सीकर जिले के पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब मवेशियों की सामान्य सेहत जांच और जरूरी टेस्ट करवाने के लिए उन्हें जिला मुख्यालय तक लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा, यह सुविधा अब उनके अपने गांव और कस्बे में ही उपलब्ध होगी। पशुपालन विभाग ने ग्रामीण इलाकों में पशु स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सीकर जिले की 12 पंचायत समितियों में प्राथमिक रोग निदान प्रयोगशालाएं शुरू कर दी हैं। इस पहल से पशुओं की शुरुआती जांच अब स्थानीय स्तर पर ही आसानी से हो सकेगी, जिससे बीमारी सही समय पर पकड़ में आएगी और इलाज में लगने वाली देरी और खर्च दोनों में कमी आएगी।
बारह पंचायत समितियों में शुरू हुई नई लैब
पशुपालन विभाग ने अजीतगढ़, दांतारामगढ़, धोद, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, खंडेला, नेछवा, नीमकाथाना, पलसाना, पाटन, पिपराली और श्रीमाधोपुर, इन बारह पंचायत समिति मुख्यालयों पर आधुनिक प्रयोगशालाएं तैयार की हैं। हर लैब को ठीक से चलाने के लिए वहां एक प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन की नियुक्ति भी कर दी गई है। यह टेक्निशियन मवेशियों के खून, गोबर और अन्य जरूरी नमूनों की सटीक जांच करके समय पर रिपोर्ट सौंपेगा। विभाग के इस कदम के बाद ग्रामीण पशुपालकों को अपने बीमार मवेशियों के सही इलाज के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा, सारी जरूरी जांच सुविधाएं अब उनके अपने इलाके में ही मौजूद रहेंगी।
खून से लेकर थनैला तक, अब हर जांच गांव में ही
इन नई प्रयोगशालाओं में मवेशियों के खून की बारीकी से जांच होगी, जिससे प्रोटोजोआ और दूसरे खतरनाक परजीवी संक्रमणों का तुरंत पता चल सकेगा। इसके अलावा गोबर की जांच, दुधारू पशुओं में होने वाले थनैला यानी मास्टाइटिस रोग की पहचान, त्वचा से जुड़े परजीवी संक्रमण, कीटोन बॉडी और यूरिया जैसी जरूरी जांचें भी अब स्थानीय स्तर पर ही हो सकेंगी। इन एडवांस जांच सुविधाओं की मदद से पशुओं में होने वाली गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में ही पकड़ना आसान हो जाएगा, जिससे पशुधन को समय रहते सुरक्षित किया जा सकेगा।
डॉ. वीरेंद्र शर्मा बोले, शुरुआती जांच से बचेगी पशुओं की जान
रोग निदान प्रयोगशाला, सीकर के जिला प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि अगर पशुओं की बीमारी शुरुआती चरण में ही पकड़ में आ जाए, तो गंभीर संक्रमण की आशंका काफी हद तक घट जाती है। प्रारंभिक जांच के नतीजों के आधार पर पशुओं का तुरंत और सटीक इलाज शुरू किया जा सकता है, जिससे मृत्यु दर में बड़ी कमी आएगी। साथ ही, बीमारी के बढ़ने से पहले ही इलाज शुरू हो जाने से पशुपालकों को होने वाला भारी आर्थिक नुकसान भी रुकेगा और इलाके में पशुधन की सेहत व उत्पादकता में सुधार आएगा।
सिर्फ सीकर नहीं, पूरे राजस्थान की 352 पंचायत समितियों में पहुंचेगी सुविधा
डॉ. शर्मा ने आगे बताया कि यह पहल सिर्फ सीकर जिले तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार की व्यापक योजना के तहत पूरे राजस्थान की 352 पंचायत समितियों में भी इसी तरह की प्राथमिक रोग निदान प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इस कदम का मकसद ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में पशु चिकित्सा सेवाओं को ज्यादा सुलभ, असरदार और आधुनिक बनाना है, ताकि दूर बसे गांवों के पशुपालकों को भी अपने मवेशियों के लिए अच्छी सेहत सुविधाएं और समय पर इलाज अपने घर के पास ही मिल सके।
हर लैब में उपकरण, केमिकल और ट्रेनिंग की पूरी व्यवस्था
डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि जिले की सभी पंचायत समिति स्तर की लैब को पूरी तरह सक्रिय कर काम पर लगा दिया गया है। इन सभी केंद्रों पर जांच के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरण, केमिकल, जांच सामग्री और बाकी संसाधन पर्याप्त मात्रा में पहुंचा दिए गए हैं। इसके साथ ही सभी तैनात लैब टेक्निशियनों को नई जांच प्रक्रियाओं और तकनीकों की खास व्यावहारिक ट्रेनिंग भी दी गई है, ताकि ग्रामीण स्तर पर होने वाला जांच कार्य पूरी गुणवत्ता, सटीकता और तय मानकों के मुताबिक ही पूरा हो।
पशुपालकों के समय, मेहनत और पैसे की होगी बचत
गांव के करीब ही ये आधुनिक जांच सुविधाएं मिलने से पशुपालकों के समय, मेहनत और आने-जाने पर होने वाले भारी खर्च की सीधी बचत होगी। पहले मवेशियों की छोटी-मोटी और सामान्य जांच के लिए भी ग्रामीणों को मीलों दूर जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे अक्सर रिपोर्ट आने में देर हो जाती थी और इलाज टलता रहता था। अब गांव के बिल्कुल पास ही तुरंत जांच और शुरुआती बीमारी की पहचान संभव होने से पशुओं का सही समय पर इलाज शुरू हो सकेगा। पशुपालन विभाग का यह कदम न सिर्फ बेजुबान पशुओं की जान बचाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन कारोबार को भी नई मजबूती देगा।













