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विमल इलायची विज्ञापन पर महाराष्ट्र FDA का एक्शन, कारण बताओ नोटिस के दायरे में आए तीन बड़े फिल्म कलाकारमहाराष्ट्र
16 अग॰ 2026, 10:24 am (2 घंटे पहले)· 3

विमल इलायची विज्ञापन पर महाराष्ट्र FDA का एक्शन, कारण बताओ नोटिस के दायरे में आए तीन बड़े फिल्म कलाकार

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर तीन प्रमुख फिल्म अभिनेताओं से स्पष्टीकरण मांगा है। नियामक निकाय का मानना है कि यह प्रचार प्रतिबंधित पान मसाला उत्पाद की सरोगेट ब्रांडिंग की श्रेणी में आ सकता है।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने विमल इलायची से जुड़े एक व्यावसायिक विज्ञापन के संबंध में फिल्म अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को आधिकारिक कारण बताओ नोटिस प्रेषित किया है। नियामक प्राधिकरण का प्राथमिक संदेह है कि यह प्रचार अभियान वास्तव में प्रतिबंधित विमल पान मसाला का एक अप्रत्यक्ष अथवा सरोगेट विज्ञापन हो सकता है। प्रशासनिक निकाय ने इस अभियान में शामिल तीनों अभिनेताओं से उनकी व्यक्तिगत भागीदारी, संलिप्तता और प्रचारात्मक भूमिका पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

सरोगेट विज्ञापन और राज्य में लगे प्रतिबंध के मानदंड

खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आधिकारिक विश्लेषण के अनुसार, उक्त विज्ञापन में दर्शाए गए ब्रांड नाम, विशिष्ट संवाद संरचना और दृश्य प्रस्तुतिकरण की शैली सीधे तौर पर विमल ब्रांड की पहचान को तंबाकू युक्त या प्रतिबंधित पान मसाला श्रेणी से जोड़ती है। नियामक संस्था का तर्क है कि इस प्रकार का प्रचार उपभोक्ताओं के मन में भ्रम उत्पन्न करता है और मुख्य प्रतिबंधित उत्पाद की ब्रांड वैल्यू को बढ़ावा देता है।

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यह कानूनी कार्रवाई महाराष्ट्र सरकार द्वारा 13 जुलाई 2026 को लागू किए गए उस व्यापक प्रशासनिक आदेश की पृष्ठभूमि में आई है, जिसके तहत संपूर्ण राज्य में पान मसाला जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष की अवधि के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। नियामक अधिकारियों का कहना है कि जब किसी उत्पाद पर प्रत्यक्ष पाबंदी लागू हो, तो उससे मिलते-जुलते नाम और पैकेजिंग वाले अन्य सामान का भ्रामक प्रचार कानूनी दायरे का उल्लंघन माना जाता है।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धाराएं और वित्तीय दंड के प्रावधान

प्रशासनिक अधिकारियों ने जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में Food Safety and Standards Act, 2006 (FSS Act) के विभिन्न विधिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख किया है। विशेष रूप से, नोटिस में अधिनियम की धारा 24 और धारा 53 के क्रियान्वयन का हवाला दिया गया है, जो खाद्य पदार्थों से संबंधित भ्रामक प्रचार, अनुचित व्यापार प्रथाओं और गलत सूचना फैलाने वाले विज्ञापनों को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखती हैं।

विधिक प्रावधानों के तहत, यदि किसी खाद्य उत्पाद का विज्ञापन भ्रामक या खाद्य सुरक्षा कानूनों और उसके तहत तय किए गए नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो दोषी पक्षों पर 10 लाख रुपये तक का वित्तीय जुर्माना लगाया जा सकता है। प्राधिकरण ने रेखांकित किया है कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे विमल इलायची के इस विज्ञापन को गहन जांच के अधीन रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विज्ञापनों के लिए निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं।

कलाकारों से मांगा गया जवाब और नियामक संस्था का रुख

नियामक संस्था ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को पृथक रूप से नोटिस भेजकर उनसे यह स्पष्टीकरण देने को कहा है कि खाद्य सुरक्षा कानून के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। FDA का मुख्य ध्यान इस बात का मूल्यांकन करने पर केंद्रित है कि विज्ञापन की मूल सामग्री, इसके निर्माण की मंशा और इसमें शामिल लोकप्रिय हस्तियों द्वारा दी गई समर्थन भूमिका कानून के बुनियादी सिद्धांतों के अनुरूप है अथवा नहीं।

महाराष्ट्र एफडीए ने स्पष्ट किया है कि व्यापार में पारदर्शिता बनाए रखना और उपभोक्ताओं को भ्रामक दावों से बचाना कानून का प्राथमिक उद्देश्य है। खाद्य उत्पादों के प्रचार में अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के उद्देश्य से शुरू की गई इस जांच प्रक्रिया में तीनों अभिनेताओं का औपचारिक पक्ष प्राप्त होने के बाद ही आगे की विधिक कार्रवाई तय की जाएगी।

सवाल-जवाब

महाराष्ट्र FDA ने किन अभिनेताओं को नोटिस जारी किया है?
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने फिल्म अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
यह कार्रवाई किस विज्ञापन से संबंधित है?
यह कानूनी नोटिस विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर जारी किया गया है, जिसके प्रतिबंधित विमल पान मसाला का सरोगेट प्रचार होने का आरोप है।
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कितना जुर्माना हो सकता है?
Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 24 और 53 के अंतर्गत भ्रामक खाद्य विज्ञापन के मामले में 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
महाराष्ट्र में पान मसाला पर प्रतिबंध कब लागू किया गया था?
महाराष्ट्र में 13 जुलाई 2026 के आदेश के तहत पान मसाला जैसे प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर एक साल के लिए रोक लगाई गई है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·58 मिनट पहले

महाराष्ट्र एफडीए द्वारा उठाए गए इस कदम से देश भर में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और सरोगेट विज्ञापनों पर कानूनी शिकंजा कसने की नई लकीर खिंच गई है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम की धारा 24 और 53 के तहत 10 लाख रुपये तक के जुर्माने के प्रावधान और कारण बताओ नोटिस से स्पष्ट है कि विज्ञापनों के जरिए तंबाकू या प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार पर अब प्रशासनिक नियंत्रण बेहद सख्त हो रहा है। आगे चलकर अन्य राज्यों के नियामक भी इस मामले को नजीर मानकर कड़े कदम उठा सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·58 मिनट पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 24 और 53 के अंतर्गत यह नोटिस केवल विज्ञापनों की कानूनी वैधता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सेलिब्रिटी जवाबदेही तय करने का एक गंभीर प्रशासनिक प्रयास है। जब राज्य में पान मसाला पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है, तो ऐसे मामलों में अभिनेताओं की व्यक्तिगत संलिप्तता की जाँच यह तय करेगी कि सरोगेट ब्रांडिंग के जरिए नियमों की कितनी अनदेखी की जा रही है। यदि ये कलाकार संतोषजनक जवाब देने में असफल रहते हैं, तो अन्य राज्यों के नियामक भी तंबाकू और प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार पर लगाम कसने के लिए इसी तर्ज पर कड़े कानूनी कदम उठा सकते हैं।

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