिंग कितनी महत्वपूर्ण है। अब फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की गहन जांच से ही यह साफ हो पाएगा कि इसके पीछे पारिवारिक तनाव था या कोई आपराधिक साजिश।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

इस मामले में मुंबई पुलिस की फॉरेंसिक और विसरा जांच के नतीजे ही यह तय करेंगे कि यह सामूहिक आत्महत्या है या किसी बाहरी दखल वाला आपराधिक कृत्य। हाई-सिक्योरिटी नेवी नगर जैसे संवेदनशील और नियंत्रित परिसर के भीतर इस तरह की घटना न केवल आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की गहन आंतरिक समीक्षा की मांग करती है, बल्कि यह भी रेखांकित करती है कि डिफेंस परिवारों के भीतर छिपे मानसिक तनाव और घरेलू कलह की समय पर पहचान और काउंसलिंग कितनी आवश्यक है।

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