जयपुर में रिहायशी इलाकों की आड़ में बरसों से चल रहे कमर्शियल कारोबार पर अब असली शिकंजा कसता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च को अवैध निर्माण और गैर-कानूनी व्यवसायीकरण को लेकर जो सख्त रुख अपनाया था, उसका असर अब जमीन पर दिखने लगा है और देशभर के नगर निकाय हरकत में आ गए हैं। इसी कड़ी में जयपुर विकास प्राधिकरण यानी जेडीए ने भी पहला ठोस कदम उठाते हुए एक नोटिस जारी किया है, जिसने शहर के अवैध दुकानदारों और कारोबारियों के बीच खलबली मचा दी है।
भांकरोटा की संपत्ति को थमाया नोटिस
जेडीए ने 13 जुलाई को भांकरोटा इलाके की एक संपत्ति को नोटिस थमाया है। यह कार्रवाई जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1982 के प्रावधानों के आधार पर की गई है, जिसमें धारा 32(1) और 32(6) का हवाला दिया गया है। नोटिस में जिस संपत्ति का जिक्र है, वहां एक ब्यूटी लाउंज संचालित हो रहा था, जबकि यह जमीन पूरी तरह रहवासी उपयोग के लिए आरक्षित है। प्राधिकरण ने संचालकों को साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समय सीमा में यह गड़बड़ी नहीं सुधारी गई, तो प्राधिकरण इसके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाएगा।
चिमनपुरा गांव की पुरानी जमीनी लड़ाई
दरअसल यह पूरा मामला भांकरोटा के चिमनपुरा गांव से जुड़े एक पुराने जमीनी झगड़े की कड़ी लगता है। राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने पहले शिकायत दर्ज कराई थी कि जिस जमीन को रिहायशी टाउनशिप के लिए आरक्षित रखा गया था, वहां रिसॉर्ट, फर्नीचर की दुकान, बुटीक, सैलून, ढाबे और कपड़ों की कई दुकानें अवैध तरीके से खड़ी कर दी गई हैं। कंपनी का आरोप था कि जेडीए के अपीलीय न्यायाधिकरण और राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इस बारे में निर्देश दिए थे, फिर भी स्थानीय प्रशासन ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया और मामला जस का तस बना रहा।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार से मचा हड़कंप
हाईकोर्ट और न्यायाधिकरण से राहत न मिलने पर कंपनी आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। 20 मई को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत विभिन्न राज्यों की ओर से दाखिल जवाबों से बेहद नाराज नजर आई। अदालत का कहना था कि अधिकारी सिर्फ कागजों पर उल्लंघनों की फेहरिस्त बना रहे हैं, जबकि असल मौके पर कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही। अदालत ने अफसरों को महज खानापूर्ति से आगे बढ़ने की नसीहत दी और मौके पर सीलिंग या ध्वस्तीकरण जैसे ठोस कदम उठाकर उसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा।
क्या अब चलेगा बुलडोजर?
सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती और लगातार निगरानी के बीच जेडीए के इस ताजा नोटिस को शहर में प्रवर्तन की दिशा में पहली बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जिन ठिकानों पर बार-बार चेतावनी के बावजूद अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है, वहां जेडीए सिर्फ नोटिस तक सीमित रहता है या आगे बढ़कर सीलिंग करता है और बुलडोजर चलाकर निर्माण को जमींदोज करता है।



















