कोटा स्थित राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर में छात्र अक्षित शर्मा के निधन के बाद उपजा आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. घटना के बाद दूसरे दिन भी छात्र अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे रहे. शुक्रवार की सुबह से लेकर देर शाम तक विश्वविद्यालय प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनरत विद्यार्थियों के साथ कई दौर की बातचीत की, किंतु छात्र अपनी प्रमुख मांगों पर ठोस लिखित आश्वासन लिए बिना आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं हुए. परिसर का माहौल दिन भर तनावपूर्ण रहा और विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर औपचारिक दस्तावेज नहीं सौंपा जाता, उनका विरोध जारी रहेगा.
प्रशासनिक अधिकारियों और कुलगुरु ने की समझाइश की कोशिश
शुक्रवार को सुबह सबसे पहले कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी स्वयं आंदोलन स्थल पर पहुंचे और उन्होंने छात्रों से सीधे बातचीत की. कुलगुरु ने विद्यार्थियों की शिकायतें सुनीं और उन्हें समझाने का प्रयास किया. इसके बाद दोपहर के समय स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोटा के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) विनोद मल्होत्रा तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष मिश्रा विश्वविद्यालय पहुंचे. दोनों प्रशासनिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों से लंबी चर्चा की और धरना समाप्त करने का आग्रह किया. इसके बावजूद छात्र अपनी मांगों के निस्तारण को लेकर औपचारिक और लिखित गारंटी पर अड़े रहे.
कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने बातचीत के दौरान विद्यार्थियों के समक्ष विश्वविद्यालय की व्यावहारिक कठिनाइयों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह परिसर लगभग 50 वर्ष पुराना है. पुरानी इमारतों के रख-रखाव, सरकारी नियमों और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण विभिन्न व्यवस्थाओं में रातों-रात बदलाव करना संभव नहीं हो पाता है, लेकिन प्रशासन समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास करेगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अक्षित शर्मा की असामयिक मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के उपरांत ही हो सकेगी.
24 घंटे चिकित्सा सुविधा और बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग
धरना दे रहे छात्रों ने परिसर की बदहाल स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. आंदोलनरत विद्यार्थियों की प्रमुख मांग है कि विश्वविद्यालय परिसर में 24 घंटे चिकित्सा केंद्र संचालित किया जाए, जिसमें कम से कम दो स्थायी डॉक्टरों की तैनाती और हर समय एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित हो. छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के 8 छात्रावासों में 2,500 से अधिक छात्र-छात्राएं निवास करते हैं, जबकि वर्तमान में परिसर की डिस्पेंसरी केवल सीमित घंटों के लिए ही खुलती है. रात के समय यदि किसी विद्यार्थी का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ जाए, तो तत्काल उपचार मिलना अत्यंत कठिन हो जाता है.
चिकित्सा सेवाओं के अतिरिक्त विद्यार्थियों ने छात्रावासों और शैक्षणिक भवनों के तत्काल जीर्णोद्धार, पूरे परिसर में बेहतर साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और सुरक्षित भोजन की व्यवस्था करने की भी मांग रखी है. छात्रों ने चिंता व्यक्त की कि परिसर में कई स्थानों पर पर्याप्त रोशनी का अभाव है, जिसके चलते रात के समय जहरीले सांप निकलने का खतरा बना रहता है. इन जोखिमों से निपटने के लिए छात्रों ने कैंपस में स्ट्रीट लाइट लगाने और 24 घंटे एक रेस्क्यू टीम तैनात करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है.
कैंडल मार्च निकालकर दी गई श्रद्धांजलि
दिनभर चले विचार-विमर्श और गतिरोध के पश्चात शुक्रवार की शाम को विद्यार्थियों ने परिसर में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला. इस मार्च के माध्यम से विद्यार्थियों ने दिवंगत छात्र अक्षित शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. छात्रों ने दोहराया कि परिसर में शिक्षा ग्रहण करने आने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत सुरक्षा और स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन जारी है और विद्यार्थी प्रबंधन के आधिकारिक लिखित आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं.





















