सीकर जिले में स्थित विश्वविख्यात खाटूश्यामजी धाम में प्रतिदिन उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के बीच हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता सुदेश बेरी ने भी अपनी हाजिरी लगाई। बाबा श्याम के प्रति गहरी आस्था रखने वाले सुदेश बेरी ने मंदिर के गर्भगृह में शीश नवाकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की और परिवार तथा समाज के कल्याण के लिए प्रार्थना की। इस धाम पर आम भक्तों के अलावा राजनीति, क्रीड़ा जगत, सिनेमा और उद्योग से जुड़ी हस्तियां नियमित अंतराल पर आशीर्वाद लेने आती रहती हैं।
मंदिर समिति ने किया पारंपरिक सत्कार और सम्मान
धाम पहुंचने पर श्री श्याम मंदिर कमेटी की तरफ से अभिनेता का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शक्ति सिंह चौहान तथा श्याम परिवार के सदस्य नरेंद्र सिंह चौहान ने सुदेश बेरी की अगवानी की। इसके उपरांत उन्होंने गर्भगृह में दर्शन किए और विधिविधान से पूजा संपन्न की। दर्शन के पश्चात मंदिर कमेटी ने अभिनेता को बाबा श्याम का पवित्र दुपट्टा ओढ़ाया और स्मृति प्रतीक चिह्न भेंट कर उनका नागरिक सम्मान किया।
मंदिर प्रांगण में जैसे ही बॉलीवुड कलाकार के आने की खबर फैली, वहां मौजूद अन्य श्रद्धालुओं में उन्हें एक नजर देखने के लिए खासा उत्साह देखने को मिला। अभिनेता ने भी भक्तों का अभिवादन स्वीकार किया और पूरे मंदिर वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रसार महसूस किया।
दर्शन के बाद अभिनेता ने साझा किए अपने आध्यात्मिक विचार
पूजा-अर्चना संपन्न करने के उपरांत सुदेश बेरी ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि खाटूधाम आकर बाबा के सम्मुख नतमस्तक होना उनके जीवन का एक अत्यंत विशिष्ट और पावन अनुभव रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि बाबा श्याम का प्रभाव और उनकी ख्याति अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी उनके अनगिनत भक्त मौजूद हैं। अभिनेता ने कहा कि इस पावन दरबार में कदम रखते ही अंतर्मन को असीम शांति मिलती है और एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सभी भक्तों के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था पर जोर
श्री श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शक्ति सिंह चौहान ने इस अवसर पर जानकारी दी कि खाटूधाम में पूरे साल देश के कोने-कोने से जनप्रतिनिधियों, खिलाड़ियों, अभिनेताओं और विशिष्ट अतिथियों का तांता लगा रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चाहे कोई सामान्य श्रद्धालु हो या फिर कोई वीआईपी अतिथि, हर किसी को बिना किसी बाधा के सुव्यवस्थित और सहज दर्शन प्राप्त हो सकें। राजस्थान का यह तीर्थस्थल विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान रखता है और इसे जनमानस में 'हारे का सहारा' के रूप में जाना जाता है।
बर्बरीक के शीश दान और श्रीकृष्ण के वरदान की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा श्याम को भगवान श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है और उन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है। महाभारत काल की कथा का उल्लेख करते हुए बताया जाता है कि भीम के पौत्र बर्बरीक जब युद्ध में भाग लेने की तैयारी कर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे उनके शीश का दान मांग लिया था।
बर्बरीक ने किंचित संकोच किए बिना अपने मस्तक का दान दे दिया। उनके इस अप्रतिम त्याग और भक्ति से अभिभूत होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उनकी पूजा स्वयं श्रीकृष्ण के 'श्याम' नाम से होगी। भगवान ने यह भी आशीष दिया कि वे जीवन में हार मान चुके और संकटग्रस्त लोगों के सबसे बड़े संबल और सहायक बनेंगे। इसी पावन वरदान के कारण आज भी करोड़ों भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर खाटूश्यामजी के द्वार पर पहुंचते हैं।



















